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पूरी तरह पारदर्शी ऑक्टोपस नजर आया समुद्र की गहराई में, देखें वीडियो

पूरी तरह पारदर्शी ऑक्टोपस नजर आया समुद्र की गहराई में, देखें वीडियो
  • अत्याधुनिक पनडुब्बी रोबोट ने कैद किया इसका दृश्य

  • इसके आंतरिक अंग भी साफ साफ दिखते हैं

  • ग्रेट ह्वाइट शार्क भी गहराइयों में दिखा

  • मछली चुराते केकड़े भी नजर आये

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पूरी तरह पारदर्शी ऑक्टोपस देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह गये। ऐसे नहीं है कि

इस प्रजाति के होने की जानकारी वैज्ञानिकों को नहीं थी। लेकिन इस गहराई में उसे फिर से

देख पाने की उम्मीद किसी को नहीं थी। इससे साफ हो गया है कि समुद्र की गहराइयों का

रहस्य अब तक अनजाना ही है। अंतरिक्ष में बहुत कुछ जान लेने के बाद भी हमारा

वर्तमान विज्ञान समुद्र के बारे में बहुत कम जानकारियां एकत्रित कर पाया है।

वीडियो में देखिये कि समुद्र में यह कैसा दिखता है

समुद्र विज्ञान में निरंतर शोध करने वाले स्मिड्थ शोध संस्थान ने शोध के तहत पूरी तरह

पारदर्शी नजर आने वाले एक ऑक्टोपस को खोज निकाला है। ऐसा पहली बार देखा गया

है। यह इतना पारदर्शी है कि उसके आंतरिक अंग भी कैमरे में साफ साफ कैद किये जा सके

हैं। यह संस्थान फिलहाल अपने अत्याधुनिक रोबोट सबमेरिन की मदद से समुद्र के उन

इलाकों तक पहुंच रही है जहां अब तक इंसान की नजर नहीं पहुंची है। समुद्र के अनेक

इलाके ऐसे हैं, जहां गहराई अधिक होने की वजह से सामान्य किस्म की पनडब्बी नहीं

पहुंच सकती है। लेकिन संस्थान की तरफ से बताया गया है कि यह अनोखा पारदर्शी

ऑक्टोपस प्रशांत महासागर में फोनिक्स द्वीप के पास पाया गया है, जो किरिबाटी के पूर्व

में है। इस इलाके के समुद्र में अनुसंधान भी बहुत कम हुआ है। पूरी तरह पारदर्शी

ऑक्टोपस को जीव विज्ञान की परिभाषा में विट्रेलेडोनेला रिकार्डी कहा जाता है। इसे शोध

पनडुब्बी ने दो बार देखा है। इस समुद्री जीव के बारे में बताया गया है कि कैमरे की नजर में

भी यह इतना पारदर्शी है कि उसके शरीर के अंदरुनी हिस्से साफ नजर आ रहे हैं। उसके

भोजन की नली और मांसपेशियां भी उसके पारदर्शी शरीर में साफ दिखाई पड़ रही है। इस

किस्म का जीव को देखना एक दुर्लभ नजारा माना जा रहा है।

पूरी तरह पारदर्शी ऑक्टोपस इससे पूर्व 1918 में दिखा था

वैसे बता दें कि पूरी तरह पारदर्शी ऑक्टोपस के होने की सूचना वैज्ञानिकों को वर्ष 1918 से

ही है। पहली बार उस समय इसे देखे जाने का रिकार्ड दर्ज है। लेकिन उसके बाद से इसे नहीं

देखा जा सका था। समुद्री शोध करने वाले संस्थान ने अपने इस 34 दिनों के अभियान के

दौरान इस पारदर्शी ऑक्टोपस के अलावा भी बहुत कुछ देखा है, जो समुद्र की गहराइयों में

छिपा हुआ है। इसमें बहुत लंबे आकार के कोरोल समूह भी हैं, जो कई सौ फीट ऊंचे हैं।

समुद्र की गहराई में होने की वजह से ऊपर से उनका कोई पता ही नहीं चलता है। इस

कोरोना के पास अनेक किस्म की जैविक विविधताएं भी हैं। संस्थान के सह संस्थापक बेंडी

स्मिड्ट कहते हैं कि बहुत कम नजर आने की वजह से पारदर्शी ऑक्टोपस को भी दुर्लभ

किस्म का समुद्री प्राणी माना जा सकता है। लेकिन काफी अधिक गहराई में होने की वजह

से उस पर अधिक जानकारी एकत्रित नहीं की जा सकी है। लेकिन इस एक घटना ने फिर

से यह साबित कर दिया है कि समुद्र की गहराई में बहुत कुछ ऐसा छिपा हुआ है, जिसके

बारे में आधुनिक विज्ञान अब तक जानकारी नहीं रखता है। वैसे समुद्र के अंदर झांकने के

इस अभियान में समुद्र के अंदर मौजूद कई विशाल पर्वत के बारे में भी शोध दल को पता

चला है। इसके लिए संस्थान के रोबोट पनडुब्बी सूबास्टिन की मदद मिली है। इसे खास

तौर पर गहरे समुद्र में अनुसंधान के लिए ही तैयार किया गया है। इस दौरान इस यंत्र के

कैमरे ने काफी गहराई में चक्कर काटते ग्रेट ह्वाइट शार्क की गतिविधियों को भी अपन

कैमरे में कैद किया है। यह प्रजाति अत्यंत गहरे समुद्र में रहने वाली मानी जाती है।

समुद्र की गहराई में मौजूद जीवन पर अब भी पूरी जानकारी नहीं

लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि इससे अधिक की गहराई में और कौन कौन से

जीवन पलते हैं। इनमें से कुछ तो घने अंधेरे में भी सही शिकार करते हुए पहले ही कैमरे में

कैद हो चुके हैं। इस अभियान दल को यंत्र के कैमरे में रिकार्ड दो केकड़ों की लड़ाई देखकर

भी मजा आया है। दरअसल दोनों केकड़ों के बीच यह लड़ाई एक दूसरे से मछली चुराने को

लेकर है। कैमरे में यह साफ देखा जा सकता है कि एक केकड़े द्वारा छिपायी गयी मछली

को दूसरा केकड़ा ले भागता है। कुछ देर तक इंतजार करने के बाद पहला केकड़ा अपना

शिकार वापस लेने के लिए मछली की चोरी करने वाले दूसरे केकड़े से अपना भोजन छीन

लेने का प्रयास करता है।

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