छत्तीसगढ़ का अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण मतदान

छत्तीसगढ़ मतदान का पहला चरण
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छत्तीसगढ़ के पहले चरण का चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा है।

इस दौरान सिर्फ बीजापुर के पास नक्सली हमले में पांच जवानों के घायल होने की खबर है।

दूसरी तरफ प्रारंभिक तौर पर अत्यंत धीमी गति से मतदान प्रारंभ होने के बाद भी

अंत तक 75 प्रतिशत तक का मतदान अपने आप में बड़ी बात है।

छत्तीसगढ़ में अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबन्धों के बीच पहले चरण की घुर नक्सल इलाके की 18 विधानसभा सीटों पर मतदान शान्तिपूर्ण सम्पन्न हो गया।

इस चरण में अभी तक मिली खबरों के मुताबिक लगभग 61 प्रतिशत मतदान हुआ है।

राज्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पहले चरण की 18 सीटो में से 10 अति संवेदनशील सीटों मोहला मानपुर,अन्तागढ़,भानुप्रताप पुर,कांकेर,केशकाल, कोन्डागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर एवं कोन्टा में सुरक्षा कारणों से मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ था।

यहां मतदान तीन बजे समाप्त हो गया।

इस चरण की शेष आठ सीटो खैरागढ़,डोगरगढ़,डोगरगांव, राजनांदगांव,खुज्जी, बस्तर,जगदलपुर एवं चित्रकोट में मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक मतदान हुआ।

कई केन्द्रों पर मतदान की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी भीड़ थी।

छत्तीसगढ़ में मतदान की प्रारंभिक गति धीमी रही

उन्होने कहा कि जिन 10 सीटो पर मतदान सुबह सात बजे से तीन बजे तक हुआ,वहां 52 प्रतिशत मतदान हुआ है,जबकि जिन आठ सीटों पर सुबह आठ बजे से पांच बजे तक मतदान हुआ वहां 70 प्रतिशत मतदान होने की सूचना है।

10 सीटों एवं आठ सीटो के मतदान की अभी अन्तिम रिपोर्ट नही मिली है।

आठ सीटों पर भी मतदान की रिपोर्ट शाम चार बजे तक की है।

उन्होने बताया कि अन्तिम रिपोर्ट मिलने पर मतदान का प्रतिशत बढ़ सकता है।

दंतेवाड़ा जिले के कटे कल्याण में बूथ नम्बर 183 के निकट नक्सलियों ने आईडी विस्फोट किया लेकिन इससे कोई हताहत नही हुआ।

बीजापुर के भैरमगढ़ में सुरक्षा बलों ने दो आईडी बरामद कर उसे निष्क्रिय कर दिया।

बीजापुर जिले के पामेड में मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के पांच जवान घायल हो गए।

सुदूर एवं नक्सल इलाकों के मतदान केन्द्रों से 217 मतदान दलों को हेलीकाप्टर से

वापस लाना है जिसमें 46 दलों को आज वापस लाया गया है।

शेष दलों को मतदान केन्द्र पर ही सुरक्षा कारणों से रूकने के निर्देश दिए गए है।

इन्हे कल सुबह निकाला जायेगा। मतदान दलों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी बन्दोबस्त किए गए है।

इस बार अलग प्रयोग करते हुए मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रत्येक मतदान केन्द्र पर वोटर सेल्फी जोन बनाया गया था।

मतदाता सेल्फी खींचकर राज्य निर्वाचन अधिकारी के ट्वीटर एवं फेसबुक पेज पर लोगो ने लोड किया।

प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की पांच उत्कृष्ट सेल्फी को पुरस्कृत किया जायेगा।

छत्तीसगढ़ के चुनाव प्रचार में मोदी और राहुल के अलावा अनेक नेता

चुनाव प्रचार में यहां की जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद,स्मृति ईरानी,केन्द्रीय राज्यमंत्री रामकृपाल यादव,झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को सुना।

कांग्रेस की ओर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय,पूर्व केन्द्रीय मंत्री

एवं आदिवासी नेता भक्त चरण दास,उत्तरप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर,कांग्रेस के महासचिव शक्ति सिंह गोविल,

पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य,महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने जहां कई सभाएं की

वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनन्द शर्मा,मनीष तिवारी,पार्टी के संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला

एवं प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी भी यहां चुनावी रणनीति को गति देने पहुंचे।

जनता कांग्रेस बसपा गठबंधन के इकलौते स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे

जबकि यहां दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भानुप्रतापपुर सीट पर चुनाव लड़ रहे

आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी कोमल हुपेंडी के पक्ष में प्रचार किया।

इसके बाद भी फिर से नोटा का सवाल उन तमाम लोगों को परेशान कर रहा है, जिनकी किस्मत अब ईवीएम में कैद हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ में नोटा का इस्तेमाल का रिकार्ड ही सभी प्रत्याशियों की शंका में डालने के लिए पर्याप्त है।

छत्तीसगढ़ के नेताओं का असली भय नोटा का बटन

इसके बारे में भले ही राजनीतिक दलों के लोग यह दलील देते हैं कि जानकारी के अभाव में लोगों ने यह नोटा का बटन दबाया है।

दूसरी तरफ सामाजिक गतिविधियों के जानकार इसे सभी दलों के प्रति लोगों की नाराजगी का इजहार मानते हैं।

इसका कुछ हिस्सा शायद नक्सली प्रभाव की वजह से भी है।

इस बार  के चुनाव में नक्सली हिंसा न्यूनतम होने की वजह से चुनावी तैयारियों को पुख्ता माना जाना चाहिए।

साथ ही उन निर्देशों पर कड़ाई से अमल किये जाने की वजह से भी हिंसा कम हुई है।

अब दूसरे चरण के चुनाव होने तक इन ईवीएम मशीनों के अंदर क्या कुछ कैद है, इसके अनुमान ही लगाये जा सकते हैं।

लेकिन इतना तो तय है कि बेहतर तैयारियों से नक्सली हिंसा पर काबू पाया जा सकता है,

इस बार का चुनाव इस अच्छी तरह साबित कर पाया है।

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