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मूलभूत सुविधाओं पर राज्य के मुखिया का ध्यान

मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने की अपनी सोच को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फिर से

दोहराया है। अपने आवास पर नियमित तौर पर राज्य के कोने कोने से आये लोगों से

मिलने और उनकी समस्याओं पर गौर करने का यह क्रम वर्तमान मुख्यमंत्री ने अच्छी

तरह चालू रखा है। यह अपने आप में एक अच्छी बात है। ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री के

मिलने से सारी समस्याओं का त्वरित समाधान हो जाता है। लेकिन कई मामलों में ऐसा

देखा गया है कि जिन मुद्दों पर हेमंत सोरेन ने प्राथमिकता के आधार पर ध्यान दिया है,

उनपर प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई भी हुई है। इसके बेहतर उदाहरण देवघर जिला

है। हेमंत सोरेन के हर ट्विट पर देवघर की उपायुक्त नैंसी सहाय ने न सिर्फ सूचना पाने

को स्वीकार किया है बल्कि काम पूरा होने पर उसी ट्विटर हैंडल पर काम पूरा होने की

सूचना भी दी है। इससे सरकार के प्रति आम जनता का भरोसा बढ़ता है, यही सबसे बड़ी

उपलब्ध है इस वर्तमान सरकार के लिए। अपने आवास पर नियमित तौर पर लोगों से

मिलने के क्रम हेमन्त सोरेन ने कहा कि स्वास्थ्य चिकित्सा सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

की व्यवस्था, पानी, बिजली सड़क इत्यादि मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा

में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान

में रखना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। युवा वर्ग के लिए रोजगार सृजन का प्रयास

शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार हर

संभव इमानदार कोशिशें करेगी। लोगों की बात राज्य का मुखिया ध्यान से सुन ले और

यथासंभव त्वरित कार्रवाई का निर्देश भी दें, इससे ज्यादा आम जनता को कुछ चाहिए भी

नहीं।

मूलभूत सुविधाओं में शीर्ष पर रहे भूखे को भोजन

इस क्रम में हेमंत सोरेन को कमसे कम यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अगले पांच

वर्षों में कमसे कम किसी इलाके में किसी की भी भूख से मौत नहीं हो। इसके लिए पहले से

ही कई प्रावधान हैं। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती की वजह से इन प्रावधानों पर नियमित तौर

पर ध्यान ही नहीं दिया जाता। इसके लिए हेमंत सोरेन चाहे तो राज्य के मुखिया लोगों की

एक प्रमंडल वार बैठक बुलाकर उन्हें भूख से मौत रोकने के लिए किये गये उपायों पर

सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर काम करने का निर्देश दे सकते हैं। गांव के गरीब को यह

जानकारी भी होनी चाहिए कि सरकार ऐसी विषम परिस्थिति के लिए आक्समिक

तैयारियां रखती है। अभी तो जानकारी के अभाव में भी लोग अपनी भूख मिटाने के लिए

अन्यत्र प्रयास करते हैं। कई बार इसी क्रम में वे महाजनी जाल में भी फंस जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने हरमू के दिव्यांग अर्जुन महतो का राशन कार्ड अविलम्ब बनाने का निर्देश

दिया है। इस पर यह बात फिर से चर्चा में आ जाती है कि पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा

द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर राशन कार्ड रद्द करने का फैसला लिया गया था।

पूर्व सरकार का उन्हें वरदहस्त प्राप्त था। इसलिए इतनी बड़ी गलती होने के बाद भी उनके

खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वरना किसी राज्य के मुख्य सचिव को कानूनी तौर पर यह

अधिकार ही नहीं होता कि वह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अनादर करे। अब एक के

राशन कार्ड बनाने का निर्देश के साथ ही मुख्यमंत्री पूरे राज्य में नये सिरे से राशन कार्ड

व्यवस्था की समीक्षा कर उचित सुधार की दिशा में भी पहल कर सकते हैं।

सरकार चाहे तो सरयू राय की मदद ले सकती है

इस संबंध में विधायक सरयू राय ने विस्तार से उन्हें जानकारी दी है। याद रखना होगा कि

पिछली सरकार में बागी मंत्री होने के बाद भी श्री राय खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री

थे। उनकी ही देखरेख में राशन के वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को लागू किया गया

था। इसलिए वर्तमान सरकार यदि चाहे तो उनके अनुभवों का पूरा लाभ उठा सकती है।

सोशल मीडिया के माध्यम से यह स्पष्ट है कि ऐसे सकारात्मक सहयोग के लिए श्री राय

हमेशा ही हर सरकार अथवा विरोधी दल के लिए उपलब्ध होते हैं। मूलभूत सुविधाओं की

जब हम बात करते हैं कि झारखंड की गरीब जनता की इन सुविधाओं में शीर्ष प्राथमिकता

तो दो वक्त की रोटी है। गरीब जनता का पेट भरने के बाद उन्हें किसी काम के लायक

बनाया जाए तो यह ग्रामीण समाज के विकास की गांधी जी की अवधारणा के अनुकूल

होगी। जब आदमी भूखा नही रहेगा तो वह भी अपने और अपने परिवार के साथ साथ

अपने समाज के लिए कुछ बेहतर कर पाने की सोच पायेगा। इस व्यवस्था को सही तरीके

से लागू करने के बाद ही सरकार क्रमवार तरीके से ग्रामीण इलाकों में रोजगार सृजन और

कृषि को बढ़ावा देने के माध्यम से असली झारखंड के विकास की नई कहानी लिख सकती

है। राज्य गठन की मांग का मूल औचित्य भी यही था।

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