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भाजपा के अंदर की उठापटक तेज बिना मुख्यमंत्री चेहरा के मैदान में उतरी

  • कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी कामाख्या मंदिर पहुंची

  • कांग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन का कुनबा भारी

  • बीपीएफ के साथ आने से बोड़ोलैंड में पलड़ा भारी

  • महागठबंधन के दल भी चुनाव प्रचार में कूद पड़े

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : भाजपा के अंदर की उठापटक अब धीरे धीरे स्पष्ट होती चली जा रही है। असम

विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही यहां की सियासत भी गर्माने लगी है।

चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद, भाजपा गठबंधन और कांग्रेस गठबंधन दोनों ने

अपनी-अपनी रणनीति पेश करके चुनाव प्रचार शुरू किया, लेकिन बिना मुख्यमंत्री

उम्मीदवार के असम चुनाव में उतरा भाजपा के नेतृत्व वाले और कांग्रेस के नेतृत्व वाले

महागठबंधन दोनों। भाजपा नेतृत्व ने पार्टी के भीतर झगड़े को रोकने के लिए मुख्यमंत्री

पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की।

सीएम के नाम की घोषणा से बिगड़ सकती है बात

साथ ही, इस रणनीति के साथ, कांग्रेस ने किसी भी पार्टी नेता को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के

नाम की घोषणा नहीं की है। यहाँ उल्लेख है कि भारतीय जनता पार्टी ने असम विधानसभा

चुनाव में अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए इस बार वहां कोई मुख्यमंत्री

उम्मीदवार घोषित नहीं करने का फैसला किया है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पार्टी वहां

चुनाव कोई एक चेहरा आगे रखकर नहीं लड़ेगी। यानी मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल पार्टी

के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं होंगे। यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि अमूमन चुनावी

राज्यों के मुख्यमंत्री स्वाभाविक तौर पर, सीएम पद के दावेदार माने जाते हैं। दरअसल,

बीजेपी ने असम में पार्टी के अंदरुनी समीकरणों के चलते यह फ़ैसला किया है। असम में

हेमंत बिस्वा शर्मा और दिलीप सैकिया जैसे ताक़तवर नेताओं की मौजूदगी मुख्यमंत्री

सर्वानंद सोनेवाल पर भारी पड़ रहीं है।सोनेवाल आरएसएस और बीजेपी की पृष्ठभूमि के

नहीं हैं। पार्टी विधायकों और संगठन से ठीक तालमेल न होना भी उनके लिए भारी पड़ा है।

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सोनेवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित

किया था।

भाजपा के अंदर मुख्यमंत्री के नाम पर अनेकों विवाद

तब वे मोदी सरकार में मंत्री थे, लेकिन स्थानीय समीकरण अभी भारी पड़ रहे हैं। राज्य में

दिलीप सैकिया और हेमंत बिस्व शर्मा पार्टी और सरकार पर भारी पड़ते हैं। उन्हें फिलहाल

दूसरी जिम्मेदारियां दे रखी हैं। जहां दिलीप सैकिया को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया तो

वहीं हेमंत बिस्वा शर्मा नेडा यानी उत्तर पूर्व प्रजातांत्रिक गठबंधन के अध्यक्ष हैं। शर्मा

उत्तर पूर्व में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार हैं।वैसे बीजेपी अपने शासन वाले राज्यों में

मुख्यमंत्रियों को ही सीएम कैंडिडेट घोषित करती है और उन्हीं को चेहरा बना कर चुनाव

लड़ती आई है। जैसे 2018 के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में रमन सिंह, मध्य प्रदेश

में शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान में वसुंधरा राजे को चेहरा बनाया गया। इसी तरह

2019 में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में तत्कालीन मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में

विधानसभा में चुनाव लड़ने की घोषणा चुनाव से बहुत पहले ही कर दी गई थी। हालांकि

कांग्रेस के नेतृत्व वाले “महाजठ” महागठबंधन ने आज कहा कि असम का मुख्यमंत्री पद

का उम्मीदवार विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के साथ

परामर्श करने के बाद तय किया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव,

अनिरुद्ध सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि समूह की प्रमुख चिंता

भाजपा और उसके सहयोगियों को हराना है।उन्होंने कहा, चुनाव खत्म होने के बाद सभी

दल एक साथ बैठेंगे और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में फैसला करेंगे।बीपीएफ के

महागठबंधन में शामिल होने के बाद आगामी चुनाव। राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने

शुक्रवार से रविवार तक गठबंधन के कई नेताओं से मुलाकात की और कहा कि उनकी पार्टी

असम विधानसभा चुनाव लड़ेगी, हालांकि समूह में शामिल होने के लिए कोई औपचारिक

निर्णय नहीं लिया गया था।

असम के हिंदी भाषी बहुल इलाकों में मौका तलाश रहे हैं तेजस्वी

इस दौरान,इस चुनाव को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव असम के दौरे पर हैं। असम

में उन्होंने आरजेडी के लिए सियासी जमीन तलाशने की शुरुआत कर दी है। तेजस्वी यादव

ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से मुलाकात की। ये

मुलाकात कई मायनों में अहम मानी जा रही है। असम दौरे पर पहुंचे तेजस्वी यादव ने

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से मुलाकात की।

जिसमें असम विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर भी चर्चा हुई।

बिहार के विधानसभा चुनावी रण में तेजस्वी यादव के पक्ष में भले ही परिणाम नहीं आए,

लेकिन उन्होंने यहां उनके द्वारा खेली गई दमदार पारी ने उनके हौसलों को और भी

मजबूत कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये भी है कि यही कारण है कि तेजस्वी

यादव अब पश्चिम बंगाल और असम में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भी हाथ

आजमाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस पार्टी के प्रचार के

लिए अपनी दो दिवसीय यात्रा सोमवार (1 मार्च) से असम मंय शुरू कर चुकी है। सबसे

पहले कांग्रेस महासचिव गुवाहाटी पहुंचीं हैं, जहां वह कामाख्या मंदिर पहुंची हैं। उन्होंने

वहां दर्शन किए। अब जहां उनके कार्यक्रम के मुताबिक वे चुनाव प्रचार शुरू करने के लिए

लखीमपुर के लिए रवाना होंगी। बता दें कि उनकी यात्रा से उनकी पार्टी के अभियान को

गति मिलने की उम्मीद है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन बार इस क्षेत्र का दौरा कर

चुके हैं। प्रियंका ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर कई जिलों का दौरा कर सकती है, जहां

भाजपा और उसके सहयोगी, एजीपी को मजबूत माना जाता है।

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