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केंद्रीय गृहमंत्री ने डेस्टिनेशन नार्थ ईस्ट का ऑनलाइन उदघाटन किया

  • पूर्वोत्तर के बिना भारत की संस्कृति ही अधूरी

  • 2024 से पहले समस्याओं का समाधान भी होगा

  • यहां शांति स्थापित करना सबसे अधिक आवश्यक

  • पर्यटन और रोजगार बढ़ाना केंद्र का असली लक्ष्य

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : केंद्रीय गृहमंत्री गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को विश्व पर्यटन दिवस के

मौके पर ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ-ईस्टक 2020’ फेस्टव का वर्चुअली उद्घाटन किया। शाह ने

कार्यक्रम में मोदी सरकार द्वारा पिछलेसाढ़े छह साल के पूर्वोत्तर में किए गए विकास

कार्यों को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। पूर्वोत्तर को भारतीय संस्कृति का आभूषण बताते

हुए गृहमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति की कल्पना बिना पूर्वोत्तर के राज्यों के भारत

की कल्पना नहीं की जा सकती है।शाह ने अपनी सरकार के कार्यों की गिनती करते हुए

कहा कि ‘पूर्वोत्तीर में शांति स्था पित करना इसलिए आवश्यक था क्योंकि अर्थव्यवस्था ,

पर्यटन और रोजगार को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्त र पहले हिंसा,

उग्रवाद और बंद के चलते सुर्खियों में रहता था लेकिन मोदी सरकार की वजह से से अब

वहां विकास की चर्चा होती हैं।कई मुद्दे जो सालों से लंबित चल रहे थे, जैसे भारत-

बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता, मणिपुर नाकाबंदी को समाप्त करना, ब्रू-रींग समझौता,

बोड़ो समझौता और 8 चरमपंथी संगठनों के लगभग 644 कैडर द्वारा आत्मसमर्पण

करवाना ही नरेंद्र मोदी सरकार की पूर्वोत्तर को लेकर प्राथमिकता रही है। इन प्रयासों ने

पूर्वोत्तर की सूरत बदल दी है। शाह ने आगे कहा कि गृह मंत्री के रूप में, मैं सभी पूर्वोत्तर

के सभी सीएम और लोगों को बताना चाहूंगा कि 2024 से पहले शेष समस्याओं का

समाधान भी केंद्र सरकार द्वारा कर लिया जाएगा।

केंद्रीय गृहमंत्री ने पूर्वोत्तर की योजनाओं की जानकारी दी

‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट’ 2020, भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए

एक वार्षिक कार्यक्रम का उद्घाटन 27 सितंबर 2020 को आभासी मंच पर किया गया है।

उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह थे।उद्घाटन कार्यक्रम

की अध्यक्षता पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने की। डॉ

जितेंद्र सिंह ने समझाया कि मुख्य उद्देश्य के पीछे डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट की घटना शेष

भारत को नॉर्थ ईस्ट के करीब लाने के लिए है। उन्होंने संकेत दिया कि इसकी समृद्ध

हथकरघा और हस्तशिल्प परंपराओं के साथ, सांस्कृतिक विरासत और उच्च साक्षरता दर,

उत्तर पूर्व के पास बहुत कुछ है। कोरोना संकट की वजह से काम प्रभावित हुआ है लेकिन

उसे भी शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।

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