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झारखंड प्रांत के प्रथम महामंडलेश्वर झरना बाबा के निधन पर जताया शोक

झारखंड प्रांत के प्रथम महामंडलेश्वर झरना बाबा के निधन पर जताया शोक

झरियाः झारखंड प्रांत के प्रथम महामंडलेश्वर एवं चंदनकियारी निलांचल आश्रम के प्रमुख

बाबा रामदास उर्फ झंरना बाबा अब नहीं रहे। लगभग 110 वर्ष की उम्र में झरना बाबा ने

अपना शरीर पुरुलिया जिला का अनाडा में छोड़ा। विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रदेश के

धर्माचार्य संपर्क प्रमुख आचार्य बलदेव पांडेय ने झरना बाबा के निधन पर गहरा शोक

जताया है। उन्होंने कहा कि झरना बाबा के निधन से झारखंड प्रदेश के धर्म क्षेत्र में

खालीपन आ गया है। झरना बाबा जीवन पर्यंत धार्मिक क्षेत्र के अलावा शिक्षा एवं समाज

सुधार के लिए अनेक काम किया। नासिक उज्जैन एवं प्रयाग में संपन्न हुए कुंभ के दौरान

झरना बाबा सन्यासियों के साथ मौजूद रहे झारखंड ही नहीं विभिन्न प्रांतों से गए

श्रद्धालुओं उन्होंने अपने आश्रम में स्थान दिया। वही धर्माचार्य संपर्क प्रमुख श्री पांडेय ने

बताया कि महामंडलेश्वर रामदास उर्फ झड़ना बाबा का शिक्षा के प्रति काफी लगाव था।

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का अलख जगाने हेतु झरना बाबा ने दो विद्यालयों की स्थापना की

थी जो आज भी संचालित है। झारखण्ड, बंगाल, ओडिशा में उनके शिष्यों की लम्बी श्रृंखला

है।

झारखंड प्रांत का प्रयाग कुंभ में किया था प्रतिनिधित्व

वर्ष 2019 के 15 जनवरी से प्रयागराज में आयोजित विश्वप्रसिद्ध महाकुम्भ के दौरान

चंदनकियारी स्थित नीलांचल आश्रम झरना के महात्यागी श्री श्री 1008 रामदास बाबा ने

झारखण्ड प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। राज्य के तत्तकालीन पर्यटन मंत्री सह

स्थानीय विधायक अमर कुमार बाउरी बाबा के प्रयाग प्रस्थान से पहले झरना स्थित

नीलांचल आश्रम में मिले थे। कुंभ के दौरान बाबा ने हजारों श्रद्धालुओं के लिए भंडारा एवं

रहने की व्यवस्था की थी हजारो श्रद्धलुओं के मौजूदगी में शुक्रवार उन्हें समाधि दी गयी।

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