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चीन के रोवर यूटू 2 ने चांद के अंदर खोजा जेल जैसा चिपचिपा पदार्थ




  • चांद के रहस्यों पर से अब धीरे धीरे उठ रहा है पर्दा
  • पदार्थ दरअसल क्या है, इसकी कोई पुष्टि नहीं
  • रोवर वहां के गड्डों से नमूने इकट्ठा कर रहा है
  • चीनी चंद्रयान के द्वारा कई और प्रयोग भी होंगे
प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः चीन के रोवर यूटू-2 ने चांद के अंदर चिपचिपे पदार्थ की खोज की है।

यह जेलनूमा पदार्थ है लेकिन यह दरअसल क्या है, अब तक इसका पता नहीं चल पाया है।

चीन के चंद्रयान चेंज 4 के साथ ही यह रोवर यूटू 2 भेजा गया था।

इसी रोवर ने अपने खोज-बीन के क्रम में चांद के एक गड्डे के भीतर से इस पदार्थ की खोज की है।

चांद के दूसरी तरफ उतरने वाले इस चीनी महाकाश यान ने पहले ही कई अनुसंधान किये हैं।

अब उसका यह रोवर लगातार वहां के बारे मे जानकारियां एकत्रित कर रहा है।

वैसे वहां जेल के जैसा पदार्थ पाया जाना अब तक की सबसे बड़ी खोज है क्योंकि अब तक चांद पर किसी ऐसे पदार्थ के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी थी।

इस बात की जानकारी देते हुए यह बताया गया है कि इसका पता चंद्र दिवस आठ पर चला था।

जान लें कि यह चंद्र दिवस पृथ्वी के दो सप्ताह के बराबर का होता है।

चंद्रमा पर यह दिवस गत 25 जुलाई को प्रारंभ हुआ था।

इस चिपचिपे पदार्थ का पता चलने के बाद अब इसके बारे में और जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि यह आखिर क्या है।

चंद्रमा के गहरे गड्डे के अंदर ऐसा पदार्थ क्यों हैं, यह भी अब तक अजूबा ही बना हुआ है।

आम तौर पर चांद के मौसम और तापमान के मुताबिक वहां ऐसे किसी चिपचिपे पदार्थ की होना की कोई उम्मीद नहीं की गयी है।

वहां के अत्यधिक ठंड के बीच भी अगर कोई पदार्थ जमी हुई अवस्था में नहीं है

तो इसके प्रति वैज्ञानिकों की रूचि का बढ़ना भी स्वाभाविक है।

चीन के रोवर ने वहां अपनी जांच का काम जारी रखा है

चीन के इस चंद्रमा अभियान के तहत यह रोवर अभी गड्डों की जांच परख कर रहा है।

इसी क्रम में पहली बार किसी नये तथ्य का पता चला है।

दरअसल चीनी वैज्ञानिकों ने इस रोवर यान की तमाम गतिविधियों का विवरण दर्ज करने के लिए उसमें एक वैज्ञानिक डायरी लगा रखी है।

उसमें दर्ज होने वाली हर सूचना का यहां नियंत्रण कक्ष के वैज्ञानिक नियमित विश्लेषण भी करते जा रहे हैं।

अब तक इस जेल के बार में कोई और जानकारी नहीं होने के बाद भी चीन सहित पूरी दुनिया के

वैज्ञानिकों के मन में इसके प्रति अनेक नये सवाल खड़े हो गये हैं

क्योंकि किसी ऐसे पदार्थ के वहां होने की उम्मीद भी नहीं की गयी थी।

कुछ लोगों का अनुमान है कि वहां लगातार गिरने वाले उल्कापिंडों की टक्कर से आसमान में तैयार होने वाले शीशे का यह पिघला हुआ स्वरुप हो सकता है।

लेकिन वहां के शीशा पिघले हुए अवस्था में क्यों है, इस बारे में भी कोई विज्ञान सम्मत तर्क अब तक सामने नहीं आये हैं।

वैसे चीन के वैज्ञानिकों ने इस बारे में अब तक किसी भी बात की पुष्टि नहीं की है।

चीन के इस यान चेंज 4 के चांद के दूसरे छोर पर उतरने के बाद वहां कपास के फूल उगाने में सफलता पायी थी।

लेकिन वहां के कड़ाके की ठंड में कपास के पौधे जल्द ही मर गये।

इसके बाद से इस यान की मदद से वहां के कई क्रेटरों का पता लगाया गया है।

इनमें से साउथ पोल एइटकेन (एसपीए) भी है, जिसे इस पूरे सौर जगत का सबसे बड़ा क्रेटर माना गया है।

सौर मंडल के सबसे बड़े गड्डे की जांच की है चीनी यान ने




यान का रोवर यूटू 2 वहां से लगातार नमूने एकत्रित करता जा रहा है।

दरअसल इन नमूनों के विश्लेषण के माध्यम से चीन के वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि इस का निर्माण किन परिस्थितियों में और कैसे हुआ था।

वहां के गड्डों में कम मात्रा वाले कैल्सियम के आर्थो पाइरोक्सीन और ओलेवाइन पाये गये हैं।

यह दो पदार्थ की पृथ्वी के निर्माण के दौरान ऊपरी सतह पर पाये जाते हैं।

पौधों को विकसित करने का प्रारंभिक प्रयोग विफल होने के बाद भी चीन का यह यान पौधे के जन्म और विकास पर और प्रयोग करने वाला है।

साथ ही वहां से रेडियो एस्ट्रोनॉमी के लिए भी कुछ अनुसंधान इस यान की मदद से किये जाने वाले हैं।

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