भारत के साथ सीधी लड़ाई में आने से बचना चाहेगा चीन

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  • पुलवामा की घटना के बाद सैन्य सतर्कता के बीच चीनी सीमा पर चौकसी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः भारत के साथ चीन शायद सीधी लड़ाई में नहीं उतरेगा।

पुलवामा की घटना के बाद उपजे तनाव के बीच भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर पूर्वी सीमा का दौरा किया है।

समझा जाता है कि भारतीय सेना हर सीमा पर अपनी और सामने वाली की तैयारियों का जायजा ले रही है।

समझा जाता है कि भारत चीन सीमा पर भी अपनी स्थिति को मजबूत बना रहा है।

पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बढ़ने के बीच ही हर संभावित खतरे का भारतीय सेना आकलन कर ले रही है।

पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति में भारत को सर्वाधिक चुनौती चीन से ही मिल सकती है।

लिहाजा भारतीय सेना चीन से लगने वाली सीमा पर पहले के मुकाबले अधिक चौकसी बरत रही है।

सेना द्वारा हर मोर्चे पर की जाने वाली निगरानी पहले के मुकाबले अधिक तेज हो गयी है।

इस बीच चौथी कॉप्स के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीवी शेखतकर को पत्रकारों ने यहां घेर लिया।

मीडिया से घिर जाने के बाद उन्होंने सवालों के उत्तर भी दिये।

वह दरअसल यहां एक सेमीनार में भाग लेने आये थे।

पत्रकारों के सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना कभी भी असतर्क मुद्रा में नहीं रहती है।

वैसे इन तमाम तैयारियों के बीच भी उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने के बाद भी चीन भारत के साथ सीधी लड़ाई में उतरेगा।

उन्होंने साफ किया कि यह वर्ष 1962 की स्थिति नहीं है और चीन को भी अच्छी तरह पता है कि

भारत की सैन्य शक्ति अब किसी मुकाबले में कम नहीं है।

ऐसे में आर्थिक मोर्चे पर जूझते चीन के लिए एक और युद्ध विनाशकारी साबित होगा।

वैसे चीन के अपने अंदर भी आतंकवाद की समस्या है।

भारत की वर्तमान सैन्य ताकत को जानता है चीन

इसलिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का विरोध करने के बाद भी चीन अपने आंतरिक परिस्थितियों की वजह से आतंकवाद के खतरों से अच्छी तरह वाकिफ है।

पाकिस्तान के पक्ष में बार बार खड़े होने के सवाल पर जनरल शेखतरकर ने कहा कि चीन का पाकिस्तान में ढेर सारा पैसा फंसा हुआ हैं।

ऐसे में पाकिस्तान के पक्ष में बोलना उसकी मजबूरी है।

उन्होंने साफ कर दिया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसी स्थिति होने पर चीन की सेना भारत को उलझाने की कोशिश कर सकती है

ताकि इस भारतीय सैनिक दोनों मोर्चों पर उलझे रहे।

यही स्थिति कारगिल युद्ध के दौरान भी बनी थी।

उस वक्त चीन की सेना ने मौके का फायदा उठाते हुए अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में घुसपैठ की थी।

उन्होंने साफ कर दिया कि उत्तर पूर्व के राज्यों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को भी

चीन काफी समय से मदद करता आ रहा है।

इसलिए भारतीय सेना को ऐसे मौके पर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

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