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उत्तर पूर्व के कई राज्यों में कोयला माफिया का अवैध व्यापार

  • कई राज्यों में पुलिस प्रशासन मौन
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा उल्लंघन

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : उत्तर पूर्व के कई राज्यों में कोयला का अवैध कारोबार एक संगठित गिरोह की

शक्ल ले चुका है। नॉर्थ ईस्ट कोल इंडिया लेबर यूनियन नामी एक ट्रेड यूनियन संगठन ने

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कोयला माफिया के अवैध व्यापार के संबंध में मेघालय सरकार

पर एक मामला दर्ज किया गया और सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के

उल्लंघन का आरोप लगाया ।पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को अवैध खनन

पर 100 करोड़ का जुर्माना देने का आदेश दिया था। लेकिन मेघालय सरकार ने सर्वोच्च

न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है।हालांकि, पीठ ने संबंधित अधिकारियों की

अनुमति से निजी एवं सामुदायिक स्वामित्व वाली भूमि पर खनन जारी रखने की इजाजत

दे दी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने तीन सदस्यीय समिति की एक रिपोर्ट पर

संज्ञान लेते हुए 4 जनवरी को मेघालय सरकार पर जुर्माना लगाया था और कहा था कि

राज्य में करीब 24,000 खदानें थी जिनमें से अधिकांश अवैध थीं।इससे पहले उच्चतम

न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में राज्य में कोयला खदान त्रासदी के मद्देनजर कोयले

के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन असम और उत्तर पूर्व में में कोयले का

अवैध खनन और परिवहन जोरों पर चल रहा है।

कोयला माफिया मार्ग बदलकर कोयले का अवैध कारोबार कर रहे हैं

कोयला माफिया बड़ी आसानी से मार्ग बदलकर कोयले का अवैध कारोबार कर रहे हैं और

सब कुछ जानते हुए भी पुलिस-प्रशासन मौन धारण किए है। पहले कोयला जोराबाट-

गुवाहाटी होकर दूसरे राज्यों में जाता था, लेकिन अब इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर तलाशी

ज्यादा होने के कारण कोयला माफिया मार्ग बदलकर तेजपुर-मंगलदै होते हुए दूसरे राज्यों

में भेज रहें, लेकिन असम – मेघालय पुलिस प्रशासन से बार-बार शिकायत करने के बाद

भी प्रशासन इस बात को नकारता रहा, लेकिन सच्चाई कभी छुपती नहीं है और तड़के यह

एक बार फिर प्रमाणित हो गया।

उत्तर पूर्व के राज्यों की इस गड़बड़ी के कई उदाहरण मौजूद

तड़के खारुपेटिया के पास राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 15 पर एक कोयला भर्ती ट्रक पलट गया तो

मामला सामने आया।हालाँकि, असम और उत्तर पूर्व में कोल इंडिया में अभी भी 3 और

जंगलों में अवैध खनन किया गया है। कोल इंडिया लिमिटेड के नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स

ने उत्तर पूर्व भारत में कोयला माफिया के साथ अवैध रूप से अवैध खनन किया है, जिसमें

न केवल साल्की प्रस्तावित रिजर्व फॉरेस्ट, बल्कि देहिंग पटकई रेंज में तीन अन्य जंगलों

में खुलेआम खनन अभियान चलाए जा रहे हैं। इस बीच, जब इन उल्लंघनों के बारे में पूछा

गया, तो वन अधिकारी चुस्त-दुरुस्त थे। हम इस मामले को देखेंगे, एक शीर्ष अधिकारी ने

कहा। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने इससे पहले साल्की उल्लंघन के लिए कोल इंडिया

लिमिटेड के नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एनईसी) पर 43.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

था। आधिकारिक सूत्रों ने इस मामले में अब तक कुछ भी नहीं कहा है, लेकिन सूत्रों के

अनुसार इस ट्रक में 40 से अधिक कोयला फर्जी कागजातों के सहारे पश्चिम बंगाल भेजा

जा रहा था। इस संबंध में उक्त ट्रक के चालक सहचालक और पुलिस भी अब तक कुछ

नहीं बता रही है।

पुलिस की ओर से कहा जा रहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।

इधर सूत्रों ने बताया कि एक-एक ट्रक के विनिमय में जागुन में 35000 रुपए दिया जा रहा

है, जिससे राज्य के अंदर कोई भी विभाग गाड़ी को परेशान नहीं करे। इधर एक अन्य सूत्रों

से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक-एक ट्रक कोयला का जीएसटी करीब साढ़े चार लाख

रुपए होता है और इसी को लेकर सर्वप्रथम फर्जी टैक्स इनवाॅइस दिया जाता है और उसके

साथ कोयला भर्ती ट्रक आपसी मिली भगत से परिवहन करते हैं। यह पूरा खेल दिसपुर

गुवाहाटी से नईदिल्ली तक नियंत्रित होने का आरोप है।


 

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