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चुंबक के आधार पर चंद्रमा की परिस्थितियों का अध्ययन करेगा चीन




  • नकली चांद बनाकर करेगा इसका परीक्षण
  • सारी परिस्थितियों की पूर्व जांच संभव होगी
  • नकली चांद का माहौल भी असली चांद के जैसा
  • वर्ष 2029 में अंतरिक्ष स्टेशन भी बनाना चाहता है चीन
राष्ट्रीय खबर

रांचीः चुंबक के आधार पर चंद्रमा जैसी परिस्थिति पैदा कर चीन वहां की वास्तविक हालात का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए धरती पर ही वह नकली चांद बना रहा है। इसके जरिए कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण को तैयार कर सारे परीक्षण किये जाएंगे।




यह नकली चांद बनकर तैयार हो चुका है और शीघ्र ही इसका परीक्षण भी प्रारंभ कर दिया जाएगा। वैसे पर्यावरण प्रेमी यह भी मानते हैं कि इस चांद से आस पास के पर्यावरण और खास तौर पर अन्य प्राणियों के जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा क्योंकि वह इस नकली चांद के अंतर को समझ नहीं पायेंगे।

इस काम को अंजाम देने के लिए चीन के वैज्ञानिकों ने दो फीट व्यास के चुंबकीय क्षेत्र को एक शून्यता वाले चैंबर में प्रवेश कराने का काम किया है। इससे अंदर के गुरुत्वाकर्षण की शक्ति पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इसके जरिए वैज्ञानिक पहले ही एक मेंढ़क को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ ऊपर उठाने में सफलता हासिल कर चुके हैं।

चुंबक के आधार पर यह प्रयोग पहले भी हो चुका है

चीन के माइनिंग एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय के जिओटेक्निकल इंजीनियर ली रूइलीन ने कहा कि यह शून्यता का चैंबर दरअसल पत्थरों से भरा हुआ है। उसमें धूल के कण भी डाले जाएंगे। ताकि यह चंद्रमा के सतह के जैसा बन सके। चुंबक के सहारे वहां चांद के जैसा ही कम गुरुत्वाकर्षण पैदा किया जाएगा और सारे परीक्षण इसी माहौल में किये जाएंगे।

उनके अनुसार बाहर से इसके गुरुत्वाकर्षण के माहौल को नियंत्रित भी किया जा सकता है। चांद पर अन्य अभियान करने के पहले ही चीन के वैज्ञानिक इसी माहौल में सारा परीक्षण कर उसकी खूबियों और खामियों को देख समझ लेना चाहते हैं।




चांद पर उतरने के दौरान होना वाला इम्पैक्ट कैसा होता है, उसकी जांच तो यहां चंद सेकंड में हो जाएगी। इससे यान पर पड़ने वाले दबाव और उसके असर को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। आवश्यकतानुसार उसमें संशोधन कर लेने के बाद ही वास्तविक चांद पर अभियान प्रारंभ किया जा सकेगा।

चांद के अभियानों की यहां परख हो जाएगी

चीन के वैज्ञानिकों के मुताबिक उनलोगों ने नोबल पुरस्कार विजेता आंद्रे गेइम के सिद्धांत पर यह काम किया है। आंद्रे ब्रिटेन के मैंनचेस्टर विश्वविद्यालय के भौतिकी के वैज्ञानिक हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में इसी सिद्धांत के लिए नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया है।

इस तकनीक में छोटे चुंबकीय क्षेत्र की गुरुत्वाकर्षण के बल को कम करते चले जाते हैं। इसके आधार पर किसी बंद इलाके में पृथ्वी के वास्तविक गुरुत्वाकर्षण को समाप्त कर उसकी मात्रा को बहुत कम किया जा सकता है। ऐसे में वहां रखा जीव भी भार हीन होने की वजह से ऊपर उड़ने लगता है।

पानी की बूंदे भी इसी प्रयोग में ऊपर तैरने लगती हैं। इस प्रयोग को चीन के चेंज 4 और 5 के अभियानों में आजमाया जाएगा। चीन ने पहले ही वर्ष 2029 तक चांद के दक्षिणी ध्रुब में एक रिसर्च स्टेशन स्थापित करने का एलान कर रखा है।



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