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दाग और बेदाग के मुद्दे पर जमशेदपुर की आग झारखंड में फैली







  • सरयू राय प्रकरण पर भाजपा साख बचाने में
  • मंत्री रहते हुए लगाये थे कई गंभीर आरोप
  • बयान में मोदी और अमित शाह को लपेटा
  • चारा और खनन घोटाला में सक्रिय भूमिका
संवाददाता

रांचीः दाग और बेदाग का सवाल अब पूरे झारखंड में गूंजने लगा है।

सरयू राय ने अपने नामांकन के दौरान ही कुछ ऐसी बात कह दी थी,

जिसे बार बार भाजपा साफ करने की कोशिश कर रही है।

खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास भी इस मुद्दे पर एक नहीं कई बार

सफाई दे चुके हैं। भाजपा द्वारा टिकट दिये जाने में विलंब

के बाद सरयू राय ने पहल करते हुए खुद ही भाजपा नेतृत्व

से उनके नाम पर विचार नहीं करने की एलान कर दिया था।

इसके बाद समर्थकों से विचार विमर्श के बाद उन्होंने निर्दलीय

चुनाव लड़ने का एलान भी कर दिया।

इसी दरम्यान श्री राय ने रघुवर दास को रघुवर दाग कहते हुए

कहा था कि भाजपा के दामन पर यह ऐसा दाग है, जिसे नरेंद्र

मोदी और अमित शाह भी लाख कोशिशों के बाद भी साफ नहीं

कर पायेंगे।

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद

भाजपा को इससे हुए नुकसान की बात समझ में आयी थी।

अब भाजपा के अन्य नेताओं के साथ साथ खुद रघुवर दास

भी खुद के पांच वर्षों के शासन काल को पूरी तरह बेदाग बताने

की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। ऐसा प्रयास सिर्फ जमशेदपुर

पूर्वी के मतदाताओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड में सरयू

राय प्रकरण से गये संदेश की वजह से करना पड़ रहा है।

दाग और बेदाग से पहले लिखे थे कई पत्र

याद रहे कि रघुवर दास मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहते हुए

ही श्री राय ने सरकार के कई फैसलों पर सवाल खड़े कर दिये

थे। पहले तो उन्होंने इस बारे में पार्टी और सरकार को

गोपनीय पत्र लिखा था। उस पर कार्रवाई नहीं होने के बाद

वह इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर ले आये थे। तभी से इन

मुद्दों पर गाहे बगाहे चर्चा होती ही रहती है।

लेकिन अब तक सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर कोई ठोस

उत्तर नहीं दिया गया है। सिर्फ सरयू राय के पत्र सार्वजनिक

होने के बाद सरकार के बचाव में भाजपा के प्रवक्ताओं का

बयान आया था। लेकिन भाजपा के इन प्रवक्ताओं का राजनीतिक

कद सरयू राय के मुकाबले छोटा होने की वजह से उनका कोई

प्रभाव नहीं पड़ा था।

खुद श्री दास अपने पूरे कार्यकाल को बेदाग बता रहे हैं। दूसरी

तरफ सरयू राय की हर बात को सिर्फ इस वजह से गंभीरता

से लिया जाता है क्योंकि इससे पूर्व लालू प्रसाद और मधु कोड़ा

के मामले में भी वह इतने ही मुखर थे। चारा घोटाला और खनन

घोटाले की जांच की गाड़ी आगे बढ़ाने में उनके सवालों की

महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

भाजपा नेताओं के लिए इस बार टिकट वितरण के कई फैसलों

की वजह से सरयू राय के रघुवर दाग के हमले का जवाब देना

कठिन हो रहा है। खास कर टिकट वितरण में कई किस्म के

आरोपियों को प्रत्याशी बनाये जाने के औचित्य पर भाजपा के

नेता ठोंक ठठाकर कुछ नहीं बता पा रहे हैं।

आदिवासियों को राष्ट्र विरोधी बता रही सरकारः राहुल गांधी

पार्टी को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाये गये

सवाल पर भी आपत्ति है। राहुल गांधी ने कल ही खूंटी में दस

हजार आदिवासियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने की बात

कही थी। श्री गांधी ने चुनाव के दौरान राजनीतिक हमला करते

हुए कहा था कि भाजपा सरकार सिर्फ आदिवासियों को अपना

निशाना बना रही है। इसके बाद से भाजपा के नेता राहुल गांधी

के इस बयान की आलोचना में जुट गये हैं। इसके बीच दाग

और बेदाग की चर्चा अब जमशेदपुर से निकलकर राज्य के

अन्य इलाकों तक चुनाव प्रचार का हथियार बन चुकी है।



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