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भारत सरकार का तंत्र चुनाव में उलझा उधर चीन बना रहा है हाईस्पीड ट्रेन लाइन

  • ब्रह्मपुत्र पर बांध का निर्माण और भारत से युद्ध का भय

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी :भारत सरकार का तंत्र वर्तमान में पांच राज्य विधानसभा चुनावों में व्यस्त है।

लेकिन भारतीय दुश्मन देश चीन ने जल्द से जल्द एक ऐसी कनेक्टिविटी तकनीक

विकसित की है जो भारत के लिए खतरनाक होगी। भारत के साथ तनाव के बीच चीन ने

घोषणा की है कि तिब्बत की पहली हाई-स्पीड ट्रेन की सेवा जून महीने के आखिर में शुरू

हो जाएगी। ये ट्रेन तिब्बत की राजधानी लहासा से निंगची तक चलेगी। ये जगह भारत के

अरुणाचल प्रदेश के नजदीक है। इस बात की जानकारी भारतीय सेना तेजपुर के गजराज

वाहिनी द्वारा एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज दी है।

भारतीय सेना गजराज वाहिनी के अधिकारी ने कहा कि चाइना स्टेट रेलवे ग्रुप कंपनी के

अध्यक्ष और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस यानी चीन की संसद के डिप्टी लू डोंग्फू ( ने संसद में

चल रहे वार्षिक सत्र के इतर कहा, 435 किमी लंबे हाई-स्पीड ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण साल

2014 में शुरू हुआ था। यह तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) का पहला इलेक्ट्रिफाइड

रेलमार्ग होगा। जो इसके दो शहरों को जोड़ेगा। ये नया हाई-स्पीड रेल कनेक्शन ( चीन की

एक महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है।योजना के तहत चीन टीएआर में इस तरह की

कनेक्टिविटी का विस्तार कर रहा है, खासतौर पर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के पास।

निंगची भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा से 50 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित

है। चीन ये दावा करता है कि पूरा भारतीय राज्य अरुणाचल दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है।

यही वजह है कि वह निंगची के दूर दराज वाले क्षेत्रों भी तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित

कर रहा है। टीएआर का बाकी का इलाका विदेशी पत्रकारों और राजनयिकों के जाने के लिए

भी अधिक सुगम नहीं माना जाता है।

भारत सरकार का तंत्र हर बार देर से सक्रिय होता है

दूसरी ओर, चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव क्षेत्र में बांध

बनाने की मंजूरी दी है। चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक महत्वपूर्ण बांध का निर्माण

कर रहा है। इसको लेकर भारतीय सेना रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर

चीन द्वारा ये बांध का निर्माण भारत सरकार के लिए खतरा बन सकता है और इसको

लेकर भविष्य में भारत के साथ युद्ध का खतरा है। भारतीय सेना गजराज वाहिनी के

अधिकारी रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने दुनिया की सबसे ऊंची नदी यारलुंग जंग्बो नदी

(ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) पर बांध बनाने की योजना बनाई है जिस कारण उसके भारत

के साथ संघर्ष की संभावना है।

चीन यारलुंग जंग्बो नदी (ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) पर एक मेगा-डैम बनाने की योजना

बना रहा है, जो तिब्बत से होकर बहती है और अंततः भारत में प्रवेश करते ही ब्रह्मपुत्र

नदी बन जाती है।भारतीय सेना गजराज वाहिनी के अधिकारी ने जानकारी दी है कि

बांग्लादेश, जो चीन के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रखता है उसने भी यारलुंग जंग्बो नदी

(ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) पर डैम का विरोध किया है।

हालाँकि,गंगा नदी को खिलाने वाले ब्रह्मपुत्र और उसके ग्लेशियर दोनों ही चीन से आते हैं।

नदी के ऊपर के क्षेत्र में चीन की एक लाभकारी स्थिति है और इस कारण वह पानी के

बहाव को जानबूझकर रोकने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकता है। ब्रह्मपुत्र

(जिसे चीन में यारलुंग ज़ंगबो कहा जाता है) के साथ चीन की बांध-निर्माण और जल

विभाजन की योजना दोनों पड़ोसियों के बीच तनाव का एक स्रोत है।

चीन का कई अन्य पड़ोसियों के साथ भी अच्छा रिश्ता नहीं

केवल भारत सरकार ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देश भी चीन के बहाव

प्रभावित पड़ोसियों के साथ परामर्श की कमी के कारण प्रभावित हैं और उनके साथ विवाद

छिड़ गया है।तिब्बती कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीन को वर्ष

के भीतर निर्माण शुरू करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इस बीच, भारत में यह आशंका

अधिक है कि चीनी परियोजनाएं ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव को बाधित कर सकती हैं और यहां

तक कि बाढ़ भी आ सकती है। भारत ने ऊपरी और मध्य पहुंच पर चार नियोजित बांधों पर

चीन को चिंता व्यक्त की है।

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