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चीन और अमेरिका में कोरोना के ईलाज के लिए दवा सामने आयी

  • जापान ने वर्ष 2014 में इस दवा को मान्यता दी थी

  • थोक उत्पादन और गहन परीक्षण की तैयारी

  • क्लीनिकल ट्रायल में अत्यधिक लाभ

  • अब तक कोई प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चीन और अमेरिका के चिकित्सकों को एक खास किस्म की दवा से कोरोना

वायरस के मरीजों का ईलाज करने में फायदा हुआ है। पिछले तीन महीने से इस विषाणु के

संक्रमण की चुनौतियों से जूझते चीन में फ्लाविपिराविर नामक दवा से फायदा होने की

खबर है। इसी प्रजाति की एक अन्य दवा को रेमडेसिवीर को अमेरिका में आजमाया गया

है। इससे फायदा होने के बाद अब दुनिया में अन्य स्थानों पर भी इस दवा के इस्तेमाल

और बेहतर परीक्षण का काम तेज कर दिया गया है।

चीन से आयी सूचनाओं के मुताबिक कोविड 19 से पीड़ित मरीजों के मामले में

फ्लाविपिराविर नामक दवा के बेहतर परिणाम निकल रहे हैं। इसकी पुष्टि चीन के

अधिकारियों ने कर दी है। यह एंटीवायरल दवा है और जापान में इसे इंफ्लूयेंजा के ईलाज

के लिए वर्ष 2014 में ही मान्यता दी गयी है। चीन में इस दवा का कोई प्रतिकूल प्रभाव भी

सामने आता हुआ अब तक नजर नहीं आया है। क्लीनिकल ट्रायल में यह बेहतर दवा के

तौर पर स्थापित हुआ है। वैसे चीन के राष्ट्रीय बॉयोटेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर के

निदेशक झांग जिनमिन ने कहा है कि अब तक कोरोना से निपटने के लिए कोई स्थायी

उपचार विधि तैयार नहीं की गयी है। लेकिन जिस दवा से अधिक फायदा हो रहा है, उसका

उल्लेख करना समय की मांग है।

चीन और अमेरिका ने कहा अभी और जांच होगी

उन्होंने साफ किया कि कोविड 19 के अलावा एचआइवी और ईवोला वायरस से ईलाज के

लिए भी कोई स्थायी उपचार विधि नहीं बनी है। यह सब कुछ मरीज की स्थिति और उसमें

होने वाले बदलावों के आधार पर किया जाता है। वैसे चीन के लिए राहत की बात यह है कि

अब वहां इस संक्रामक रोग का प्रसार घटने लगा है। इस रोग के फैलने के मुख्य शहर

वुहान में भी सोमवार को मात्र चंद लोग ही इसकी शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। यहां

पिछले वर्ष के दिसंबर माह में कोरोना की पहली शिकायत आयी थी। उसके बाद अचानक

से इस शहर के साथ साथ पूरे चीन में कोहराम मच गया था।

चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के मुताबिक मंगलवार को सिर्फ 21 नये मामले आये हैं

जबकि चीन में 13 लोगों की मौत की खबर है। पूरे देश में कोरोना से पीड़ित रोगियों की

कुल संख्या 80 हजार से ऊपर चली गयी है। इनमें वे 3226 लोग शामिल हैं, जिनकी इस

बीमारी से मौत हो गयी है। अस्पतालों में अब भी 8976 लोगों का ईलाज चल रहा है। शेष

सभी को अस्पतालों से छोड़ दिया गया है।

इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल के बारे में चीन के अधिकारियों ने बताया प्रारंभिक तौर पर

80 लोगों को इस परीक्षण के दायरे में लाया गया है। इनमें से 35 को यह दवा यानी

फ्लाविपिराविर दी गयी थी जबकि शेष 45 अन्य चिकित्सा पद्धति के अधीन रहे थे।

क्लीनिकल ट्रायल में जल्दी ठीक हुए हैं मरीज

फ्लाविपिराविर दवा के इस्तेमाल से मरीजों के ठीक होने की अवधि कम हो गयी। इसके

बाद ही इस दवा को कोरोना वायरस के ईलाज के लिए अन्यतम कारगर दवा के तौर पर

स्वीकारा गया है। चीन के मुताबिक इस बीमारी से पीड़ित अन्य लोगों पर भी यह दवा

आजमायी गयी है और सभी में बेहतर परिणाम सामने आये हैं। जिसके आधार पर अब

कोरोना वायरस के ईलाज में इस दवा फ्लाविपिराविर को शामिल करने की अनुशंसा शीघ्र

ही की जा सकती है। चीन की इस कंपनी को इस दवा के व्यापक उत्पादन के निर्देश दिये

गये हैं। ताकि पूरे देश में इस दवा की समुचित और पर्याप्त आपूर्ति की जा सके। इसके

साथ ही चीन की सरकार सियटल एवं वाशिंगटन में तैयार हो रहे कोविड 19 के वैक्सिन को

लाने की भी तैयारियों में जुटी हुई है। इसमें से कुछ का तो शायद चीन में ही क्लीनिकल

ट्रायल भी होना है। चीन के वैज्ञानिक देश में भी इस बीमारी से बचने के लिए प्रतिरोधक

टीका विकसित करने के लिए पांच अलग अलग तरीकों से काम कर रहे हैं।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने अपने ईलाज की पुष्टि की

दूसरी तरफ अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डेविस मेडिकल सेंटर ने इस

बात की पुष्टि की है कि उन्हें एक महिला मरीज के ईलाज में रेमडेसिवीर नामक दवा से

फायदा हुआ है। लेकिन वैज्ञानिक इसकी गहन जांच में जुटे हुए हैं। जिस महिला का ईलाज

किया गया है, उसका नाम गुप्त रखा गया है। वैसे जांच की आवश्यकता इसलिए अधिक

महसूस की गयी है क्योंकि कोरोना से पीड़ित इस महिला ने न तो विदेश गयी थी और न ही

किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आयी थी जो विदेश से यह संक्रमण लेकर लौटा हो। ईलाज

के बाद डाक्टरों ने सिर्फ यह कहा है कि महिला की हालत इतनी बिगड़ी हुई थी कि डाक्टरों

को ऐसा लगने लगा था कि वह नहीं बच पायेगी। लेकिन प्रयोग के तौर पर जब यह दवा

आजमायी गयी तो महिला को त्वरित फायदा हुआ है। इस दवा का चीन में भी अभी

क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। वैज्ञानिक यह बताते हैं कि यह दवा एक एंजाइम आधारित

दवा है। इसका मुख्य काम कई वायरसों के अपने विकास की क्षमता को ही रोक देना है।

वायरसों में आरएनए पोलिरेस को रोके जाने से वायरस अपनी वंशवृद्धि नहीं कर पाता है।

पहले भी इसका प्रयोग हो चुका है लेकिन कांगो में ईबोला की रोकथाम में यह दवा काम

नहीं कर पायी थी। इस वजह से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के पहले वैज्ञानिक इसकी गहन

छानबीन और प्रतिकूल प्रभावों को जांच लेना चाहते हैं।


 

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