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चिकेन मे रुप बदल रहा है एक और वायरस शाकाहारी वैज्ञानिक ने आगाह किया

  • आधी आबादी साफ हो जाएगी नये वायरस से ?

  • शाकाहारी वैज्ञानिक डॉ ग्रेगर की चेतावनी

  • बर्ड फ्लू का वायरस ही अब बदल रहा है

  • परमाणु युद्ध से अधिक लोग मारे जाएंगे

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चिकेन खाने के शौकिनों को अपने भोजन में शायद बदलाव करना पड़ सकता

है। मुर्गियों में पहले से विद्यमान एक वायरस अब बदलाव की प्रक्रिया में हैं। समझा जाता

है कि हर वायरस समय समय पर अपने आप में बदलाव करता रहता है। लेकिन कई बार

यह बदलाव जीवन के लिए घातक बन जाते हैं। चिकेन के जिस वायरस के बदलने की

चर्चा हो रही है, उसके आगे बढ़ने पर आशंका है कि दुनिया की आधी आबादी इसकी चपेट

में आकर खत्म हो जाएगी। दरअसल चिकन यानी मुर्गियों में किसी रोग का प्रकोप होने

की स्थिति में भोजन श्रृंखला में आगे होने की वजह से इसके जरिए यह वायरस इंसानों

तक बड़ी आसानी से पहुंच जाता है। इसी वजह से इस नये वायरस का प्रभाव वर्तमान के

कोविड 19 से कहीं बहुत अधिक होने की आशंका जतायी गयी है।

आगाह करने वालों के निष्कर्ष पहले सही निकले हैं

अमेरिका के एक डाक्टर ने इसके बारे में दुनिया को आगाह किया है। लेकिन दुनिया के

अन्य वैज्ञानिक इस दावे की दोबारा जांच कर लेना चाहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि

अमेरिका के इस डाक्टर मिशेल ग्रेगर खुद शाकाहारी हैं और लगातार शाकाहार के लिए

प्रचार भी करते रहते हैं। उन्होंने अपनी नई किताब हाऊ टू सरवाइव ए पैंडेमिक में इस बात

का उल्लेख किया है। वह काफी समय से शाकाहार के प्रवल समर्थक हैं। लेकिन उनके दावों

को हल्के में नहीं लिया जाता क्योंकि इसके पहले भी कई अवसरों पर उनका शोध निष्कर्ष

बिल्कुल सही साबित हुआ है।

उनका शोध है कि कभी तेजी से फैलने वाले बर्ड फ्लू के वायरस अब रुप बदल रहे हैं। जब

यह वायरस इंसानी शरीर के लिए खतरनाक हो जाएगा तो यह एक ही झटके में दुनिया की

आधी आबादी को ही समाप्त कर देगा क्योंकि इसका प्रसार चिकेन से सीधे इंसानों तक

पहुंचने के अलावा भी अन्य भोजन श्रृंखलाओं के जरिए इंसानों तक पहुंचेगा। उनकी

आशंका है कि जब यह विकराल रुप धारण करेगा तो वर्तमान कोरोना वायरस का प्रकोप

उसके सामने बौना साबित होगा। उन्होंने कहा है कि जानवरों के प्रति इंसान का

स्वाभाविक आकर्षण अलग बात है। इंसान प्राचीन काल से ही जानवरों को अपना पालतू

बनाता रहा है। लेकिन बाद में इन्हें भोजन में शामिल करने के बाद वायरसों का संक्रमण

और उनमें बदलाव की जो प्रक्रिया प्रारंभ हुई है, वह आज तक जारी है। आंखों से नजर नहीं

आने वाली इन प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी तब मिलती है, जब नुकसान होना प्रारंभ हो

जाता है।

चिकेन पर बर्ड फ्लू से इंसानी नुकसान का रिकार्ड हमारे पास

सारी दुनिया में बर्ड फ्लू के खतरों का पता भी तब चला जब मरी हुई मुर्गियां सस्ते में

खरीदकर खाने की लालच में अनेक लोग बीमार होने लगे। उनकी शोध के मुताबिक

वायरस हर जगह विद्यमान हैं और वह एक अलग आयाम का जीवन चक्र है। आम तौर

पर वायरस के साथ इंसान अथवा किसी अन्य जीव की कोई दुश्मनी भी नहीं है।

लेकिन जब किसी वजह से यह वायरस अपना स्वरुप बदलने लगते हैं तो वे मारक

हथियार साबित होते हैं। इसके पहले भी टीबी के वायरस का हाल दुनिया देख रही है।

मलेरिया के वायरस भी दिनोंदिन शक्तिशाली होते जा रहे है। अब कोरोना वायरस पूरी

दुनिया को अपनी चपेट में लेता जा रहा है, जिसके निदान की कोई ठोस विधि अब तक

विकसित नहीं हो पायी है।

डॉ ग्रेगर कहते हैं कि चिकन हमारी भोजन श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। चिकन के

साथ साथ अंडे भी नियमि तौर पर खआये जाते हैं। लेकिन उनकी फॉर्मिग और अधिक

उत्पादन के लिए उनपर रसायनों का प्रयोग अब इंसान के अपने लिए जानलेवा साबित हो

रहा है। चिकेन को जल्द बड़ा करने, उनमें अधिक मांस पैदा करने के लिए जिन प्रक्रियाओं

का सहारा लिया जा रहा है, वे ही चिकेन के अंदर की संरचना को बदल रहे हैं।

हर वायरस की तरह यह भी अब बदल रहा है

किसी एक में वायरस प्रक्रिया का बदलाव होने के तुरंत बाद यह दूसरों तक फैल जाएगा

क्योंकि वे फॉर्मिंग के तहत एक ही बाड़े में रखे जाते हैं। जब तक इंसान को कुछ पता चले

यह बहुत बड़े इलाके तक फैल चुका होगा। भोजन में शामिल होने की वजह से यह बड़ी

आसानी से इंसानों को अपना शिकार बना लेगा। उनके मुताबिक बर्ड फ्लू के जिस वायरस

से दुनिया में कुछ लोग मारे गये थे, वही एच5एन1 वायरस अब बदल रहा है। जब यह फिर

से इंसानों पर हमला करेगा तो इसका प्रभाव किसी परमाणु युद्ध में मरने वालों से कहीं

अधिक होगा। उन्होंने दलील दी है कि यदि इससे बचना है तो मुर्गियों की वर्तमान सभी

प्रजातियों को खत्म कर बिल्कुल नये सिरे से उन्हें पैदा कर उनका विकास और पूरी दुनिया

में उस नई प्रजाति की मुर्गी का संरक्षण करना होगा। यह नई प्रजाति उस वायरस से मुक्त

होगी, जो अब धीरे धीरे अपना रुप बदलती जा रही है।


 

 

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