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राजस्थान में संकट टला तो मणिपुर में चित हो गयी कांग्रेस

  • बहुमत साबित करने में सफल हुए बीरेन सिंह

  •  भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बरकरार

  •  कांग्रेस दो फाड़ छह एमएलए का इस्तीफा

  •  स्पीकर पर कुर्सियां भी फेंकी गयी सदन में

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : राजस्थान में कांग्रेस खेमा में फिलहाल सुलह हो चुकी है। लेकिन राजस्थान पर

पूरे देश का ध्यान होने के बीच ही भाजपा ने मणिपुर में कांग्रेस को मात दे दी है।  भारी

हंगामे के बीच भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार ने विश्वास मत जीत लिया।

सीएम एन. बीरेन सिंह विधानसभा में बहुमत साबित करने में सफल रहे। विपक्ष ने सदन

में भारी हंगामा किया, क्योंकि स्पीकर ने उनके अविश्वास प्रस्ताव को नहीं लिया।

राजस्थान पर सबका ध्यान होने के बीच यहां मणिपुर में विपक्षी नेताओं ने स्पीकर के

खिलाफ प्रदर्शन किया और उन पर कुर्सियां फेंकी। क्योंकि उनके पास संख्या है स्पीकर के

फैसले का बचाव करते हुए, सीएम बीरेन सिंह ने कहा कि वे जीत गए क्योंकि उनके पास

संख्या है। सीएम बीरेन सिंह ने बताया, हमने ध्वनि मत से विश्वास मत जीता है। स्पीकर

जो भी कर रहे हैं वह नियम के अनुसार है। विपक्षी विधायकों की संख्या कम थी. उधर,

विपक्ष के नेता ओ इबोबी सिंह ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। मतदान में, कांग्रेस के

8 विधायक अनुपस्थित पाए गए। वोट के बाद, आठ कांग्रेस विधायकों में से छह ने पार्टी

छोड़ दी है। भाजपा ने विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास मत जीता क्योंकि कुल 28

भाजपा विधायक और 16 कांग्रेस विधायक मतदान के दौरान मौजूद थे। वोट से पहले,

कांग्रेस के 24 विधायकों में से एक दर्जन ने रविवार को विश्वास मत से आगे एक

महत्वपूर्ण पार्टी की बैठक में भाग नहीं लिया। इसलिए राजनीतिक हलकों में परिणाम

अप्रत्याशित नहीं था। वहीं उत्तर पूर्व के बीजेपी प्रभारी राम माधव ने जीत के बाद सीएम

बीरेन सिंह को बधाई दी है। राज्य में कांग्रेस ने वोटिंग से पहले अपने सभी विधायकों को

व्हिप जारी की थी। जिसमें सभी सदस्यों से सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा गया था।

राजस्थान के सुलह के बीच बीरेन सिंह ने कहा कि वे जीत गए

दरअसल मणिपुर में लंबे समय से राजनीतिक खींचातानी जारी है, कुछ विधायक और

मंत्री बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार से बगावत कर गए थे, ऐसे में कांग्रेस ने 28 जुलाई

को विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। जुलाई में राज्यसभा (आरएस) चुनावों

के दौरान, कांग्रेस के 2 विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर बीजेपी को वोट दिया।

बाद में, उन्हें पार्टी द्वारा कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुए। मणिपुर में भाजपा सरकार ने

बहुमत खो दिया था क्योंकि मणिपुर में 9 विधायकों ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। 9

विधायकों में से 3 बीजेपी, 4 नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), 1 टीएमसी और एक

निर्दलीय हैं। पहले, मणिपुर के तीन बीजेपी विधायक कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और चार

एनपीपी सदस्य, एक मंत्री, एक स्वतंत्र गठबंधन के विधायक जिरिबाम और टीएमसी के

विधायक ने गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया और ओकराम इबोबी सिंह के

नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी को समर्थन दिया।यह उल्लेख करने में विफल है कि इन

गतिरोधों को मणिपुर में सरकार बनाने में असमर्थता है, जिससे मणिपुर में सरकार का

गठन हो रहा है।


 

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