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अमेरिका से चल ब्रिटेन तक पहुंचा फेसबुक का मामला




लंदनः अमेरिका से चल ब्रिटेन तक आने वाली फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस हाउगेन ने यहां भी फेसबुक की गड़बड़ियों के बारे में दस्तावेज दिये हैं। ब्रिटेन की संसद में भी फेसबुक की कारगुजारियों पर विचार चल रहा है।




ब्रिटेन में भी लंबे समय से फेसबुक के एकाधिकार के बीच घृणा और झूठ को अधिक फैलाने के कारोबार में लिप्त होने का आरोप लगता आया है। इन्हीं आरोपों के वजह से इंग्लैड में भी फेसबुक पर कानूनी बंदिश लगाने जैसे प्रस्तावों पर विचार प्रारंभ हुआ था।

अब इन आरोपों को फेसबुक की पूर्व कर्मचारी के बयान और उस बयान के समर्थन में जारी दस्तावेजों से बल मिला है। आरोप लगता रहा है कि फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग अपने एकाधिकार की वजह से दुनिया के तीन बिलियन लोगों की सोच से खेल रहे हैं।

उन्होंने अपने फायदे के लिए नैतिकता को ताक पर रख दिया है। हाल के दिनों में राजनीतिक तौर पर अधिक आर्थिक मुनाफा कमाने के लिए कंपनी अनैतिक आचरणों को ही बढ़ावा देने में जुटी हुई है।

अमेरिका से चल ब्रिटेन तक आने वाली फेसबुक की पूर्व कर्मचारी हाउगेन ने अपनी बातों के समर्थन में हजारों ऐसे दस्तावेज जारी किये हैं, जो यह संकेत देते हैं कि फेसबुक की आतंरिक गतिविधियां कैसी हैं।

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगा है कि फेसबुक दरअसल आर्थिक लाभ के लिए घृणा और झूठ को प्रसारित करता है।




दूसरी तरफ सही बातों को दबाने का आरोप भी इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर है। हाल के दिनों में खास तौर पर फेसबुक द्वारा विभिन्न देशों की राजनीति में हस्तक्षेप कर चुनावों को प्रभावित करने के गंभीर आरोप भी लगे हैं।

अमेरिका से चल कर ब्रिटेन तक पहुंची है शिकायत

उसके बाद से ही कई देशों में फेसबुक को नियंत्रित करने की मांग उठने लगी है। हाउगेन भी अमेरिका से चल यहां तक इसलिए आयी है कि यहां की सरकार भी इस फेसबुक पर नियमों की कड़ाई करे ताकि उन्हें समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाया जा सके।

कंपनी के आर्थिक मुनाफे की सोच की वजह से समाज को जो नुकसान होने लगा है, उस पर नियंत्रण लगाने की बात भी इस महिला ने कही है।

इस कंपनी का ढांचा ही कुछ इस तरह है कि दरअसल इस पर असली नियंत्रण मार्क जुकरबर्ग का है। इसलिए हर गलत सही का फैसला भी जुकरबर्ग के स्तर पर ही होती है।

आरोप है कि अभी कंपनी का कारोबार सिर्फ मुनाफे पर आधारित है लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने की वजह से उसे समाज के प्रति भी जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता है।

वरना इसकी वजह से समाज में जो हिंसक माहौल बन रहा है, उसका नमूना अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के बाद देखा जा चुका है।



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