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गलत तरीके से छात्रवृति लेने वालों पर होगी कार्रवाई, सीएम हेमंत का निर्देश जारी




शिक्षा माफिया के खिलाफ मुख्यमंत्री की नजर गयी
पहले से ही चल रही है इन मामलों की जांच
अनेक स्तरों पर मिलीभगत से हुआ है घोटाला
चर्चा होते ही घटी वृत्ति लेने वालों की संख्या
राष्ट्रीय खबर

रांची: गलत तरीके से छात्रवृत्ति लेने के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक वार्षिक कैलेंडर तैयार करने का निर्देश अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति,अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारियों को दिया है। सीएम ने यह भी कहा है कि छात्रवृति का भुगतान समय पर किया जा सके ताकि विधार्थी लाभान्वित हो।




सीएम ने बीते दिनों विभागीय समीक्षा में इसके अलावा सभी उपायुक्तों को भी इसकी लगातार समीक्षा का निर्देश दिया है। वेरिफिकेशन का काम भी लगातार करने को कहा है ताकि किसी भी छात्र को छात्रवृति मिलने में अनावश्यक विलंब न हो।

सीएम ने इसके अलावा यह सुनिश्चित करने को कहा है कि छात्रवृति योजना का गलत तरीके से कोई लाभ न उठाये। गलत करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई भी करने का निर्देश उन्होंने दिया है। सभी उपायुक्तों को प्री-मैट्रिक छात्रवृति का भुगतान समय पर करने के साथ-साथ विभाग के द्वारा दिए गये गाइडलाइन का भी अनुपालन करने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर गत 18 नवंबर को राष्ट्रीय खबर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर इस गोरखधंधे का उल्लेख किया था। इस रिपोर्ट में यह बताया गया था कि जांच प्रारंभ होते ही छात्रवृत्ति लेने वालों की संख्या में जबर्दस्त तरीके से कमी आ गयी थी।

इस मामले की जांच सीबीआई और राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा अलग अलग की जा रही थी। जांच प्रारंभ होने के बाद छात्रवृत्ति लेने वालों के आंकड़े ही इस बात को प्रमाणित कर गये थे कि दरअसल झारखंड में भी केंद्र के इस पैसे की बंदरबांट हो रही थी। आंकड़ों के मुताबिक छात्रवृत्ति का घोटाला चर्चा में आने के बाद इस बार मैट्रिक के पूर्व की छात्रवृत्ति में करीब 85 प्रतिशत की कमी आ गयी है।




गलत तरीके से छात्रवृत्ति का मामला पहले ही उजागर हुआ था

इतनी अधिक संख्या में छात्रवृत्ति लेने वालों की संख्या का कम होना यह साबित कर जाता है कि इस राज्य में दरअसल छात्रवृत्ति के पैसों का असली उपयोग क्या होता था।

केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के मद में पैसा उपलब्ध कराने के बाद यह पैसा दरअसल किनकी जेबों में जाता था, उसे पकड़ना जांच एजेंसियो की जिम्मेदारी है। फिर भी यह स्पष्ट माना जा सकता है कि चूंकि यह मामला जांच के दायरे में आ चुका है इसी वजह से इस पर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन देने वालों में 85 प्रतिशत की कमी आ गयी है।

बता दें कि इस छात्रवृत्ति के तहत पहली कक्षा से चौथी कक्षा तक एक हजार रुपये, पांचवी कक्षा से दसवीं तक के लिए 57 सौ रुपये और छात्रावास में रहने वालों को 10,700 रुपये की छात्रवृत्ति केंद्र सरकार के पैसे से दी जाती है। इस छात्रवृत्ति घोटाला पर खबर छपने के पहले यहां इस श्रेणी के आवेदन पत्रों की संख्या 74183 थी जो इस साल घटकर 10338 हो गयी है।

दरअसल यह खुलास हो चुका था कि अधिकारियों, दलालों और स्कूल के लोगों की मिलीभगत से छात्रवृत्ति पाने वाले फर्जी छात्रों का आंकड़ा तैयार कर पैसे की बंदरबांट कर ली जाती थी। इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर फर्जी आंकड़े दर्ज किये जाते थे, जिसमें अनेक लोगों की मिलीभगत होती थी। इनमें से कुछ की पहचान भी उसी वक्त हो गयी थी।

इस घोटाला की वजह से प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप के मद में झारखंड में पिछले वर्ष 61 करोड़ रुपये बांटे गये थे जो अब घटकर पांच करोड़ हो गया था। अब इस मामले की सीबीआई जांच और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में क्या कुछ निकल कर आता है और कब निकलकर आता है, यह देखने वाली बात होगी।



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