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अरुणाचल प्रदेश के पास मैकमोहन लाइन में चीन अपनी ताकत बढ़ा रहा है

  • मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने दी चेतावनी कहा सावधान

  • मैकमोहन लाइन को मानने से इंकार करता है चीन

  • खांडू ने कहा कि यह वर्ष 1962 नहीं 2020 है

  • अब एक कदम भी आगे बढ़े तो ठीक नहीं होगा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा में अपनी गश्ती नौकाओं की

तैनाती बढ़ा दी है। ये इलाका अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा में वास्तविक

नियंत्रण रेखा के पास है। लगातार खबरें आती रही हैं कि चीन नियंत्रण रेखा के पास अपने

सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। भारत-चीन का इस तरह से एकदूसरे से उलझना कोई नई

बात नहीं है। दोनों बार-बार अलग-अलग इलाको में इस तरह के विवादों में उलझ जाते हैं।

इस बीच, इस महत्वपूर्ण क्षण में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि

चीन! आप लोग सावधान हो जाओ। अरुणाचल प्रदेश में अगर एक कदम आगे बढ़े तो

ठीक नहीं होगा। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि अब समय 1962 से

अलग है। राज्य और भारतीय सेना कभी भी पीछे नहीं हटेगी, चाहे कितनी भी बार चीन

इस क्षेत्र पर अपना दावा करने की कोशिश करे। दरअसल, मुख्यमंत्री खांडू 1962 के भारत-

चीन युद्ध में लड़ते हुए शहीद हुए एक सैनिक को सम्मानित करने के लिए अरुणाचल प्रदेश

में भारत-तिब्बत सीमा पर एक पास, बाम ला में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा

कि यह 1962 नहीं बल्कि 2020 है, और चीजें अब अलग हैं। जम्मू और कश्मीर से लेकर

अरुणाचल प्रदेश तक। हम पूरी तरह से तैयार हैं। अगर जरूरी हुआ तो अरुणाचल के लोग

भारतीय सेना के पीछे खड़े होने में संकोच नहीं करेंगे।

अरुणाचल प्रदेश के हिस्से को अपना बताता है चीन

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत के एक हिस्से के रूप में मान्यता देता है, जिसे

भारत द्वारा एकमुश्त खारिज कर दिया गया है। 1962 से पिछले छह दशकों में हुए

बदलावों पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के

विकास को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बड़ा जोर मिला है। उन्होंने कहा कि

सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेष रूप से सड़कों का विकास महत्वपूर्ण है। यह अरुणाचल प्रदेश में पूरी

गति से किया जा रहा है और हम जल्द ही राज्य में इस तरह के कई बदलावों के गवाह

बनेंगे। सूबेदार जोगिंदर सिंह को उनकी 58 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए

मुख्यमंत्री बम ला में थे। उन्होंने सूबेदार सिंह के सर्वोच्च बलिदान को याद किया जिन्होंने

1962 के भारत-चीन युद्ध में चीनी सेना से लड़ने के लिए अपना जीवन लगा दिया था। यहाँ

उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि पश्चिमी सेक्टर में अक्साई चिन पर भारत अपना दावा

करता है, जो फिलहाल चीन के कब्जे में है। भारत के साथ 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने

इस पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया था। चीन कहता है कि ये दक्षिणी तिब्बत का

हिस्सा है। वह मैकमोहन रेखा को भी नहीं मानता। वो कहता है कि 1914 में जब अंग्रेज

भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों ने ये समझौता किया था, तब वो वहां मौजूद नहीं था।

दरअसल, वर्ष 1914 में तिब्बत एक स्वतंत्र पर कमजोर मुल्क था, लेकिन चीन ने तिब्बत

को कभी स्वतंत्र मुल्क नहीं माना। 1950 में चीन ने तिब्बत को पूरी तरह से अपने नियंत्रण

में ले लिया।


 

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