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तालियों और घंटियों का शोर भी राष्ट्रभक्ति ही है




रांचीः तालियों और घंटियों का शोर आम जीवन में कई बार सरदर्द के जैसा महसूस

होता है। लेकिन जब जनता कर्फ्यू जैसा माहौल हो तो यह वाकई सुकून देने वाला

साबित हुआ। लोग अपने घरों में खुद को कैद रखने के बाद भी पहले से ही तैयार बैठे थे।

इसलिए शाम के पांच बजते ही राजधानी रांची के हर इलाके में इस किस्म का शोर

सुनाई पड़ा। इससे साबित हो गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो संदेश देश की जनता

को दिया था, वह शत प्रतिशत आम जनता तक पहुंचा है और लोग उनकी अपील पर

गंभीरता से अमल भी करने के लिए तैयार हैं।

श्री मोदी ने जनता के नाम अपनी अपील में शाम के पांच बजे कोरोना और राष्ट्रीय

जिम्मेदारी निभाने वालों का हौसला बढ़ाने के लिए ताली और घंटी बजाने की यह अपील

की थी। शाम के पांच बजते ही बिना किसी घोषणा के रांची के हर इलाके में इसके शोर

सुनाई पड़ने लगे। जिस तरीके से श्री मोदी ने इसे आजमाने को कहा था, उसका अक्षरशः

पालन हुआ। फ्लैटों में रहने वाले अपनी एकजुटता प्रदर्शन करने के लिए अपनी अपनी

बॉलकोनी पर खड़े होकर तथा बहुमंजिली इमारतों में रहने वाले भी अपने पास उपलब्ध

खाली स्थानों पर अथवा छतों पर से ताली, थाली या कुछ नहीं तो डब्बा बजाते देखे और

सुने गये। इस दौरान कई पुलिस वाहनों के साइरन भी लगातार बजते रहे।

तालियों और घंटियों के साथ पुलिस साइरन भी

अच्छी बात यह नजर आयी कि घरों के छोटे बच्चे भी अपने अभिभावकों

के निर्देश पर इस राष्ट्रीय जिम्मेदारी का पालन करते हुए घर के बाहर अथवा

छतों पर ताली बजाते अथवा अपने नन्हे हाथों में थाली बजाते पाये गये।

जनता कर्फ्यू के लागू होने के दौरान इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद भी

किसी ने बंदिश तोड़ने की पहल नहीं की, यह भी बड़ी बात रही। यह अलग बात

है कि कुछ उत्साही तत्व बिना काम के भी सड़कों पर मंडराते हुए शहर का

नजारा लेते नजर आये।

इनमें से एक सज्जन ऐसे भी थे जो अपने दुपहिया वाहन में मोबाइल चालू कर शायद

लाइव वीडियो प्रसारित करने के चक्कर में अलबर्ट एक्का चौक के समीप टकराते

टकराते बचे।

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