चीन अब भी आतंकवाद के मुद्दे पर भारतीय तर्कों के विरोध में

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  • सुरक्षा परिषद में भी मामले की लटकाने की हुई कोशिश

  • एक सप्ताह तक लटका था प्रस्ताव

  • पाकिस्तान चाहता ही नहीं था प्रस्ताव

  • भारत की बातों को प्रस्ताव में जगह मिली

विशेष संवाददाता

नईदिल्लीः चीन का भारत विरोधी रुख अब भी नहीं बदला है।

सुरक्षा परिषद के अंदर के घटनाक्रम यही दर्शाते हैं कि पुलवामा की घटना के बाद

सुरक्षा परिषद में भी प्रस्ताव पारित करने में चीन ने पूरी ताकत लगा दी थी।

चीन की वजह से यह प्रस्ताव एक सप्ताह तक लटका रहा था।

दरअसल चीन इस प्रस्ताव में आतंकवाद के शब्द के उल्लेख पर विरोध कर रहा था।

प्रस्ताव पर कई सुझावों और लोगों के विचार सुनने के बाद अंततः 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों से इस पर सहमति हासिल की गयी।

इसमें यह कहा गया है कि पाकिस्तान से सक्रिय जैश ए मोहम्मद नामक आतंकवादी संगठन ने पुलवामा में इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया है।

इस हमले में सीआरपी के 44 जवान मारे गये थे।

सुरक्षा परिषद में जब इस प्रस्ताव पर विचार प्रारंभ हुआ तो पाकिस्तान यह चाहता ही नहीं था कि कोई प्रस्ताव भी पारित हो।

उसके आग्रह को तो तुरंत ही अनसुना कर दिया गया।

लेकिन चीन के अड़ंगे की वजह से प्रस्ताव एक सप्ताह तक लटका रहा।

वहां से प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद चीन ने बेइजिंग से इस प्रस्ताव पर अपनी राय भी जाहिर कर दी।

जिसमें यह कहा गया है कि दरअसल यह एक सामान्य किस्म का प्रस्ताव है

और इसे पाकिस्तान से सक्रिय आतंकवादी संगठन के खिलाफ कोई फैसला नहीं समझा जाना चाहिए।

सुरक्षा परिषद के 14 अन्य देशों के सहमत होने के बाद भी

चीन पहले तो इसमें अपनी राय के लिए समय मांगता रहा

और जब सभी देश तैयार हो गये तो उसने अपनी तरफ से नये सुझाव पेश कर दिये।

इसमें भी चीन को मुंह की खानी पड़ी और प्रस्ताव में उन्हीं तथ्यों को शामिल किया गया जो भारत द्वारा सुझाये गये थे।

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