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छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति गढ़वो नवा छत्तीसगढ़

रायपुरः छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति इस राज्य की मूल भावना से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने

कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘ की मूल भावना पर आधारित है।

इस नीति के माध्यम से आदिवासी अंचलों के विकास में तेजी आएगी और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।

श्री बघेल ने आज मासिक रेडियो वार्ता ‘लोकवाणी’ में लोगो को प्रश्नों के उत्तर में कहा कि उद्योग नीति में पिछड़े

क्षेत्रों या विकासखंडों को सबसे अधिक रियायत और संसाधन देने का फैसला किया गया है। नए उद्योगों में स्थानीय

लोगों को अनिवार्य रूप से रोजगार देने का प्रावधान है। अकुशल श्रेणी में 100 प्रतिशत, कुशल श्रेणी में कम से कम

70 प्रतिशत और प्रशासकीय और प्रबंधकीय श्रेणी में कम से कम 40 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को मिलेगा।

उन्होने कहा कि इसमें खेती, उद्यानिकी, हस्तशिल्प आदि को उच्च प्राथमिकता दी गई है। खाद्य और वनोपज

प्रसंस्करण की अधिक से अधिक इकाईयां लगे इस पर हमारा जोर होगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2024 तक

अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के कम से कम 300 उद्यमी उद्योग लगाएं।

मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में 3500 से अधिक नये उद्योग लगाने का लक्ष्य है। श्री बघेल ने रेडियो वार्ता में

पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा कि नगरनार प्लांट का संचालन एन.एम.डी.सी. के माध्यम से हो इससे राज्य

सरकार सिद्धांत: सहमत है।

श्री बघेल ने कहा कि एन.एम.डी.सी., एन.टी.पी.सी. और एस.ई.सी.एल.जैसे अनेक उपक्रमों का स्थानीय जनता,

स्थानीय विकास प्रदेश और देश के विकास में अद्भुत योगदान रहा है।

छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार पर फोकस

उन्होने कहा कि वनांचलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार देने के लिए

राज्य सरकार ने अनेक बड़े कदम उठाएं है।बस्तर, सरगुजा तथा बिलासपुर संभाग के लिए कनिष्ठ कर्मचारी चयन

बोर्ड के गठन का निर्णय लिया गया है। बस्तर, सरगुजा संभाग की तरह कोरबा जिले में जिला संवर्ग के तृतीय एवं

चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की पूर्ति स्थानीय लोगों से करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर नौकरी देने के लिए नियमों को शिथिल किया गया है।

समर्थन मूल्य पर धान खरीद की चर्चा करते हुए श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरी व्यवस्था कर रखी है

कि किसानों की जेब में 2500 रूपए प्रति क्विंटल की दर से पूरी राशि जाए। किसानों को धान का मूल्य 2500 रूपए

प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। केन्द्र के नियमों के तहत फिलहाल केन्द्र द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर

धान की खरीदी की जा रही है।

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