चीन का अंतरिक्ष यान चांद पर शून्य से 190 डिग्री नीचे बचा रहा

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  • चांद की एक रात चौदह दिन की

  • इस छोर का तापमान दूसरे से कम

  • जमीन की सतह में भी ठंड से बदलाव

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चीन द्वारा चंद्रमा पर भेजा गया यान अत्यधिक ठंड के बाद भी सकुशल है।

चेंज 4 नामक यह यान वहां की रात में शून्य से 190 डिग्री नीचे तक का तापमान महसूस कर चुका है।

बाद में सूरज की रोशनी निकलने के बाद जब उसके हालात का जायजा लिया गया

तो यह पता चला कि चांद में रात के अंधेरे में तापमान इतनी नीचे पहुंच जाता है।

वैसे इस संयंत्र में पहले से ही अत्यधिक गरमी और सर्दी से बचाव के उपाय किये गये हैं।

इसके तहत अधिक गर्म होने पर भी वह खुद ब खुद सुप्तावस्था में चला जाता है।

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बाद में तापमान सही होने के बाद वह फिर से काम करने लगता है

अथवा उसे यहां के नियंत्रण कक्ष से संदेश भेजकर जगाया जाता है।

वैज्ञानिकों को पहले से ही इस बात का अनुमान था कि रात के अंधेरे में चांद का तापमान काफी नीचे चला जाता है।

लेकिन यह शून्य से 190 डिग्री तक जाता है, इसकी उम्मीद वैज्ञानिकों को नहीं थी।

अब चेंज 4 से मिले आंकड़ों के आधार पर इस बात की जानकारी मिली है।

मालूम रहे कि चीन ने चांद के उस छोर पर अपना यान उतारा है, जिसे हम पृथ्वी की तरफ से देख नहीं पाते हैं।

यह अत्यंत पथरीला और उबड़खाबड़ इलाका है।

यान ने उतरने के तुरंत बाद जो पहली तस्वीर भेजी थी, उसमें यान के सामने एक विशाल गड्डा नजर आ रहा था।

गत तीन जनवरी को चांद पर सकुशल उतरने के बाद भी यान लगातार काम कर रहा था।

इस यान में रखे एक विशेष कैप्सूल में जो बीज और कीट पतंग भेज गये थे।

उनमें से सिर्फ कपास के बीज ही प्रस्फूटित हुए थे लेकिन वह भी कड़ाके की ठंड में बच नहीं पाये।

उसके बाद चांद में सौर रात का दौर चालू हो गया था।

चांद का यह सौर रात्रि पृथ्वी के चौदह दिनों के बराबर होता है।

चांद की एक रात पृथ्वी के 14 दिन के बराबर

इसी दौरान वहां अत्यधिकम कम तापमान होने का यह आंकड़ा दर्ज किया गया है।

नासा के वैज्ञानिकों ने बताया कि अत्यधिक ठंड की वजह से यान सुप्तावस्था में चला गया था।

जब दोबारा सूर्य की रोशनी लौटी तो यान पिछले बुधवार को रात करीब साढ़े आठ बजे चालू हुआ।

इस यान के साथ भेजे गये रोवर यान, जिसे यूटू-2 या जेड रैबिट-2 नाम दिया गया है,

भी मंगलवार को चालू हो गया था।

इससे पता चल गया कि दोनों उपकरण कड़ाके की ठंड को झेलने में सक्षम रहे हैं।

इस नई जानकारी से यह भी पता चल गया है कि चांद की सतह पर अलग अलग छोर पर तापमान अलग अलग होते हैं।

अमेरिकी यान अपोलो को जब चांद पर भेजा गया था तो वह जिस स्थान पर उतरा था, वहां का तापमान इससे बेहतर था।

चीन की स्पेस एजेंसी सीएएसटी के कार्यकारी निदेशक झांग हे ने कहा कि दरअसल चांद का एक भाग हमेशा ही पृथ्वी की तरफ होता है।

इस भाग का तापमान हमेशा ही चांद के दूसरे भाग से अधिक रहता है क्योंकि यहां पृथ्वी से टकराकर भी सूर्य की किरणें चांद की सतह तक पहुंचती रहती है।

उनके मुताबिक शायद चांद की धरती पर भी इसी वजह से जमीन भी अलग अलग किस्म की बन गयी है।

लिहाजा चांद पर आगे की परीक्षण काफी सावधानी से किये जाने होंगे।

चीन का चेंज 3 अब भी सकुशल काम कर रहा है

इससे पहले भी चीन ने चेंज 3 को चांद पर भेजा था।

वर्ष 2013 में भेजा गये इस यान के उपकरण साठ चंद्र रात्रि झेल लेने के बाद भी काम कर रहे हैं।

फिर भी वैज्ञानिकों को पहली बार चांद के अंधेरे में तापमान के इतना कम होने की जानकारी पहली बार मिल पायी है।

पहले वाले यान में तापमान दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया था।

वैसे दोनों ही यानों को ठंड से बचने के लिए रेडियोआइसोटोप उपलब्ध कराया गया था,

जो अत्यधिक ठंड में अंदर के उपकरणों का बचाव कर लेते हैं।

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