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केंद्रीय गृह सचिव ने बताया पूर्वोत्तर के राज्यों का सीमा विवाद समाप्त होगा

  • 49 साल बाद केंद्र सरकार ने उठाया कदम

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बाउंड्री कमिशन

  • इस विवाद की वजह से अक्सर हिंसा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: केंद्रीय गृह सचिव ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्य

के बीच लंबे समय से लंबित सीमा विवाद को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। अगले साल

तक इसका स्थायी समाधान निकालने के बारे में आशान्वित है। इस संवाददाता के साथ

बात करते हुए केंद्रीय गृह सचिव ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह

मंत्री अमित शाह के निर्देश पर, उन्होंने सभी पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्य सचिव को सूचित

किया है कि वे अपने राज्यों की सीमाओं को चिह्नित करें। और तुरंत केंद्रीय गृह मंत्रालय

को भेजा जाए ताकि सभी लोग एक साथ मिलकर स्थायी समाधान निकाल सकें। उन्होंने

कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने “अष्टलक्ष्मी” जैसा उत्तर-पूर्व

राज्यों की सीमा विवाद लेकर बहुत परेशान हो रहा है।हालांकि, असम से अरुणाचल,

मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर और मेघालय में हर साल सीमा विवाद को लेकर स्थानीय

लोगों के साथ झगड़ा होता है। इसके साथ ही हर साल हत्या और मरने का खेल चल रहा है।

राजनीतिक दल अपनी सुविधा के लिए इसका लाभ उठाते रहते हैं। अगर गृह मंत्रालय ने

इस स्थिति के स्थायी समाधान के लिए निर्णय लिया है तो यह पूर्वोत्तर सीमा के सभी

लोगों के लिए बहुत अच्छा होगा।

केंद्रीय गृह सचिव के अलावा वरीय अफसर भी लगे हैं काम में

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग, जो मिजोरम के एक दिवसीय दौरे पर थे, ने

राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई, मुख्यमंत्री जोरामथंगा से मुलाकात की और सीमा मुद्दे

पर मुख्य सचिव लानमाविया चुआंगो और नागरिक संगठनों के साथ बैठक व पत्रकारों से

बात करते हुए, गर्ग ने कहा कि केंद्र दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद का स्थायी समाधान

लाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि असम के साथ सीमा विवाद और असम से बाहर

निकले सभी राज्यों के साथ काम करने के लिए केंद्र ने अगस्त में संयुक्त सचिव स्तर के

अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को नियुक्त किया है। उन्होंने कहा, “हम एक स्थायी

समाधान के लिए काम कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्य

सीमा विवाद मार्च 2021 तक तक स्थायी रूप से हल हो जाएगा।

उल्लेख करें कि असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के सीमा विवाद 1971 से जारी हैं।”उत्तर

पूर्वी राज्यों अक्सर सीमा विवाद को लेकर आमने-सामने आ जाते हैं। असम संवैधानिक

सीमा के पालन की वकालत करता है जबकि दूसरे राज्य- नगालैंड, मेघालय, मिजोरम

और अरुणाचल प्रदेश ऐतिहासिक सीमाओं पर जोर देते हैं।उत्तर पूर्वी राज्यों के बीच सीमा

को लेकर अक्सर तनाव होता रहा है। अगस्त 2014 में असम के गोलाघाट जिले के

उरियमघाट में नगालैंड सीमा पर भी तनाव हुआ था। इसमें 11 से अधिक लोग मारे गए थे

और घटना के बाद डर की वजह से हजारों लोग अपना घर छोड़कर विस्थापित हो गए थे।

पूर्वोत्तर के सीमा विवाद में कई बार हो चुका है तनाव

नगा हिल्स 1957 तक अविभाजित असम का हिस्सा थी। 1993 में नगालैंड को अलग

राज्य का दर्जा मिलने के बाद क्षेत्रीय विवाद शुरू हुआ था। 1971 से विवादित इलाकों में

केंद्रीय बल तैनात है। केंद्र ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए केवीके सुंदरम कमिशन

गठित किया था लेकिन पैनल की रिपोर्ट नगालैंड को मंजूर नहीं थी। इसके बाद असम ने

सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। दोनों राज्यों के बीच विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के

निर्देश पर बाउंड्री कमिशन का गठन हुआ जो कि इस दिशा में काम कर रही है।असम

सरकार के गेस्ट हाउस को लेकर पड़ोसी राज्य मेघालय से भी विवाद है। यह गेस्ट हाउस

कभी पूर्व सीएम तरुण गोगोई का आधिकारिक आवास हुआ करता था। यह खानापारा और

पिलंगकटा के बीच एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है। मेघालय अक्सर इस आवास को अपने

क्षेत्र का हिस्सा बताता है। पूर्व में, मेघालय सरकार ने कहा था कि उसके पास जमीन पर

अपने दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त रेकॉर्ड है। मेघालय 12 क्षेत्रों में विवाद सुलझाने

के लिए एक सीमा आयोग के गठन की मांग कर रहा है। बता दें कि असम और मिजोरम

के सीमा विवाद पर सीमांता में रहने वाले लोगों में अभी तक भय नहीं निकल रहा है ।

हाल के विवाद के बाद स्थिति अब तक सामान्य नहीं

“मिजोरम सरकार ने असम क्षेत्र के अंदर सीमा क्षेत्रों से अपने सुरक्षा बलों को धीरे-धीरे

हटाने का आश्वासन दिया है। मिजोरम की सीमा के साथ स्थिति काफी सामान्य

है।”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और मिजोरम

के मुख्यमंत्री से भी कई बार बात की है, ताकि संकट को टाला जा सके।बता दें कि इससे

पहले मिजोरम ने कहा था कि अगर असम में आपूर्ति करने वाले ट्रकों की नाकाबंदी को

कम नहीं किया गया तो वह विदेश से आवश्यक आयात करेगा। असम और मिजोरम

राज्यों के निवासियों के बीच झड़पों के बाद 16 अक्टूबर से सीमावर्ती इलाकों में तनाव बढ़

गया था। दोनों राज्यों के बीच मंगलवार को हुई जमीनी स्तर की वार्ता विफल रही थी।

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