खनिज की सोच से ऊपर उठना झारखंड के लिए अच्छी बात

खनिज की सोच से ऊपर उठना झारखंड के लिए अच्छी बात
Spread the love

खनिज प्रधान राज्य के तौर पर झारखंड को अविभाजित झारखंड में भी दर्शाया जाता रहा है।



राज्य गठन के बाद भी हम खनिज आधारित उद्योगों की ही बात करते रहे हैं।

अब पहला मौका है जबकि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास कृषि और सूचना तकनीक आधारित

उद्योगों की संभावनाओं पर भी झारखंड को प्रस्तुत कर रहे हैं।

खनिज के नाम पर झारखंड की पहचान से झारखंड को वाकई अब बाहर निकल जाना चाहिए।

झारखंड कभी सिर्फ खनिज संपदा और वन संपदा के लिए जाना जाता है।

अब राज्य में बहुत कुछ ऐसा हो चुकी है जो इस राज्य को खनिज और वन संपदा से अलग पहचान दिलाने में सक्षम है।

ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि राज्य में जिस तेजी से कोल्ड स्टोरेजों को निर्माण हो रहा है,

उससे आने वाले दिनों में यह राज्य कृषि और खासकर सब्जी आधारित उद्योगों

के लिए भी आर्थिक तौर पर सक्षम होगा।

राज्य में आयोजित होने वाले वैश्विक कृषि आधारित उद्योग सम्मेलन के लिए

निवेशकों को आमंत्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने इसकी विधिवत घोषणा भी की है।

मुख्यमंत्री ने कहा झारखंड को पहले केवल खनिज और खनिज आधारित उद्योगों के लिए भी जाना जाता रहा है।

किंतु हमने झारखंड की वह पहचान बदलने की कोशिश की है।

हम कृषि आईटी सहित सभी क्षेत्रों में उद्योग की संभावनाओं को जोर दे रहे हैं।

यही कारण है कि कृषि पर ग्लोबल सबमिट आयोजित करने जा रहे हैं।

खनिज से अलग हटकर होगा कृषि आधारित वैश्विक सम्मेलन

साथ ही, कृषकों की आय को दोगुना करना हमारा ध्येय है।

ग्रामीण विकास और गांव की समृद्धि हमारा लक्ष्य है। सिंगल विंडो सिस्टम पर जोर है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में जितने एमओयू किए गए थे उनमें 89 धरातल पर उतर गए हैं।

अभी झारखंड में 212 फूड प्रोसेसिंग यूनिट कार्यरत हैं।

29 नवंबर को 50 और फूड प्रोसेसिंग यूनिट का शिलान्यास होगा।

यह युग कृषि के क्षेत्र में जैविक खेती का है।

मुख्यमंत्री का यह दावा गलत भी नहीं है।

जैसे जैसे राज्य में कृषि के अनुकूल माहौल बन रहा है, वैसे वैसे कृषि उपज भी बढ़ रही है।

पहले सुविधाओं के अभाव में झारखंड के किसान बिचौलियों के हाथों विवश होते थे।

उनकी उपज मौसम में औने-पौने दाम में खरीद ली जाती थी।

अब कोल्ड स्टोरेजों का निर्माण पूरा होने के बाद कमसे कम लागत से भी

कम कीमत पर फसल बेचने अथवा वापस घर ले जाने के भय में

उन कृषि उप्जों को रास्ते में ही नष्ट करने की मजबूरी से झारखंड के किसान मुक्त होंगे।

सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी इसमें एक प्रमुख कारक रहा है।

कृषि में झारखंड की स्थिति बेहतर हुई है

दूसरी तरफ पहले किये गये प्रयासों की वजह से राज्य में जो खाद्य प्रसंस्करण

आधारित उद्योग स्थापित हुए हैं, उनके प्रति सरकारी रवैया बदलने की वजह से भी

इन इकाइयों को आगे बढ़ने में मदद मिली है।

यही कार्य संस्कृति यदि आगे भी जारी रही तो निश्चित तौर पर अन्य निवेशक भी राज्य में पूंजी निवेश करने के प्रति आकर्षित होंगे।

राज्य के लिए सब्जी आधारित उद्योगों को बढ़ाना देने का दूसरा लाभ राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना भी होगा।

क्योंकि इस बात को सभी जानते और समझते हैं कि फसल उत्पादन से किसान को होने वाला लाभ सीधे ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को ही मजबूती प्रदान करता है।

किसान अपनी फसल के दाम का पैसा गांव में ही खर्च करता है।

इससे गांव में जो तरल पैसा पहुंचता है, वह पारंपरिक भारतीय अर्थव्यवस्था के अनुकूल होता है और गांव को मजबूत किये बिना भारत में विकास दर को और ऊपर नहीं पहुंचाया जा सकता, यह प्रमाणित सत्य है।

खनिज के मुकाबले सूचना तकनीक उद्योग स्थापित करने में कठिनाई कम

मुख्यमंत्री ने सूचना तकनीक पर आधारित उद्योगों की बात कहकर झारखंड के लिए नये संभावनाओं के दरवाजे खोलने का काम किया है।

हम जानते हैं कि बेंगलुरु और पुणे का तेजी से विकास में इसी सूचना तकनीक आधारित उद्योग की प्रमुख भूमिका रही है।

इसी तरह मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में भी सूचना तकनीक आधारित उद्योगों का विकास हुआ है।

ऐसे में अगर झारखंड को भी इस उद्योग के लायक बनाया जा सका तो निश्चित तौर पर निवेशक यहां भी आने के लिए उत्साहित होंगे।

सूचना तकनीक आधारित उद्योगों की विशेषता है कि इसे दुनिया के किसी भी हिस्से से संचालित किया जा सकता है।

अन्य औद्योगिक इकाइयों की तरह इसमें बहुत अधिक जमीन की भी आवश्यकता नहीं होती।

ऐसे में झारखंड में हाल के दिनों में ऊर्जा, परिवहन और सुरक्षा के माहौल में जो सुधार आये हैं, उससे इसकी संभावनाएं बढ़ी है।

मुख्यमंत्री की अपील के बाद अब यह हर झारखंडी की भी जिम्मेदारी है कि

वह खनिज आधारित उद्योगों का राग अलापना छोड़ इन मुद्दों पर भी राज्य को आगे बढ़ाने की बात करें।

इससे रोजगार के नये नये अवसरों का सृजन होगा

और सूचना तकनीक आधारित उद्योगों के आने से झारखंड को वैश्विक पहचान भी मिलेगी।

Please follow and like us:


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.