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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सत्र समाप्त होते ही अपने काम में जुट गये हैं

  • धरातल पर ठोस काम चाहते हैं सुशासन बाबू

  • रेलवे ट्रैक पर मिले बम, सोना लूट में पुलिस के हाथ खाली

  • लापरवाही से जमानत पर रिहा हो गये अनेक बड़े अपराधी

  • अपने विश्वासी अधिकारियों से जांच करा सकते हैं मुख्यमंत्री

दीपक नौरंगी

भागलपुरः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा सत्र समाप्त होते ही आज गुरुवार के दिन

सभी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से

समीक्षा बैठक करेंगे।

वीडियो में जानिये यह बैठक क्यों है

बिहार के सभी आईएएस और आईपीएस अधिकारी लगातार तीन दिनों से माननीय

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समीक्षा बैठक को लेकर सभी अधिकारियों के द्वारा कई

महत्वपूर्ण तैयारी की गई है। सच्चाई पर विश्वास कीजिए तो बिहार के मुख्यमंत्री को

आईएएस और आईपीएस अधिकारी फाइल और कागजी कार्रवाई में सब कुछ ठीक-ठाक

मिलेगा लेकिन क्या धरातल में यह सब काम सही ढंग से हो पा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री

को अपने अधीनस्थ विश्वासी अधिकारियों के माध्यम से जांच कराएंगे तो बहुत कुछ दूध

का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा। बिहार के पहले अति संवेदनशील जिले

भागलपुर में जहां नाथनगर स्टेशन के रेलवे ट्रैक पर बम बरामद हुआ एक महीने से भी

अधिक हो गए हैं, पुलिस का पूरा अनुसंधान कहां तक गया और अभी तक पुलिस क्यों नहीं

मालूम कर पाई कि बम रेलवे ट्रैक पर किसने रखा था। भले ही इसकी जांच बिहार की

एटीएस की टीम कर रही हो लेकिन क्या बिहार पुलिस के सिस्टम पर कहीं ना कहीं सवाल

उठना लाजमी है। ऐसी स्थिति में भागलपुर में 6 फरवरी को सोना लूट की घटना हुई थी।

भागलपुर जिला जब से बना है इतनी बड़ी लूट की घटना कभी नहीं हुई और इस मामले में

पुलिस के हाथ क्यों खाली है, ऐसे सवालों के बीच आज बिहार के मुख्यमंत्री की समीक्षा

बैठक होगी। बिहार के मुख्यमंत्री के द्वारा विधि व्यवस्था को लेकर बार-बार समीक्षा की

जाती है बहुत तरह के दिशा निर्देश दिए जाते हैं ऐसा प्रतीत होता है कि उनके दिए गए

निर्देशों का अनुपालन गंभीरता पूर्वक नहीं किया जा रहा है। कुछ दिन पहले पटना जिला में

कुख्यात अपराधी कर्मी रवि गोप को एसटीएफ टीम के द्वारा गिरफ्तार कर संबंधित थाने

को दिया था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को असलियत क्या है यह समझना होगा

संबंधित थाने द्वारा उसे न्यायालय में भेजा गया। उस पर पहले भी कई गंभीर मामले थे

लेकिन थाने के द्वारा उक्त अपराधी को रिमांड करने से पहले न्यायालय के द्वारा रवि

गोप जमानत पर बाहर आ गया। इस बात को लेकर काफी पुलिस विभाग में काफी हल्ला

मचा। इसके बाद एक जांच टीम गठित हुई संबंधित जेल कर्मियों पर कार्रवाई की गई।

मंगलवार को रवि गोप ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। अब यह दूसरी घटना

भागलपुर नवगछिया पुलिस जिला की है। एसटीएफ टीम के द्वारा नवगछिया पुलिस

जिला में गिरफ्तार इनामी अपराधी शबनम यादव और एसटीएफ टीम में मुठभेड़ हुई।

जिसमें शबनम यादव और उनके दो साथी गिरफ्तार हुए लेकिन नवगछिया जिला पुलिस

के वरीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण इनामी अपराधी शबनम यादव को

न्यायालय से जमानत मिल गई और वह बाहर आ गया। इनामी अपराधी शबनम यादव

पर कुल 14 गंभीर मामले पहले से थे लेकिन नवगछिया पुलिस की लापरवाही ऐसी किसी

भी मामले में उसे रिमांड नहीं किया। इससे बड़ी लापरवाही और क्या हो सकती है।आखिर

पुलिस विभाग के द्वारा ऐसी गंभीर गलतियां बार-बार क्यों होती है और इसके लिए

अनुसंधानकर्ता ही क्यों जिम्मेदार है। ऐसे केस के सुपरविजन और समीक्षा करने वाले

सीनियर पुलिस अधिकारी दोषी क्यों नहीं माने जाएंगे। हर गंभीर मामलों में नियम के

तहत 15 दिनों में समीक्षा रिपोर्ट देनी है। संबंधित थाने को गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण

सूचना उपलब्ध कराया जाना है लेकिन इस संबंध में अंग्रेजों के समय कानून बना हुआ है।

इसका अनुपालन वरीय अधिकारियों के स्तर से नहीं किया जा रहा है। किसी भी अपराध

कर्मी की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की सूचना समय अनुसंधानकर्ता को उपलब्ध कराई

जाए, इसके लिए बिहार के पराया सभी जिले के पुलिस के वरीय अधिकारी गंभीर नहीं है।

सीएम के बार बार निर्देश के बाद भी गंभीर नहीं हैं कई अफसर

यदि बिहार के नक्सल प्रभावित जिले में जितने भी नक्सल जेल के सलाखों के पीछे गए थे

उनकी जमानत कैसे हुई और उनको कितने केस में रिमांड पर लिया गया या नहीं लिया

गया, इसकी जांच बिहार के मुख्यमंत्री अपने स्तर से जांच कराएंगे तो कार्रवाई की जद में

कई बड़े पुलिस अधिकारी आ सकते हैं। क्योंकि नक्सल के गंभीर मामलों के

अनुसंधानकर्ता डीएसपी रैंक के अधिकारी होते हैं। महत्वपूर्ण त्यौहार होली और पंचायत

चुनाव नजदीक है। ऐसे में लापरवाह प्रशासनिक पर पुलिस अधिकारी को चिन्हित कर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अब कार्रवाई करनी चाहिए।

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