Press "Enter" to skip to content

मौसम के बदलाव से बदल रहा है जंगली भैसों का आचरण







  • खेती बचाये कि जेल जाने से बचें महाराष्ट्र के किसान परेशान

  • रात भर पटाखा फोड़कर फसल बचाने की कोशिश में किसान

  • हर खेती को रात भर में चट कर जाते हैं गौर

  • कर्नाटक की सीमा पर है कोल्हापुर


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः मौसम के बदलाव का असर पर वन्य प्राणियों पर भी दिख रहा है।

इस संबंध में कर्नाटक और महाराष्ट्र की सीमा पर अजीब ढंग से जंगली भैसों का व्यवहार बदला है।

स्थानीय बोली में इन जंगली भैसों को गौर भी कहा जाता है।

अब तो जंगल के जानवर नियमित तौर पर किसानों के खेतों पर हमला कर रहे हैं।

वन्य प्राणी संरक्षण कानून के लागू होने की वजह से किसान उन्हें मार भी नहीं सकते।

लेकिन जरा सी चूक होने पर यही जंगली भैसें उनके सारे खेतों को चट कर रही हैं।


इन्हें भी पढ़ें

विलुप्त प्रजाति की पक्षी अपने आप फिर से लौटी

मंगल ग्रह पर पहले पानी था लेकिन तेज हवा में उड़ गया

समुद्र का जलस्तर इस सदी के अंत तक दो मीटर ऊंचा होगा

भारतीय सेना के येती के निशान को नेपाल सेना ने भालू कहा


शायद मौसम के इस बदलाव की वजह से इन जंगली जानवरों को जंगल के अंदर का भोजन पसंद नहीं आ रहा है।

आम तौर पर जंगली भैसे भी शाकाहारी प्राणी हैं।

यह घास और पत्तियां खाकर जीवन बसर करते हैं।

लेकिन इनदिनों कोल्हापुर के इलाकों में ऐसा देखा जा रहा है कि जंगली भैसों ने जंगल के घास पत्ती छोड़कर किसानों के खेतों को चरना प्रारंभ कर दिया है।

पहले पहले तो किसानों को इस नये किस्म के आक्रमण की भनक तक नहीं लगी थी।

लोग एक दूसरे पर संदेह करने लगे थे। लेकिन जब एकड़ के एकड़ खेत साफ होने लगे तो लोगों ने मिलकर रतजगा किया।

तब जाकर पता चला कि रात के अंधेरे में जंगली भैसों की फौज इन खेतों में उतर आती है।

जिसका नतीजा होता है कि रात भर में एकड़ के एकड़ खेत पूरी तरह साफ हो जाते हैं।

मौसम के बदलाव से बदल गये हैं जंगली जानवरों को मिजाज




किसान मान रहे हैं कि पानी की कमी, मौसम के बदलाव और जंगल में पेड़ ज्यादा कट जाने की वजह से शायद इन जंगली जानवरों को जंगल के अंदर दिक्कत हो रही है।

मजबूरी में वे ही अपना पेट भरने खेतों तक आ रहे हैं।

लेकिन किसानों की परेशानी यह है कि अगर वे जंगली भैसों के पेट की चिंता करें तो उनका अपना पेट नहीं भर पायेगा।

बीच का रास्ता निकालते हुए किसानों ने अपनी तकनीक से इससे बचाव के उपाय निकाले हैं।

अब अलग अलग दलों में बंटकर किसान रात को खेतों पर मौजूद रहते थे।

इस दौरान वे रूक रूक कर पटाखा फोड़ते रहते हैं।

इधर उधर पटाखा फूटने की वजह से जंगली भैंस खेतों से दूर ही रहते हैं क्योंकि इस किस्म का शोर उन्हें डरा देता है।

लेकिन इस तरकीब के लिए भी किसानों का अतिरिक्त पैसा खर्च हो रहा है।

अब औसतन किसानों को प्रतिदिन पटाखों की खरीद पर पचास रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

यह उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है।

खेतों पर रात को निगराने करने वाले किसानों ने पाया है कि जंगल से निकलकर खेतों तक पहुंचने वाले

जंगली भैसों में से कुछ का आकार काफी बड़ा है।

आम तौर पर शांत रहने वाले नर जंगली भैसों का आकार छह फीट ऊंचा और वजन मनें पांच सौ से एक हजार किलो तक हो सकता है।

गुस्से में अत्यधिक आक्रामक हो जाते हैं जंगली भैंसे

नाराज होने पर वे अत्यंत आक्रामक हो जाते हैं।

हमला करने पर वे किसी भी हिंसक जानवर तक को मार गिराते हैं।

अफ्रीका के जंगलों में अनेकों बार इन्हीं जंगली भैसों द्वारा शेरों को मार गिराने के अनेक वीडियो इंटरनेट पर पहले से ही मौजूद है।

पास के राधानगरी वन्य प्राणी आश्रयणी के ये जंगली जानवर अब अक्सर ही किसानों के खेतों तक पहुंच रहे हैं। अनेक बार उन्हें आश्रयणी से बाहर भी मुख्य सड़कों पर घूमते हुए देखा जा रहा है।

रात के आठ बजे से सुबह के चार बजे तक जंगली भैसों के खेतों में चले आने का वक्त होता है।

इधर उधर से पटाखों की आवाज की वजह से वे एक साथ खेतों पर नहीं आ पाते।

इस वजह से किसानों के खेतों को कम नुकसान होता है।

लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। स्थानीय किसान यह कोशिश कर रहे हैं कि

अगर सरकार उनकी फसल बचाने के लिए कोई उपाय नहीं कर सकती तो कमसे कम वन्य प्राणी आश्रयण के इस इलाके के तारों से तो घेर दे ताकि जंगली जानवर जंगल से निकल कर खेतों तक नहीं पहुंचे।

वर्तमान में इस जंगली भैंस द्वारा फसल चट कर जाने के भय से किसानों को

बरसात के मौसम में सांपों से भी बचकर रहना पड़ता है।

उसके लिए अलग से बचाव के इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

इस इलाके में पहले से ही सांपों की बहुतायत है।

लेकिन खेतो को चूहों से बचाये रखने के लिए किसान सांपों को भी नहीं मारते।

कुछ विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जंगल के अंदर भी अभी पानी की कमी हो गयी है।

शायद इस वजह से ही जंगली जानवरों को अपना सुरक्षित ठिकाना छोड़कर

पानी की तलाश में बाहर निकलना पड़ रहा है।


पर्यावरण पर कुछ और रोचक खबरें यहां पढ़ें

जंगली भालू के हमले में लोहरदगा और कुड़ू में मौत

शुक्रवार की रात भी कुकडु में हाथियों का उत्पात रहा जारी

तनाव और उसके नुकसान से कैसे बचाव करते हैं पेड़ और पौधे

गेतलसूद के सरस्वती विद्या मंदिर में दिखा छह फीट लंबा सांप



Spread the love
  • 14
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  
    14
    Shares

Be First to Comment

Leave a Reply

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com