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केंद्रीय मंत्री गडकरी का बयान गलत साबित भाजपा को होगा चुनावी नुकसान

  • राज्यसभा में सामने आया भाजपा का बड़ा झूठ

  • ब्रह्मपुत्र के खनन नहीं और नहीं बनेगा एक्सप्रेस हाईवे

  • राज्यसभा के बयान से फिर निराश हुई असम की जनता

  • वर्ष 2016 से बार बार भाजपा इसका आश्वासन देती रही

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : केंद्रीय मंत्री गडकरी के साथ साथ 2016 से अब तक असम के मुख्यमंत्री

सर्बानंद सोनोवाल और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित भाजपा नेता असम

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रखते हुए बार-बार घोषणा करते रहे हैं कि केंद्र सरकार

ब्रह्मपुत्र नदी के बड़े खनन से असम की बाढ़ की समस्याओं का समाधान करेगी और

ब्रह्मपुत्र के किनारे 2000 किलोमीटर से अधिक एक्सप्रेस हाईवे बनाकर पूर्वोत्तर भारत के

माध्यम से दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों को जोड़ने का प्रयास करेगी। लेकिन अभी

राज्यसभा में भाजपा का बड़ा झूठ सामने आ रहा है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे

किसी एक्सप्रेस हाइवे के निर्माण की कोई सरकारी योजना नहीं है। इसे लेकर असम के

सारे जनता निराश और नाराज हो रही है। एक्सप्रेस हाइवे के लिए कोई प्रस्ताव ब्रह्मपुत्र,

राज्यसभा में नितिन गडकरी ने कहा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आज जानकारी दी

कि नदी के डूबने के बाद ब्रह्मपुत्र नदी के दोनों किनारों पर राजमार्ग बनाने का कोई

प्रस्ताव नहीं आया है। मंत्री ने यह बात असम के राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुयान

द्वारा नदी के दोनों किनारों पर राजमार्गों के निर्माण से संबंधित एक प्रश्न के लिखित

उत्तर में कही। भारतीय जनता पार्टी के भाजपा ने एक्सप्रेस हाईवे के निर्माण के वादे पर

सवाल उठाते हुए, असम के सांसद भुइयां ने मंत्री से एक सवाल में कहा कि भाजपा ने एक

साल पहले घोषणा की थी कि वह ब्रह्मपुत्र की खुदाई करेगी और दोनों तरफ एक्सप्रेस

हाईवे का निर्माण करेगी। क्या एक्सप्रेस हाईवे पहले ही पूरा हो चुका है?

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने लिखित उत्तर में यह कहा है

यह सवालों के लिखित उत्तर में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि

असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे किसी एक्सप्रेस हाइवे के निर्माण की कोई सरकारी

योजना नहीं है। गडकरी ने कहा ,जहाजों के निर्बाध नेविगेशन के लिए मुख्य रूप से

अक्टूबर से मार्च के बीच की आवश्यकता के आधार पर ड्रेजिंग कार्य किया जाता है, जहाँ

नेविगेशन चैनल की चौड़ाई और गहराई लक्षित उपलब्ध गहराई से कम है। गडकरी ने

आगे बताया कि भारत का अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण , एक स्वायत्त निकाय है, जो

कि पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के तहत है, राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र) पर

शिपिंग और नेविगेशन के लिए ड्रेजिंग का कार्य करता है। घुइयन भी। असम में माजुली

और जोरहाट को जोड़ने वाले ब्रह्मपुत्र पर पुल के निर्माण के बारे में पूछताछ करने पर,

गडकरी ने बताया कि 925 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है, जिसके लिए बोलियां

प्राप्त हुई हैं। यहां यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि इससे पहले 2017 में, केंद्रीय मंत्री ने

नमामि ब्रह्मपुत्र के समापन समारोह के दौरान कहा था कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहली

एक्सप्रेस राजमार्ग परियोजना को 2000 करोड़ करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश पर

ब्रह्मपुत्र नदी के साथ विकसित किया जाएगा। बताया कि केंद्र ड्रेजिंग कार्य को अंजाम

देगा और ब्रह्मपुत्र के ड्रेजिंग से आने वाली मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण के लिए किया

जाएगा। असम में एक्सप्रेस हाईवे के ड्रेजिंग और निर्माण के लिए असम सरकार, भारतीय

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग के बीच एक त्रिपक्षीय

समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

गुवाहाटी की जनसभा में भी उन्होंने यह बात कही थी

खुद गडकरी ने साल 2017 में असम के गुवाहाटी में एक जनसभा में भाषण देते हुए कहां

था कि नॉर्थ ईस्ट रीजन में पहला हाइवे प्रोजेक्ट असम में ब्रह्मपुत्र नदी के पास बनाया

जाएगा और इसमें करीब 40,000 करोड़ की लागत आएगी, नॉर्थ ईस्ट हमारी प्राथमिकता

है। असम में ब्रह्मपुत्र के किनारे यह पहला एक्सप्रेस हाइवे प्रोजेक्ट बनेगा। 1300

किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे में 40,000 करोड़ निवेश किए जाएंगे.गडकरी ने आगे कहा था

कि एक्सप्रेस हाइवे पर एक्सिस कंट्रोल होगा, जिससे गाड़ियां हाई स्पीड से दौड़ सकेंगी।

केंद्र ने ब्रह्मपुत्र नदी में ऊपरी असम के सदिया से लेकर बांग्लादेश के चिटगोंग तक

नेवीगेशनल चैनल बढ़ाने की बात कही थी।अभी अपनी बातों को झूठ बोलने की बात

साबित कर राज्यसभा ने कहा कि यह एक्सप्रेस हाईवे नहीं होगा और इसके लिए सरकार

की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया है। भाजपा सरकार और नेता पूर्वोत्तर के लोगों का

भरोसा तोड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आगामी असम विधानसभा चुनाव में भाजपा को

यह काफी महंगा पड़ेगा। लोगों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री गडकरी का खुद का वादा झूठा

साबित हुआ है। इसकी बड़ी कीमत असम की भाजपा सरकार को चुकानी होगी

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