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भारत में अशांति फैलाने चीन की आतंकवादियों को बढ़ावा देने की चाल

  • पूर्वोत्तर के 20 आतंकवादी समूहों की पीठ पर हाथ

  • अराकान सेना को पैसे और हथियार से मदद

  • म्यांमार ने दुनिया से सहायता मांगी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : भारत में अशांति फैलाने की चीन की एक और चाल का खुलासा हो गया है।

सीमा पर अपनी सैनिक गतिविधियों को बढ़ाने के साथ साथ अब वह पूर्वोत्तर के

आतंकवादी समूहों को भी समर्थन दे रहा है। इसके तहत बीस संगठनों की पहचान भी हो

चुकी है, जिन्हें चीन से मदद मिल रही है। भारतीय सेना के इंटेलिजेंस ब्यूरो के सूत्रों की

एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन म्यांमार के आतंकी संगठनों को पैसे और आत्याधुनिक

हथियार की आपूर्ति कर रहा है। चीन के द्वारा अराकान सेना को मदद की जा रही है।

दरअसल, म्यांमार के साथ भारत की 1,600 किलोमीटर की सीमा विद्रोही समूहों के

शिविरों का अड्डा बनी हुई है, लेकिन म्यांमार की सेना द्वारा ऑपरेशन करने पर सहमति

बनने के बाद पिछले कुछ वर्षों से विद्रोही समूहों पर दबाव बन रहा है। भारत- म्यांमार

सीमा से करीब 250 गांव सटे हैं। इनमें 3 लाख से ज्याादा लोग रहते हैं। ये लोग 10 किमी

के भीतर रहते हैं और अक्स र बॉर्डर क्रॉस करते हैं। पिछले साल म्यांमार की सेना ने

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रदान की गई पिन-पॉइंटेड इंटेलिजेंस के आधार पर

फरवरी और मार्च 2019 के माध्यम से निरंतर अभियान चलाया। म्यांमार से भारत के चार

राज्य सटे हैं। असम , नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश. इसलिए वहां से

चल रहे आतंकवादी संगठनों का असर सीधा भारत पर होता है। चीन भारत में अशांति

फैलाने के लिए इन राज्यों के हथियारबंद समूहों की मदद कर रहा है।  लंबे समय बाद देश

की आतंरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत को एक और कूटनीतिक सफलता

भारत के प्रधान मंत्री के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के नेतृत्व में

मिली थे।

भारत में अशांति फैलाने के जाल को अजीत डोभाल ने तोड़ा था

म्यांमार ने भारत को भरोसा दिलाया था कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ

नहीं होने देगा। 15 मई 2020 की तारीख को म्यांमार और भारत के साथ कूटनीतिक

सफलता इस कारण से म्यांमार ने 22 उग्रवादियों को भारत को सौंपे थे, उनमें कई ऐसे भी

व्यक्ति हैं, जो लंबे समय से भारत में वांछित थे। मोस्ट वांटेड नागा विद्रोही संगठन

नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड या खापलांग है। ये म्यांमार में एनएससीएन-

के के नाम से जाना जाता है। चीन नहीं चाहता है कि म्यांमार में भारतीय प्रभाव बढ़े।

इसलिए चीनी सरकार बार-बार म्यांमार सरकार पर भारत छोड़ने और चीनी सरकार को

समर्थन करने का दबाव बना रही है। लेकिन म्यांमार की सरकार अभी भी चीन की सेना

की बुद्धिमत्ता का कोई जवाब नहीं दे रही है ।भारतीय सेना के स्रोत के अनुसार उसके बाद

चीनी सरकार ने म्यांमार के ‘अराकान सेना’ को पैसे और हथियार के मदद मदद कर रहा

है।

भारत म्यांमार सीमा पर अनेक गांव के लोग आना जाना करते हैं

म्यांममार में इसके कई शिविर हैं। पूर्वोत्तर में चार राज्य अरुणाचल प्रदेश (520

किलोमीटर), मणिपुर (398 किलोमीटर), मिजोरम (510किलोमीटर), नागालैंड

(215किलोमीटर) लंबी सीमा म्यांमार के साथ लगती है. इस 1643 किलोमीटर की सीमा

पर 16 किलोमीटर भूभाग फ्री जोन है, जिसमें दोनों तरफ आठ-आठ किलोमीटर की

सीमाएं शामिल है। सेना के सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना के साथ

