fbpx

आने वाले दिनों में बहुत तेज हो जाएगी कंप्यूटर के काम करने की गति

आने वाले दिनों में बहुत तेज हो जाएगी कंप्यूटर के काम करने की गति
  • भविष्य के कंप्यूटर छोटे लेकिन शक्तिशाली होंगे

  • खास विधि से तैयार स्विच के जरिए हुआ प्रयोग

  • अणु को जाते और प्रतिक्रिया करते कैमरे में कैद किया

  • क्वांटम गति को कैमरे में कैद करने में सफल हुए वैज्ञानिक

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आने वाले दिनों में कंप्यूटर तकनीक में क्वांटम पद्धति के आने से बहुत कुछ बदल

जाएगा। इस क्वांटम पद्धति पर काफी अरसे से काम चल रहा है। अब पहली बार वैज्ञानिक

इसी क्वांटम पद्धति से होने वाले कार्यों को कैमरे में रिकार्ड करने में सफल हुए हैं। अत्यंत

तेज गति के इस कार्य को कैमरे में रिकार्ड करने के बाद उसके आंकड़ों का विश्लेषण किया

जा रहा है। समझा जाता है कि इस विधि से अगर आने वाले दिनों में कंप्यूटर काम करने

लगे तो कंप्यूटर के काम करने तथा इंटरनेट की वर्तमान पद्धति पूरी तरह बदल जाएगी।

क्वांटम विधि से अणुओं के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के दृश्य को कैद करने के

साथ साथ उससे पड़ने वाले प्रभावों को भी वैज्ञानिक कैमरे में दर्ज करने में कामयाब हुए हैं।

इस वजह से ऐसा माना जा रहा है कि क्वांटम कंप्यूटिंग की दुनिया में यह बदलाव उम्मीद

से कहीं पहले ही आने वाला है। यह पहले से ही पता है कि क्वांटम पद्धति से होने वाले काम

की गति वर्तमान गति से कई हजार गुणा अधिक होती है। इसी पद्धति से जब इंटरनेट का

संचालन किया जाएगा तो वह भी बहुत तेज और कम झंझट वाली होगी। वर्तमान में इस

विधि के परीक्षण के लिए बड़ी प्रयोगशाला की आवश्यकता पड़ती है। शोध कर्ता इस पद्धति

से काम करने वाले उपकरणों का आकार छोटा करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

उम्मीद है कि यह काम सफल होने की स्थिति में कंप्यूटर का आकार वर्तमान से बहुत

छोटा होने के साथ साथ आने वाले दिनों में उसकी गति उम्मीद से कहीं अधिक तेज हो

जाएगी। अणु के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने और उसके प्रभाव को भी

अत्याधुनिक कैमरे से दर्ज किया गया है। इसके आधार पर आगे का शोध अभी जारी है।

आने वाले दिनों में हर मशीनी काम को तेज करने की कवायद

कई संस्थानों के शोध दल मिलकर इस पर काम कर रहे हैं। इनमें अमेरिका के डिपार्टमेंट

ऑफ एनर्जी की राष्ट्रीय प्रयोगशाला, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और कंप्यूटर उपकरण

बनाने वाली कंपनी एचपी भी शामिल है। इस विधि में अणु के आधार पर काम करने में

सक्षम जो अत्यंत छोटे आकार के इलेक्ट्रानिक स्विच बनाये गये हैं, उनकी कार्यकुशलता

की वजह से ही भविष्य मे कंप्यूटर का आकार और छोटा होने की उम्मीद जतायी जा रही

है। ऐसे क्वांटम स्विच कंप्यूटर चिपों के मुकाबले बहुत अधिक छोटा होने के बाद भी उनसे

कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। नेशनल लैब की एसएलएसी के वैज्ञानिक जिजेई वांग कहते हैं

कि पहली बार इतनी तेज गति से इलेक्ट्रॉनों के सफर करने के दृश्य को देखा जा सकता है।

वीडियो में देखिये एक अणु के सफर करने का दृश्य कैसे कैद हुआ

अत्यंत सुक्ष्म अणु का एक स्थान से दूसरे स्थान तक सफर करना और उससे होने वाली

प्रतिक्रिया का दृश्य कैद होने के बाद क्या कुछ सुधार किया जा सकता है, यह भी स्पष्ट हो

जाएगा। इस विधि से जब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण काम करेंगे तो निश्चित तौर पर उनकी

गति वर्तमान की तुलना में बहुत अधिक हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में भी अपने काम के लायक इलेक्ट्रॉनिक स्विच तैयार किये थे।

इन स्विचों को वानाडियम ऑक्साइड से बनाया गया था। कमरे के सामान्य तापमान पर

ही ऐसे स्विच क्वांटम विधि में काम करने को सक्षम है। खास बात यह भी है कि ऐसे

स्विच भी इंसानी दिमाग की तरह तरंग पैदा करने की क्षमता रखते हैं। इसी क्षमता की

परख इस बार के प्रयोग में भी की गयी है और उसके परिणाम को भी कैमरे में रिकार्ड किया

जा सका है।

जो दृश्य कैद हुआ है वह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण

जो दृश्य वैज्ञानिक कैमरे में कैद करने में सफल हुए हैं वह गणितीय गणना के मुताबिक

एक सेकंड का एक खरबवां हिस्से के बराबर था। इससे समझा जा सकता है कि इस गति

से काम करने वाले किसी भी उपकरण के वास्तविक कार्य करने की गति कितनी तेज

होगी। वैसे इस प्रयोग को कैमरे में कैद करने के लिए भी कैमरे को अत्याधुनिक बनाना

पड़ा था ताकि वह इतनी तेज गति से होने वाली प्रक्रिया को सही तरीके से कैद कर सके।

क्वांटम विधि से एक अणु को छोड़े जाने के बाद रास्ते में मौजूद स्विच ने क्या किया उसे

भी देखा गया है। प्रयोग के मुताबिक जैसा वैज्ञानिक चाहते थे, ठीक वैसा ही काम हुआ है।

इस प्रयोग के सफल होने क वजह से आणविक गतिविधियों को नियंत्रित करने की तेज

विधि उपलब्ध हो चुकी है। अब उसके आधार पर आगे की तकनीक को विकसित किया

जाना है। अच्छी बात यह भी है कि वर्तमान विधि से तेज गति से काम करने के साथ साथ

इसमें ऊर्जा की खपत भी अपेक्षाकृत कम होती है। इस शोध से जुड़े भारतवंशी वैज्ञानिक

श्रीराम रामानाथन कहते हैं कि इसके आधार पर भी भविष्य के कंप्यूटरों के लिए सर्किट

तैयार करने की नींव पड़ेगी। ताकि अत्यंत तेज गति से काम करने में सक्षम कंप्यूटरों का

उत्पादन किया जा सके। दूसरे भारतवंशी वैज्ञानिक आदित्य सूद कहते हैं कि यह

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की दुनिया में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहा है।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Rkhabar

Rkhabar

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: