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नहीं बुझेंगी झारखंड की बत्तियां, पावर प्लांटों के पास पर्याप्त कोयला

  • विद्युत संयंत्रों के कोयले के भंडार को भर दिया है
  • बिजली आपूर्ति की मांग घरेलू उपभोक्ताओं की है
  • औद्योगिक इकाइयां लॉकडाउन की वजह से प्रभावित

रांची : नहीं बुझेगी झारखंडवासियों की बत्तियाँ, जो अबतक कोयले की मांग के कारण

अबतब की स्थिति में चल रही थी और अनुमान जताया जा रहा था की जल्द ही झारखंड

राज्य में बिजली सप्लाई रोक दी जाएगी। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से बचाव के

लिए चल रहे लॉकडाउन ने अक्सर खाली रहने वाले विद्युत संयंत्रों के कोयले के भंडार को

भर दिया है। लॉकडाउन के कारण औद्योगिक इकाइयां बंद हैं और मांग भी पहले के

अनुरूप नहीं रही। लिहाजा पावर प्लांट बिजली का सीमित उत्पादन कर रहे हैं, ताकि घाटा

ज्यादा नहीं हो। बिजली आपूर्ति की मांग सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं की है। झारखंड के सबसे

बड़े बिजली उत्पादक संयंत्र तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (टीटीपीएस) की दो में से एक

यूनिट अक्सर कोयले की कमी के कारण बंद रहती थी, लेकिन इन दिनों दोनों यूनिटों से

उत्पादन हो रहा है। संयंत्र में रोजाना 7.5 मीट्रिक टन कोयले की खपत होती है।

नहीं है कमी कोयले की

यहां अधिकतम सात दिनों तक की खपत के कोयला भंडारण की क्षमता है। फिलहाल

पर्याप्त मात्रा में कोयले की आपूर्ति के कारण संयंत्र के दोनों यूनिट रोजाना औसतन 350

मेगावाट का उत्पादन कर रहे हैं। इनकी कुल क्षमता 420 मेगावाट है। झारखंड में

औद्योगिक इकाइयां लॉकडाउन की वजह से सर्वाधिक प्रभावित हैं। इसका सबसे ज्यादा

नुकसान दामोदर वैली कारपोरेशन (डीवीसी) को उठाना पड़ रहा है। डीवीसी के तीन थर्मल

पावर प्लांट कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन, बोकारो थर्मल पावर स्टेशन और चंद्रपुरा थर्मल

पावर स्टेशन के पास कोयला प्रचुर मात्रा में है, लेकिन पावर प्लांट के समक्ष सबसे बड़ा

संकट मांग में घोर कमी है। डीवीसी के सभी पावर प्लांट को मिलाकर क्षमता लगभग

7000 मेगावाट की है। फिलहाल मांग की कमी को देखते हुए पावर प्लांट्स से उत्पादन

1100 से 2000 मेगावाट के बीच किया जा रहा है। फिलहाल विद्युत उत्पादक संयंत्रों के

पास कोयले का भरपूर भंडार है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के मुताबिक

पावर कंपनियां कोयले के लिए ऑफर ही नहीं दे रही हैं। वजह यह कि उनके पास एक

महीने तक का स्टॉक पड़ा हुआ है। पावर प्लांटों के पास कोयला के भंडारण की जगह नहीं

है। सामान्य दिनों में बीसीसीएल 18 रैक कोयला प्रतिदिन देशभर के विद्युत उत्पादक

संयंत्रों को भेजती थी। मार्च महीने में लॉकडाउन शुरू होने पर इसमें तेजी आई। प्रतिदिन

20 रैक तक का डिस्पैच किया गया। अप्रैल शुरू होते ही कंपनियों ने नया ऑफर देना बंद

कर दिया। अभी प्रतिदिन छह रैक कोयला ही कंपनी द्वारा भेजा जा रहा है।

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