गुरु ग्रह के उत्तरी छोर पर रंग बिरंगे बादल नासा के जूनो ने तस्वीरें भेजी

गुरु ग्रह के उत्तरी छोर पर रंग बिरंगे बादल
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  • वृहस्पति के चक्कर लगा रहा है यान

  • ग्रह के ऊपर भीषण सौर आंधी

  • पानी और ऑक्सीजन होने के संकेत

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः गुरु ग्रह के एकदम उत्तरी छोर पर रंग बिरंगे बादल हैं।

इनके बीच से उसकी सतह के ऊपर सफेद रंग बादलों की भी कतार नजर आ रही है।

नासा द्वारा भेजे गये जूनो स्पेसक्राफ्ट ने गुरु के पास से यह तस्वीरें भेजी हैं।

इन तस्वीरों का अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि

जो रंग बिरंगे बादलों का ढेर नजर आ रहा है वह दरअसल वहां की एक आंधी का स्वरुप भर है,

जिसे इस यान के जूनोकैम नामक कैमरे ने कैद किया है।

नासा के इस यान को वहां पर जीवन की तलाश के संदर्भ में रवाना किया गया था।

यान गुरु ग्रह के आस-पास अब तक 16 चक्कर लगा चुका है।

इस क्रम में वह लगातार अपनी नजर में आने वाले घटनाक्रमों की तस्वीरें भी भेज रहा है।

गुरु ग्रह से सात हजार किलोमीटर की दूरी से भेजे चित्र

रंग बिरंगे बादलों की तस्वीर भेजते वक्त यह यान गुरु के सतह से करीब सात हजार किलोमीटर की दूरी पर था।

वहां से भेजे गये आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद यह रंग बिरंगे बादलों की तस्वीर नजर आयी है।

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की रूचि काफी पहले से ही इस ग्रह के प्रति है।

इसकी संरचना अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पायी है। इस सौर मंडल का यह सबसे बड़ा ग्रह है।

इस लिहाज से उसे सूर्य के बाद का दर्जा प्राप्त है।

वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि गुरु ग्रह की संरचना के बारे में जानकारी मिलने से

पूरे सौरमंडल की संरचना और विकास के बारे में भी काफी कुछ जानकारी मिल सकती है।

इसी खोज की वजह से यह सवाल पहले से ही बना हुआ है कि वहां जीवन की क्या संभावनाएं हैं।

अब जूपिटर यान की मदद से जो तथ्य नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट स्टेशन तक पहुंचाये गये हैं।

उसके मुताबिक पूर्व के अनुमान की तुलना में वहां सूर्य के मुकाबल 2 से 9 गुणा तक अधिक ऑक्सीजन हो सकता है।

अब तो इस ग्रह के ऊपर मौजूद बादलों में भी वैज्ञानिकों ने जल की उपस्थिति दर्ज की है।

इससे वैज्ञानिक प्रारंभिक तौर पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि वहां जीवन संभव है।

इस बारे में कुछ वैज्ञानिकों ने एक शोध प्रबंध भी प्रस्तुत किया है।

वहां की सौर आंधी का भी वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है, जिसमें प्रारंभिक तौर पर लाल रंग के धब्बों का रासायनिक अध्ययन किया गया है।

इनमें भी पानी के अंश होने की उम्मीद जतायी गयी है।

वहां से मिले आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद

कंप्यूटर पर जो सैद्धांतिक निष्कर्ष जारी किया गया है,

उसके मुताबिक भी वहां पानी यानी ऑक्सीजन और हाईड्रोजन की उपलब्धता हो सकती है।

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