मिलकर चलाए गए एक अभियान में म्यांमार सीमा पर एक उग्रवादी समूह से संबंधित 13

शिविरों को नष्ट कर दिया था। जिसमें चीन द्वारा समर्थित कचिन इंडिपेंडेंट आर्मी के एक

उग्रवादी संगठन, अराकान आर्मी को निशाना बनाया गयाथा। सूत्रों ने कहा कि शिविरों को

म्यांमार के सीमा पर नष्ट किया था। भारतीय सेना ने म्यांमार को अभियान के लिए

हार्डवेयर और उपकरण मुहैया कराए, जबकि इसने सीमा पर बड़ी संख्या में बलों को तैनात

किया। म्यांमार की ‘अराकान आर्मी’ जोचीन के धन और हथियारों की मदद से 20 पूर्वोत्तर

राज्य आतंकवादी संगठनों के साथ भारत के खिलाफ गुप्त अभियान चलाने की कोशिश

की जा रही है। पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को बढ़ावा देने में म्यांमार की अहम भूमिका रही

है। देश में लंबे अरसे तक शासन करने वाली सैन्य सरकार के दौर में भारत और म्यांमार

के संबंधों की गर्माहट लगभग खत्म हो गई थी। भारत के साथ खुली सीमा का लाभ उठा

कर खासकर नगा उग्रवादी संगठन नेशनल कॉन्सिल आफ नगालैंड (एनएससीएन) के

खापलांग गुट, असम से उल्फा स्वतंत्र गुट, और मणिपुर के छोटे-बड़े कई उग्रवादी संगठनों

ने म्यांमार के जंगलों को अपना अड्डा बना रखा था. भारत सरकार के अनुरोध के बावजूद

सैन्य सरकार इन उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की इच्छुक नहीं थी।

उग्रवादी संगठन म्यांमार के स्थानीय प्रशासन को मोटी रकम देते थे

इसकी वजह यह थी कि उग्रवादी संगठन स्थानीय प्रशासन को मोटी रकम देते थे।

म्यांमार हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए भी कुख्यात रहा है। उग्रवादी

संगठनों को हथियारों की सप्लाई इसी रूट से होती थी। कोई एक दशक पहले तो पूर्वोत्तर

के उग्रवादी गुटों ने म्यांमार की कचिन आर्मी के साथ मिल कर एक साझा मंच भी बनाया

था। भारतीय सेना की रिपोर्ट के अनुसार भारत और म्यांमार सरकार का संबंध अभी तक

ठीक है। चीन दक्षिण एशिया में बहुआयामी खेल खेल रहा है। चीन भारत को कमजोर

करना चाहता है। चीन नहीं चाहता है कि म्यांमार में भारतीय प्रभाव बढ़े। इसलिए चीनी

सरकार बार-बार म्यांमार सरकार पर भारत छोड़ने और चीनी सरकार को समर्थन करने

का दबाव बना रही है। लेकिन म्यांमार की सरकार अभी भी चीन की सेना की बुद्धिमत्ता

का कोई जवाब नहीं दे रही है ।भारतीय सेना के स्रोत के अनुसार उसके बाद चीनी सरकार

ने म्यांमार के ‘अराकान सेना’ को पैसे और हथियार के मदद मदद कर रहा है। वर्तमान

म्यांमार के ‘अराकान सेना’ ने चीन से पैसे और हथियार के मदद से भारत के खिलाफ

पूर्वोत्तर राज्य का 20 आतंकवादी संगठन का साथ गुप्त अभियान चलाने का प्रयास कर

रहा है। इस गंभीर स्थिति में म्यांमार ने दुनिया से मदद मांगी। म्यांमार के वरिष्ठ जनरल

मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि म्यांमार में सक्रिय आतंकवादी संगठन मजबूत ताकतों

द्वारा समर्थित हैं, और विद्रोही समूहों को दबाने के लिए हम अंतर्राष्ट्रीय पूर्ण पूर्ण समर्थन

और सहयोग तथा सहायता चाहते हैं।


 

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