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चैंबर के चुनाव लड़ने के पीछे कई और राज हैं

  • पवन शर्मा को बनाया है अपना प्रत्याशी
  • सामाजिक तौर पर पवन की अच्छी पहचान
  • सक्रिय राजनीति से दूर रहता है यह संगठन
  • किसका वोटबैंक काटने की रणनीति है यह
संवाददाता

रांचीः चैंबर के चुनाव मैदान में कूदने की वजह कुछ और भी हो सकती है।

आम तौर पर छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स व्यापारियों का संगठन है।

यह शुद्ध तौर पर व्यापारिक गतिविधियों और अपने सदस्यों की परेशानियों को

लेकर आंदोलन करता रहा है। लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में चैंबर ने अपनी

तरफ से पवन शर्मा को प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी है। चैंबर के इस अप्रत्याशित

फैसले से कई नये सवाल खड़े हो गये हैं। दरअसल असली सवाल जो अभी बाजार में चर्चा

में हैं उसके मुताबिक चैंबर के सक्रिय सदस्य इस फैसले से किसी राजनीतिक दल के

विजय अभियान में ब्रेक लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि व्यापारिक

गतिविधियों में सक्रिय रहे प्रदीप तुलस्यान भी रांची से चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी भी

अपनी व्यापारिक और सामाजिक पहचान होने के अलावा वह कांग्रेस के पुराने सदस्य के

तौर पर जाने जाते रहे हैं। लेकिन चुनाव में उन्हें भी व्यापारी वर्ग का वह समर्थन हासिल

नहीं हो सका था, जिसकी उम्मीद की गयी थी। इसलिए नये सिरे से एक गैर राजनीतिक

व्यक्ति के राजनीति के चुनावी समर में उतरने के कारणों को कई नजरिए से देखा जा रहा

है।

चैंबर के चुनाव मैदान में होने की असली वजह दूसरी भी है

राजनीति के जानकार इसके कई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं। उनमें पहला तो यह है

कि चैंबर का प्रत्याशी अगर मैदान में होगा तो वह किसी न किसी प्रत्याशी का वह वोट

काट देगा, जो व्यापारियों के वर्ग का है। इसलिए सीधी समझ में यह फैसला रांची के

भाजपा प्रत्याशी सीपी सिंह को चुनाव में कठिनाई में डालने वाला नजर आ रहा है।

सीपी सिंह के चुनाव में हार जाने पर अगले बार के चुनाव में इस सीट पर जो दावेदार आ

सकते हैं, उनमें से कई ने इस बार भी काफी प्रयास किया था। मजेदार स्थिति यह है कि

भाजपा प्रत्याशी की राह में चुपके से रोड़ा बिछाने का काम  दरअसल भाजपा से जुड़े लोग

ही कर रहे हैं। इस फैसले का दूसरा निष्कर्ष कारोबारी जमीन को विस्तार देने तथा चुनाव

लड़ने के बहाने नगर निगम पर अपना दबदबा कायम करने का भी है। इस बारे में कई

प्रस्तावित योजनाओं में अड़ंगा लगने को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। समझा जाता है

कि चुनावी ताकत के जरिए चैंबर के लोग एक तीर से कई शिकार करना चाहते हैं। इनसे

अलग तीसरा कोण भावी राजनीति को अपने पक्ष में करने का है। तय है कि इस

समीकरण के तहत अगर सीपी सिंह इस चुनाव में विफल होते हैं तो अगले चुनाव में कई

नेताओं के लिए नये सिरे से लॉटरी खुल सकती है। इन दावेदारों में से कौन लोग इस बार

चैंबर के प्रत्याशी के पक्ष मे क्या कुछ  कर रहे हैं, इसे देखने से भी बहुत कुछ स्पष्ट हो

सकता है।

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