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आ देखें जरा किसमें कितना है दम.. .. …







आ देखें जरा किसमें कितना है दम, अमित शाह ने साबित किया अब रघुवर की बारी है।

महाराष्ट्र में बड़े ताव से ताल ठोंक रहे थे अपने मराठा नेता शरद पवार।

मोटा भाई ने एक दांव लगाया कि चारों खाने चित।

अब ऐसी चोट लगी है कि कह रहे हैं कि सब कुछ संभल जाए तब कोई बात कहूंगा।

इस बात पर तो नाना पाटेकर की एक चर्चित फिल्म अपहरण का डॉयलाग याद आ रहा है।

नाना ने एक अपहरण के बाद कहा था, तुम्हारे पिछवाड़े से लंगोटी चुराकर ले गया और तुम्हे पता भी नहीं चला।

कुछ ऐसा ही हादसा अपने शरद पवार के साथ भी हुआ है।

हर बार चुनाव में न जाने क्यों कोई न कोई ऐसा मौका निकल ही आता है कि इस गाने की याद आने लगती है।

लगता है इस गीत का उल्लेख मैं आधा दर्जन बार कर चुका हूं।

लेकिन यह मेरी गलती नहीं है।

यह इंडियन पॉलिटिक्स है भाई, यहां अब भी पहलवान उसी घिसे पिटे दांव पर कुश्ती जीतना चाहते हैं।

जो चालाक पहलवान है वह दांव बदलकर रातों रात खेल ही बदल देता है।

इस एक दांव की वजह से अपने ग्रेट खली की याद आ रही है।

वह रिंग में ज्यादा तामझाम नहीं करता।

सीधे अपने विरोधी को उठाकर ऐसा पटक देता है कि सामने वाला उठ खड़ा नहीं हो पाता।

कुछ ऐसा ही अपने मोटा भाई ने भी कमाल किया है।

किसी को भनक तक नहीं लगी और सीधे मराठा नेता को पटखनी दे दी।

यह फिल्म संजय दत्त के प्रारंभिक दिनों की थी

वर्ष 1981 में बनी थी यह फिल्म।

इस फिल्म के दौर संजय दत्त के उभरने का दौर था।

फिल्म व्यापार के लिहाज से सफल तो रही था लेकिन उससे भी ज्यादा चर्चित संजय दत्त की वजह से हुई थी।

जिस गीत की चर्चा कर रहा हूं, उसके बारे में पहले भी लिखा है लेकिन फिर से बता देता हूं।

इस गीत को लिखा था। आनंद बक्षी ने और संगीत में ढाला था राहुल देव वर्मन ने।

इस गीत को किशोर कुमार और आशा भोंसले के साथ कई अन्य लोगों ने कोरस में भी गाया था।

गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

आ देखें जरा किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम मेरे साथियां, बल बल …

किसमें कितना है दम, बल बल

जम के रखना कदम, बल बल …

मेरे साथियां

आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम, मेरे साथियां

आ देखें ज़रा, बल बल …

किसमें कितना है दम, बल बल …

जम के रखना कदम, बल बल …

मेरे साथियां

आगे निकल आये हम वो पीछे रह गये

आगे निकल आये हम वो पीछे रह गये

ऊपर चले आये हम वो नीचे रह गये

ऊपर चले आये हम वो नीचे रह गये

वो हमसे हारेंगे हम बाज़ी मारेंगे

हम उनसे क्या हैं कम, नाचेंगे ऐसे हम

नाचेंगे ऐसे हम नाचेंगे वो क्या

आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम, मेरे साथियां

आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम, मेरे साथियां

शिवप्पा शिवप्पा,

वन टू थ्री फोर, फाइव, सिक्स, सेवेन, एइट

नाइन, टेन, इलेवन, टूयल्व, थर्टिन, फोर्टिन, फिफटीन, सिक्सटीन

सारे शहर में हमीं हैं हमसा कौन है

सारे शहर में हमीं हैं हमसा कौन है

देखो इधर हम यहीं हैं हमसा कौन है

देखो इधर हम यहीं हैं हमसा कौन है

देखेंगे देखा है जादू क्या है

यारों से जलने का काँटों पे चलने का

काँटों पे चलने का क्या है फ़ायदा

आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम, मेरे साथियां

आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम, मेरे साथिया

अब देखते हैं सांस संभाल लेने के बाद शरद पवार और उनके साथ क्या कुछ दांव लगाते हैं।

लेकिन यह साफ हो गया है कि पहला मैच अमित शाह ने सीधा सीधा फतह कर लिया है।

आ देखे जहां महाराष्ट्र के बाद झारखंड में कितना है दम

महाराष्ट्र से लौटते हैं तो नजर झारखंड पर जाना लाजिमी है।

आखिर यहां भी तो चुनाव चल रहा है।

पहले यह लड़ाई भाजपा और गठबंधन के बीच थी।

सरयू राय का मामला कुछ ऐसा पलटी खाया कि अब लड़ाई रघुवर दास वनाम सरयू राय होकर रह गयी है।

पूरी भाजपा चाहकर भी इस दांव को नकारा नहीं कर पा रही है।

जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं सरयू राय की राह पर दूसरे भाजपा नेता भी चलते नजर आ रहे हैं।

यानी यहां पार्टी के अनुशासन को दरकिनार करने की एक प्रवृत्ति प्रारंभ हो चुकी है।

दूसरी तरफ घऱ के चिराग से घर को आग लगते देख विरोधी भी इस ठंड में आग तापने अगल बगल इकट्ठे हो गये हैं।

जाहिर है कि झारखंड का यह दांव ही आगे का सारा कुछ तय करने वाला है।



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