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चीनी रक्षा वैज्ञानिक अपनी कोरोना वैक्सिन का वैश्विक परीक्षण चाहते हैं

  • पूरी दुनिया में हो ट्रायल तो जल्द मिलेगा परिणाम

  • चीन में परीक्षण सफल होने के बाद दूसरा चरण

  • पूरी दुनिया में एक साथ परीक्षण से जल्द परिणाम

  • अमेरिका ने भी विकसित किया है अपना वैक्सिन

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चीनी रक्षा वैज्ञानिक किसी वैक्सिन को तैयार करने में सफल हुए हैं। स्थानीय

स्तर पर इसका परीक्षण हो चुका है। इसके बाद चीनी रक्षा वैज्ञानिक वैश्विक स्तर पर इस

वैक्सिन का परीक्षण चाहते हैं। उनका मकसद पूरी दुनिया में एक साथ ट्रायल होने की

स्थिति में अधिक लोगों के बीच इसे आजमाया जा सकेगा। इससे परिणाम की रिपोर्ट भी

जल्द आ जाएगी। चीनी रक्षा वैज्ञानिकों ने चीन में इस वायरस का प्रकोप प्रारंभ होने के 

तुरंत बाद ही प्रारंभ कर दिया था। जेनेटिक पद्धति के आधार पर कोविड 19 के विषाणु का

परीक्षण और वर्गीकरण होने के बाद ही इस वैक्सिन को तैयार किया गया है। प्रथम चरण

के क्लीनिकल ट्रायल के सफल होने के बाद पूरी दुनिया में इसे आजमाने की घोषणा की

गयी है। किसी भी दवा को बाजार में लाने के पहले इस किस्म का ट्रायल किये जाने का ही

प्रावधान है।

चीनी रक्षा विशेषज्ञ चेन लिंग ने यह जानकारी दी

चीनी रक्षा वैज्ञानिकों ने प्रारंभिक तौर पर इसे सही और कारगर पाने के बाद ही इसे पूरी

दुनिया में ट्रायल के लिए लाने की बात कही है। इस वैक्सिन को बनाने वाली संस्थान के

विषाणु विशेषज्ञ चेन लिंग कहते हैं कि प्रथम चरण के क्लीनिकल ट्रायल की रिपोर्ट को

शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा। यह ट्रायल सफल होने के बाद ही इसे पूरी दुनिया में ट्रायल

के लिए भेजने की तैयारी चल रही है। पहले चरण का ट्रायल सफल होने के बाद अब दो

और चरण के क्लीनिकल ट्रायल की आवश्यकता है। पूरी दुनिया में इसका परीक्षण होने

पर उसके नतीजे पूरी दुनिया से और जल्दी आयेंगे। साथ ही विभिन्न जेनेटिक संरचना के

इंसानों के बीच इसका क्या कुछ परिणाम होता है, यह भी स्पष्ट हो जाएगा। चेन लिंग ने

कहा कि प्रारंभिक अवस्था में इसके सफल होने के बाद ही चीन को कोरोना वायरस को

नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। वरना प्रारंभिक चरण में यह अचानक ही

किसी आणविक विस्फोट की तरह वुहान शहर के पूरे देश में फैलने लगा था। वैक्सिन की

वैश्विक परीक्षण होने के बाद ही यह पता चल पायेगा कि जिन लोगों को वैक्सिन लगे

उनपर कोरोना वायरस का क्या प्रभाव रहा और जिन्हें यह वैक्सिन नहीं पड़ा, उन पर

कितना प्रभाव पड़ा। वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल के लिए खास तौर पर उन देशों में इसका

अधिक से अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए, जहां इस महामारी से सबसे अधिक मौतें हो

रही हैं।

अपने देश में परीक्षण में इसे सफल पाया है चीन ने

चीन में परीक्षण के बाद इसे सुरक्षित माना गया है। चीनी रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक

जिन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यह वैक्सिन तैयार हुआ है, उसमें यह सफल रहा है। चेन

लिंग बताती है कि दुनिया के अन्य वैज्ञानिकों के साथ उनके लोग लगातार संपर्क में बने

हुए हैं। यहां के क्लीनिकल ट्रायल की रिपोर्ट आने के बाद अन्य देशों ने भी इसके प्रयोग की

अच्छा जतायी है। कई देश अभी इसी विषाणु अनुसंधान केंद्र के साथ जुड़कर ही शोध पर

काम करने तक की इच्छा जता चुके हैं। इस वैक्सिन को तैयार करने के बारे में यह

जानकारी दी गयी है कि एक सामान्य किस्म के बैक्टेरिया के जरिए इसे तैयार किया जाता

है। इस बैक्टेरिया से कोई नुकसान नहीं होता। इसलिए उसमें कोविड 19 विषाणु का प्रवेश

होते ही बैक्टेरिया इसके लिए प्रतिरोधक तैयार करने में जुट जाता है। कोविड 19 की

जेनेटिक संरचना को समझ लेने के बाद जब बैक्टेरिया में इसका प्रवेश होता है तो वहां

बनने वाला वैक्सिन ही इसके प्रतिरोध बैक्सिन के तौर पर सामने आता है। चीन में इस

वायरस पर काफी नियंत्रण पा लेने के बाद भी दुनिया के कई देशों में यह नियंत्रण से बाहर

ही है। इसलिए शायद इटली, स्पेन और अमेरिका जैसे देशों में इस वैक्सिन को आजमाने

की तैयारिया चल रही है।

सबसे पहले ब्रिटेन में इसे आजमाना चाहते हैं चीनी रक्षा वैज्ञानिक

वैसे इस बात के भी संकेत मिले हैं कि चीनी रक्षा वैज्ञानिक इसे सबसे पहले ब्रिटेन में

आजमाना चाहते हैं। जहां कई प्रमुख लोग भी इस वायरस की चपेट में हैं। चीन के वुहान में

इसे सबसे पहले वुहान के 108 लोगों पर पहले आजमाया गया था। अमेरिका में भी अलग

से वैक्सिंग बनाने का काम जारी दूसरी तरफ अमेरिका के वैज्ञानिक भी इसकी

वैक्सिन बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। वहां भी इस वैक्सिन का क्लीनिकल ट्रायल प्रारंभ

हो चुका है। इस बारे में चीनी रक्षा वैज्ञानिक यह मानते हैं कि कोविड 19 ऐसी वैश्विक

चुनौती बन चुकी है, जिसे अब अलग अलग कर नहीं देखा जा सकता है।


 

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