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चिली में सबसे कम उम्र के वामपंथी नेता राष्ट्रपति निर्वाचित




सेंटियागोः चिली में सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति के तौर पर गैब्रियल बोरिक चुने गये हैं। वह वामपंथी रूझान के नेता है। इस वजह से भी देश में अब दक्षिणपंथी विचार धारा को जबर्दस्त झटका लगा है। दूसरी तरफ दुनिया भर के वामपंथी दल धीरे धीरे फिर से वामपंथ के मुख्य धारा का राजनीति में वापस लौटने से उत्साहित हैं।




छात्र राजनीति से मुख्य धारा की राजनीति में कदम रखने वाले बोरिक 35 साल की उम्र में देश के राष्ट्रपति बनने वाले प्रथम व्यक्ति भी बन गये हैं। वह दुनिया में भी नया रिकार्ड कायम करने में कामयाब हुए हैं क्योंकि इतनी कम उम्र में कोई भी युवा देश का राष्ट्रपति इससे पहले नहीं बन पाया था।

रविवार को हुए मतदान में उन्होंने अपने विरोधी जोसे अंटोनियो कास्त को पराजित किया है। बोरिक को 56 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि उनके प्रतिद्वंद्वि को 44 प्रतिशत वोट मिले हैं। उल्लेखनीय है कि 1990 में चिली में लोकतंत्र स्थापित होने के बाद से ही देश में दक्षिण पंथी विचार धारा काफी मजबूत हो गयी थी।

देश की राजनीति के सारे फैसले इसी दक्षिणपंथी विचारधारा से संचालित होने लगे थे। उस दौरान देश की वामपंथी राजनीति को हाशिये पर समझा जाने लगा था। बावजूद इसके वामपंथियों ने विभिन्न मुद्दों पर अपना आंदोलन लगातार जारी रखा था। इन्हीं आंदोलनों की वजह से वे धीरे धीरे जनता का भरोसा पाने में कामयाब रहे।




दूसरी तरफ दक्षिणपंथी विचारधारा का जोरदार तरीके से समर्थन करने के बाद भी जब देश की जनता को कुछ भला होता हुआ नजर नहीं आया तो वे इससे विमुख होते चले गये। इस बीच वर्ष 2012 में देश में आर्थिक भेदभाव के खिलाफ भी जोरदार आंदोलन हुआ था।

चिली में पहले दक्षिणपंथ का ही बोलबाला था

इस आंदोलन में आगे आने वाली वामपंथी विचारधारा को जनता ने पसंद भी किया था। चुनाव करीब आने के दौरान इसे वामपंथ वनाम फासीवाद की संज्ञा दी गयी थी। इसी वजह से पुरानी तकनीक पर चल रहे दक्षिणपंथी दल जनता का भरोसा खोने लगे थे।

नवंबर के बीचोंबीच जब प्रथम दौर का मतदान हुआ तो उसमें कांग्रेस एवं स्थानीय परिषद के सदस्यों का चुनाव किया गया। कांग्रेस के सदस्य कास्त दक्षिणपंथी और बोरिक वामपंथी विचारधारा के समर्थक के तौर पर राष्ट्रपति के चुनाव में आमने सामने आ गये थे। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहने वाले बोरिस ने इस निर्णायक मतदान में अपने पक्ष में अधिक वोट हासिल कर राष्ट्रपति बनने का अवसर पाया है।



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