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अरुणाचल में भाला और अन्य हथियार लेकर सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं चीनी सैनिक

  • लापता हुए पांच लोग पीएलए तरफ मिले हैं

  •  हॉट लाइन संदेश के बाद चीनी की प्रतिक्रिया

  •  ऊपर के शिविरों में रसद एकत्रित करती है सेना

  •  मुखपरी हिल के नीचे एकत्रित है पीएलए सैनिक

  •  सभी ऊंची पहाड़ियों पर भारतीय सैनिक मुस्तैद हैं

प्रतिनिधि

गुवाहाटी: अरुणाचल प्रदेश से लापता हुए पांच युवकों को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई

है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने

इसकी पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश से लापता पांच युवक उनकी ओर मिले हैं। उन्होंने

कहा कि युवकों को हमारी ऑथोरिटी को सौंपने का काम किया जा रहा है। चीनी पीपुल्स

लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने मंगलवार को पुष्टि की कि अरुणाचल प्रदेश से लापता पांच

युवकों को उनके पक्ष से मिल गया है। चीनी ने भारतीय सेना के हॉटलाइन संदेश का जवाब

देते हुए युवाओं की उपस्थिति की पुष्टि की है।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज कहा कि चीन ने

पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश से लापता हुए पांच लोगों को “उनके पक्ष” में पाया गया है

और उन्हें भारत लाने के लिए प्रक्रिया जारी है।”चीन के पीएलए ने भारतीय सेना द्वारा

भेजे गए हॉटलाइन संदेश का जवाब दिया है। गत एक सितंबर से लापता होने वाले पांच

लोग पोर्टर्स के एक समूह का हिस्सा थे जो मैकमोहन लाइन पर जाने वाली भारतीय सेना

की लंबी दूरी की टोही गश्त के लिए आवश्यक सामान ले जा रहे थे।

एक जंगल में शिकार के लिए जाने के बाद पांच ग्रामीण लापता हो गए। युवकों के परिवार

के कुछ सदस्यों ने कहा कि वे अंशकालिक बंदरगाह के रूप में सीमा पर गए थे और पहाड़ों

में पारंपरिक जड़ी बूटियों की तलाश में भटक गए होंगे। अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ों में एक

भारतीय सेना (एलआरआरपी) एक सप्ताह से एक महीने तक खुद को बनाए रख सकती

है। ये इकाइयाँ राशन और दवाइयों के भार के साथ चलती हैं क्योंकि वे पहाड़ों पर ट्रेक

करते हैं। स्थानीय लोग पोर्टर्स, गाइड और स्काउट्स के रूप में कार्य करते हैं और अपनी

सेवा के लिए मानदेय प्राप्त करते हैं।

अरुणाचल के एलएसी पर कब्जे से चीनी सेना तिलमिलाई

दूसरी ओर,भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि मैकमोहन रेखा इसमें तवांग अरुणाचल

प्रदेश यानी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास करीब 60 किलोमीटर की एलएसी पर

भारत ने उंचे पहाड़ों और दर्रों को अपने अधिकार-क्षेत्र में कर लिया है। इसके बाद से ही

चीनी सेना तिलमिलाई हुई है और लगातार घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है। लेकिन

हर बार भारतीय सेना चीन की इन कोशिशों को नाकाम कर देती है। भारतीय सेना ने साफ

तौर से कहा कि मैकमोहन रेखा इसमें तवांग की घटना के बाद भी 30-40 सैनिक अभी भी

मुखपरी हिल के नीचे डटे हुए हैं।भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि कल आधी रात को

उनके हाथों में भाले और दूसरे तेजधार हथियार हैं। चीनी सैनिकों के वहां जमे होने से

भारत और चीन के बीच मुखपरी में स्टैंडऑफ यानि टकराव की स्थिति बनी हुई है। तवांग

में चीनी सेना के हाथों में भाले और दूसरे तेजधार हथियार एलएसी पार करने की कोशिश

दोनों देशों की सेनाओं द्वारा एलएसी पर सैनिकों के एक बड़े जमावड़े के बावजूद भारत ने

रुणाचल प्रदेश यानी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपनी तरफ के गांवों को खाली

नहीं कर वाया है। इलाके के लोग ने बताया कि स्थानीय ग्रामीण सैनिकों के लिए खाना-

पीना और दूसरा जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं। इन गांवों के काफी लोग सेना के लिए पोर्टर

का काम भी करते हैं।


 

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