Press "Enter" to skip to content

चिंपाजी या उस प्रजाति के दूसरे प्राणी पहले पेड़ों पर ही रहा करते थे




इंसान के पूर्वज शायद उल्कापिंड के डर से नीचे आये थे
उल्कापिंड गिरने से समाप्त हो गये थे डायनासोर
जमीन पर तेजी से भागते हुए जान बचायी थी
अब भी पेड़ों पर चढ़ने का जेनेटिक गुण मौजूद
राष्ट्रीय खबर

रांचीः चिंपाजी भी इंसानों के पूर्वज माने जाते हैं। जेनेटिक आधार पर यह बात विज्ञान के स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है। अब यह जांचा गया है कि इंसानों के पूर्वज आखिर किस वजह से पेड़ों पर रहने के बदले जमीन पर उतर आये।




इसका एक कारण यह मिला है कि उल्कापिंड के पतन से फैली आग से डरने वाली इस काल की प्रजातियों ने जमीन पर उतरकर भागते हुए अपनी जान बचाने को ज्यादा श्रेयस्कर माना था।

वीडियो में देखिये  कैसे खत्म हुए थे डायनासोर

इसी वजह से जब इंसान के पूर्वज जमीन पर चलने लगे तो क्रमिक विकास के दौर में इंसानों की प्राचीन प्रजाति गुफा में और बाद मे समूह बनाकर रहना सीख गयी। इधर वर्तमान में भी हम यह देख सकते हैं कि चिंपाजी को पेड़ पर चढ़ने की पूरी सुविधा है।

वह खास तौर पर कुछ खास प्रजाति के बंदरों के शिकार के दौरान पेड़ों पर तेज गति से चढ़कर हमला करता है। फिर भी वे अपने जीवन का अधिकांश समय अब जमीन पर ही गुजारते हैं और वे समूह में ही रहना पसंद करते हैं। यह इंसानों के जैसा सामुदायिक आचरण है।

दूसरी तरफ जब पेड़ पर चढ़कर चिंपाजी शिकार करते हैं तब भी वे समूह में चारों तरफ से अपने शिकार के घेरकर ही उसका शिकार करते हैं।

प्राचीन इतिहास बताता है कि जब विशाल उल्कापिंड के गिरने से डायनासोर की प्रजाति ही विलुप्त हो गयी थी तभी से अन्य जीवों को आसमान से गुजरते आग जैसी किसी भी चीज को देखकर एक भय स्थायी तौर पर व्याप्त हो गया था।

अपने स्वाभाविक गुणों से अन्य प्रजातियों ने यह भी देखा था कि आसमान पर उड़ने वाली पक्षियों को भी आग की लपट से नुकसान हुआ था। करीब 66 मिलियन वर्ष पहले की यह घटना है।

चिंपाजी ने डायनासोरों को खत्म होते देखा था

इस प्राचीन काल में जो जीव पेड़ों पर रहा करते थे, उन्होंने भी जंगलों में लगने वाली भीषण आग को देखा था। लेकिन वे किसी तरह बचने के दौरान जमीन पर उतरकर भागने लगे थे।

अनेक प्रजातियां इसी तरीके से आग से बच निकलने में कामयाब हुई थी। प्राचीन काल की जो प्रजातियां क्रमिक विकास के दौर में अब भी बदले स्वरुप में मौजूद हैं, उन पर भी यह अनुसंधान किया गया है।




इस बात को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने एक कंप्यूटर मॉडल भी तैयार किया है। जिससे यह पता चला है कि जमीन पर डायनासोर का खतरा कम होने के बाद पेड़ों पर रहने वाली प्रजातियों ने जमीन पर खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस किया।

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों ने यह शोध किया है। जिसमें हर किस्म के आंकड़ों को शामिल करने के बाद ही उसका यह निष्कर्ष निकाला गया है कि इंसानों के पूर्वज चिंपाजी या दूसरे प्राणी पेड़ों के बदले उसके बाद धीरे धीरे जमीन पर ही रहने पसंद करने लगे थे।

बाद में क्रमिक विकास के दौर में यह उनकी आदत में शामिल हो गया। लेकिन अपनी शारीरिक बनावट और विशेषता की वजह से वे अब भी कुशलता के साथ पेड़ों पर चढ़ सकते हैं। कई बार वे शौक के तौर पर पेड़ों पर आराम भी करने पाये जाते हैं।

इस शोध दल के नेता प्रोफसर डोनाथन ह्यूज्स ने कहा कि यह क्रमिक विकास के दौर में उस दौर के चिंपाजी जैसे इंसानों की पूर्वजों के विकास का एक और दौर था। इस अभ्यास के बदल जाने की वजह इन प्रजातियों में भी बदलाव होते चले गये, जो जेनेटिक तौर पर स्थायी हो गये।

पेड़ से जमीन पर उतरे तो जेनेटिक बदलाव भी हुए

बता दें कि पृथ्वी पर मैमल प्रजाति के जीव सबसे पहले करीब तीन सौ मिलियन वर्ष पहले आये थे और बाद में वे कई तरीकों से विकसित हुए और इससे अलग अलग प्रजातियां बनती चली गयी।

जो प्रजातियां उल्कापिंड के गिरने से विलुप्त हो गयी, उनके नहीं होने की वजह से जमीन पर दूसरे प्राणियों के लिए रहना अधिक सुरक्षित हो गया था।

चिंपाजी या उसके जैसे अन्य जीव तब पानी के करीब जमीन पर रहना अधिक पसंद करने लगे और जरूरत पड़ने पर वे पेड़ों पर चढ़ने के गुण से संपन्न भी रहे।

कंप्यूटर मॉडल से उनकी सभी प्रजातियों के हर विवरण को दर्ज करने के बाद ही निष्कर्ष निकाला गया है।

इस शोध में यूनिवर्सिटी ऑफ कैंम्ब्रिज के डेनियर फील्ड, येल यूनिवर्सिटी के एरिक सारगिस और ब्रूकलिन कॉलेज के सहायक प्रोफसर स्टीफेन चेस्टर ने भी शोध के जरूरी आंकड़े एकत्रित करने में सहयोग किया है। जिसके बाद ही चिंपाजी के पेड़ से जमीन पऱ आने का यह निष्कर्ष निकाला गया है।



More from इतिहासMore posts in इतिहास »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »

Be First to Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.
%d bloggers like this: