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कोयला मजदूर कोरोना योद्धा बन आर्थिक सशक्तिकरण को दे रहे हैं गति




  • पसूका

रांचीः कोयला मजदूर भी इस दौर में कोरोना योद्धा बनकर उभरे हैं। दुनिया भर में कोरोना




वायरस महामारी से जहां लाखों लोगों की जान जा चुकी है, वहीं देश के कोयला कर्मी इस

संकट से डरे बिना लगातार कोयला खदान में काम करते रहे। ताकि विद्युत संयंत्रों को

चालू रखा जा सके और इस महामारी की वजह से घरों में रहने को मजबूर लोगों को

निर्बाध्य बिजली मिलती रहे। यह कहानी उन लाखों कोयला मजदूरों की है जो इस संकट

के समय में भी योद्धाओं की तरह लगातार मैदान में डटे रहे। शायद यही कारण है कि देश

के केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कोल इंडिया के कर्मियों को कोरोना योद्धा

बताने से जरा भी नही हिचके। कोल इंडिया की इकाई बीसीसीएल में काम करने वाले

कर्मियों ने कहा कि यह देश की सेवा का वक्त है, जैसे एक जवान शत्रुओं से देश की रक्षा

करने के लिए अपनी जान हथेली पर लिए घूमता है, बिल्कुल वैसे ही। कर्मियों ने कहा कि

यह जीवन में एक बार देश के काम आने वाला मौका है। सारे जोखिमों के बावजूद समय से

काम करना। यदि वह और उनके जैसे कई कोयला मजदूर काम नहीं करेंगे तो खानों से

कोयला कौन निकालेगा। जिससे देश में ऊर्जा की कमी, बिजली की कमी जैसी समस्याओं

से देश को जूझना पड़ सकता है। साथ ही कोयला मजदूरों ने कोयला मंत्री द्वारा उन्हें

कोरोना योद्धा कहे जाने पर उनका आभार जताया। साथ ही उन्होंने कहा कि हम कोयला




कर्मियों को कोरोना योद्धा कहा जा रहा है और कोरोना काल में मरने वाले कोयला कर्मी को

मुआवजे के साथ नौकरी देने का जो मंत्री जी ने घोषणा किया है, यह हम कोयला मजदूरों

का हौसला बढ़ाने वाला है।

कोयला मजदूर के बारे में खुद केंद्रीय मंत्री ने की है तारीफ

पिछले दिनों एक पूर्व निर्धारित कार्य्रकम के तहत रांची पहुंचे केन्द्रीय कोयला एवं खान

मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि कोविड-19 की महामारी के इस दौर में भी कोयला

खदानों में काम कर रहे कोल इंडिया के कर्मी देश के कोरोना योद्धा हैं, अतः कोरोना

संक्रमण से किसी कोयलाकर्मी की इस अवधि में मृत्यु होने पर उनके परिवार को अन्य

लाभ के अलावा 15 लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा था

कि कोविड-19 महामारी से किसी कोल इंडिया कर्मी का निधन दुर्घटना मृत्यु माना जाएगा

और उसके परिजनों को वे सभी वित्तीय लाभ मिलेंगे।

निश्चित रूप से कोरोनावायरस संक्रमण काल में कोयला मजदूरों की सेवा को नजरअंदाज

नहीं किया जा सकता। अपनी जान की परवाह किए बगैर यह मजदूर लगातार देश की

आर्थिक सशक्तिकरण और बिजली व्यवस्था को बरकरार रखने में दिन रात लगे हुए हैं।

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