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रिम्स निदेशक की नियुक्ति पर मंत्री और सचिव में फिर टकराव

  • इंटरव्यू में फिर शामिल हुए डॉ डीके सिंह

  • बन्ना गुप्ता को उनके नाम पर है एलर्जी

  • पहले भी दोनों लोग आपस में टकराये

संवाददाता

रांची: रिम्स निदेशक की नियुक्त के लिए हुए साक्षात्कार को लेकर एक चौंकाने वाला

सामने आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ डीके सिंह

के द्वारा निदेशक पद पर प्रस्तावित साक्षात्कार के लिए जब से आवेदन दिया गया था,

तब से विभाग के सचिव और मंत्री के बीच टकराव की स्थिति बन रही थी। सूत्र इसी बात

की भी पुष्टि कर रहे है कि स्वास्थ्य सचिव को डॉ डीके सिंह सपोर्ट कर रहे थे। दूसरी तरफ

स्वास्थ्य मंत्री इसके लिए राजी नहीं हो रहे थे। जिसके बाद बुधवार को हुए साक्षात्कार में

डीके सिंह को शामिल होने को रोकने के लिए मंत्री और सचिव के बीच आपसी टकराव

बढ़ता जा रहा था। साक्षात्कार के एक दिन पहले अचानक डॉ डीके सिंह के आवेदन को ही

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अमान्य घोषित कर दिया गया। इस बारे में सूत्र का कहना है

कि मंत्री के निर्णय के कारण ही डॉ डीके सिंह का साक्षातकार के लिए आवेदन रद्द किया

गया है।

वहीं रिम्स के अगले निदेशक के लिए साक्षात्कार के पूरा होने के बाद इसको लेकर कयास

लगाया जा रहा है कि इस बार रिम्स का निदेश कौन होगा। इस बारे में बुधवार को हुए

साक्षकार पैनल के सूत्रों का कहना है कि इस बार राज्य के किसी चिकित्सक के रिम्स

निदेशक बनने की उम्मीद अधिक है। अगर रिम्स को झारखंड से स्थायी निदेशक मिलता

है तो लगभग पांच सालों के बाद रिम्स को झारखंड से स्थायी निदेशक मिलेगा।

रिम्स निदेशक मामले में स्थानीय के लॉटरी लगने की चर्चा

इस बीच राजनीतिक माहौल भी इसी रिम्स की वजह से गरमाता नजर आ रहा है। मंत्री के

साथ लगातार टकराव के बाद भी स्वास्थ्य सचिव का अपने पद पर बने रहना, इस बात के

संकेत हैं कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य विभाग के मुद्दे पर भी स्वास्थ्य मंत्री की हर बात को

स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ यह भी पहले से जगजाहिर है कि डॉ सिंह

पिछली सरकार के कार्यकाल में राजनाथ सिंह की पैरवी पर यहां लाये गये थे। इसी वजह

से थोड़ी बहुत अनबन होने के बाद भी तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने उनसे

बैर नहीं मोल लिया था। अब बदली परिस्थितियों में उनका फिर से रिम्स के निदेशक के

लिए साक्षातकार देना इस चर्चा को हवा दे गया है कि अंदरखाने में कुछ और ही खिचड़ी तो

नहीं पकायी जा रही है।


 

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