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कोयले के भंडार में लगी आग को काफी परिश्रम से बूझाया गया

  • आंदोलन से 90 करोड़ से अधिक का नुकसान

  • एनटीपीसी के कोयला स्टॉक में लगी यह आग

  • उपायुक्त की मौजूदगी में हुई दोनों पक्षों की बात

अशोक कुमार शर्मा

बड़कागांव: कोयले के भंडार में आग लगने से एनटीपीसी को काफी अधिक नुकसान हो

गया। वहां ग्रामीणों द्वारा खनन कार्य को अपने आंदोलन के समर्थन में रोका गया था।

प्राकृतिक तौर पर ऐसी स्थिति में खुले में रखी कोयले के भंडार में आग लग जाया करती

है। यहां भी एनटीपीसी के कोयला स्टॉक के साथ भी ऐसा ही हुआ। आग लगने की वजह से

जगह जगह से धुआं उठने लगा।

वीडियो में देखिये कैसे आग बूझाया गया

अगर जल्द ही कोयले को नहीं हटाया गया तो आग भीषण हो जायेगी और इस पर काबू

पाना लगभग असंभव हो जायेगा। ज्ञात हो कि कोयले के ट्रांसपोर्ट का कार्य प्रभावित है।

खनन कार्य पिछले 2 सितंबर से बंद है । इसी बंदी से 5.5 लाख मीट्रिक टन कोयला इकट्ठा

हो चुका है। कोयले को यदि जल्दी नहीं हटाया गया तो पूरे कोयले के भंडार में भीषण आग

लग जाएगी क्योंकि इलाके में दिन में तापमान अभी भी 35 डिग्री के आसपास है।

एक जिम्मेदार कम्पनी होने के नाते एनटीपीसी ने खान से निकले कोयले को अलग-

अलग आठ ढेरों में रखा है जिससे किसी तरह की आकस्मिक दुर्घटना होने की स्थिति में

अग्निशमन के कार्य में आसानी हो। कोयला जलने की स्थिति में राष्ट्र की इस प्राकृतिक

संपदा का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही, पर्यावरण को भी हानि हो रही है। खनन और

ट्रांसपोर्ट कार्य को पुन: शुरू किए जाने के लिए 18 सितंबर को एक उच्च स्तरीय बैठक का

आयोजन किया गया था जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं एनटीपीसी के चेयरमैन के मध्य

वार्ता हुई थी। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद भी कार्य आरंभ नहीं करने दिया गया है तथा

अड़चन बनी हुई है।

कोयले का भंडार आंदोलन की वजह से जस का तस

कुछ स्थानीय निवासियों द्वारा एनटीपीसी के अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा

रहा है और उन्हें कार्यस्थल पर धमकाया जा रहा है। कोयला ढुलाई न होने से केंद्र सरकार

को 67.71 करोड़ रुपए एवं राज्य सरकार को 31.24 करोड रुपए के राजस्व की हानि हो रही

है। इस परियोजना से रोजाना 40,000 मेट्रिक टन कोयला 9 रेक में भरकर एनटीपीसी की

21 परियोजनाओं को जाता है। कोयला ढुलाई ना हो ना हो पाने की स्थिति में एनटीपीसी

को 91.20 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। रेलवे को भी प्रतिदिन की दर से 10 करोड़

की हानि हो रही है। ट्रांसपोर्ट से जुड़े कई लोगों ने बैंकों से कर्ज लेकर अपने वाहन कोयला

ढुलाई के काम में लगा रखे हैं। वे भी काम ना होने की स्थिति में भुखमरी के कगार पर हैं

और ऊपर से बैंक की किस्तें चुकाने की समस्या आ खड़ी हुई है। कर्मचारियों को “काम नहीं

तो वेतन नहीं” के आधार पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से

कोयला ढुलाई व्यापार से जुड़े लोगों और स्थानीय लोगों की कमाई पर भी व्यापक असर

पड़ा है तथा हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना कोविड 19 लॉकडाउन के समय में

शराब की बिक्री से जब राजस्व की प्राप्ति होनी बंद हुई तब प्रदेश सरकार को विशेष चिंता

हो रही थी। किंतु अब इतने दिन से खदान से कोयला न जाने की स्थिति में राजस्व प्राप्ति

नहीं हो रही है। तब भी राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। इस

राजनीतिक खींचतान से राजस्व प्राप्ति तो बाधित हो ही रही है साथ ही परियोजनाओं में

कोयला आपूर्ति के कारण भीषण बिजली का संकट होने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं।

बिजली संकट भी गहरा सकता है इस लंबे आंदोलन से

पकरी बरवाडीह एनटीपीसी कोल परियोजना बड़कागांव के अन्तर्गत 5.5 लाख टन कोयले

में लगी आग और उससे होने वाले राजस्व के नुकसान व स्थानीय स्तर पर जानमाल एवं

पर्यावरण की संभावित क्षति को देखते हुए एनटीपीसी का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को

उपायुक्त आदित्य कुमार आनंद से मिला। मौके पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, सदर

अनुमण्डल पदाधिकारी सहित एनटीपीसी के प्रतिनिधि ने पकरी बरवाडीह एनटीपीसी

कोल परियोजना बड़कागांव के समस्याओं को लेकर गहन विचार विमर्श किया।

इस अवसर पर एनटीपीसी के कार्यपालक निदेशक प्रशांत कश्यप ने बताया कि बड़कागांव

के मंझली दाढ़ी क्रशर पॉइंट कोल माइंस में लगभग 5.5 लाख टन कोयला उत्खनन के

उपरांत डंप हो गया है जिसका उठाव समयानुसार नहीं होने के फलस्वरूप इस कोयले के

भंडार में आग लगने की घटना हो चुकी है। जिसके कारण प्रदूषण, जानमाल की भारी क्षति

होने की संभावना उत्पन्न हो गई है। साथ ही उत्खनित कोयला का ढुलाई नहीं होने के

कारण बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि सहित कई तरह की समस्याएं भी हो रही है। उन्होंने

कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद कोयले में लगी आग बढ़ रही है जिसका ससमय निदान

होना आवश्यक है।

पकरी बरवाडीह में कोयला ट्रांसपोर्टिंग आंदोलन की वजह से ठप

सभी बिन्दुओं पर विचार करते हुए उपायुक्त ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी विद्या भूषण

कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की एक टीम के साथ स्थल निरीक्षण करते हुए धरना स्थल

पर बैठे स्थानीय ग्रामीणों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ एक सार्थक वार्ता कर

यथाशीघ्र रिपोर्ट करने का निर्देश दिया। ताकि समय रहते सभी समस्याओं का समाधान

किया जा सके। बताते चलें कि पकरी बरवाडीह क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीणों द्वारा अपनी

मांगों के पूर्ण नहीं होने तक उत्खनित कोयले के ट्रांसपोर्टिंग का परिचालन पूर्णता बंद कर

दिया गया है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कार्तिक एस, एसडीओ सदर विद्युत भूषण

कुमार, डीजीएम प्रशांत सिंह सहित कई अन्य मौजूद थे।


 

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