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कोई भूला हुआ सिकंदर रहता है अपने में

कोई भूला हुआ सिकंदर या यूं कहें कि सोता हुए शेर का जगा दिया है। केंद्र सरकार के कृषि

कानूनों को लेकर जो कुछ पेचिदगियां उभरकर सामने आ रही हैं, उससे तो यही समझा जा

सकता है कि समाज का जो तबका आम तौर पर विरोध के स्वर नहीं निकालता, वह

अचानक से सड़कों पर आ गया है। केंद्र सरकार के तरफ से संसद के अंदर और बाहर लाखों

तरीकों से सफाई दी जा रही है लेकिन आंदोलनकारी किसानों के पास अब सरकार के

मुकाबले अधिक तर्क हैं और वे हर बार सरकार की हर बात को अपने तर्क से काट रहे हैं।

कुल मिलाकर पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार की गाड़ी कुछ ऐसी फंसी है कि दलदल में

धंसती हुई नजर आ रही है। फिल्म सुलतान चूंकि हरियाणा की पृष्टभूमि पर आधारित

फिल्म थी, इसलिए हरियाणा और दिल्ली के आस पास की राजनीति को नये नजरिए से

देखना भी जरूरी मालूम पड़ता है। नंदकिशोर गुर्जर लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो

किसान आंदोलन की आग को भड़का रहा है। अब नई सोच यह है कि क्या गुर्जर बिना सोचे

समझे ही ऐसी बातें कह रहे हैं या उसके पीछे भी कोई राजनीति है। दरअसल भइया

राजनीति का खेल भी काफी हद तक बिलियर्ड के खेल जैसा होता है, जिसमें आप किसी

एक गोटी पर वार करते हैं लेकिन उस बिलियर्ड टेबल में रखी कोई और गोटी गड्डे में जा

गिरती है। फिर भी अगर गुर्जर ऐसा बयान दे रहे हैं तो किसके कहने पर दे रहे हैं, यह

सोचने और समझने वाली बात है। इसी बात पर सुपरहिट फिल्म सुलतान का एक गीत

याद आने लगा है।

सलमान खान की फिल्म सुलतान सुपर हिट थी

इस गीत को लिखा है अरशाद कामिल ने जबकि उसे संगीत में ढाला था विशाल और शेखर

की जोड़ी ने। इस गीत को स्वर दिया है नुरानी बहनों के साथ साथ खुद विशाल ददलानी

ने। पूरी गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

दूरी दर्द दुनिया मुझको देख के हंसती
इश्क़ मेरा बदनाम हो गया करके तेरी हुस्न परस्ती

कोई जोगी रहता है अपने में कोई भुला हुआ सिकंदर रहता है अपने में
कोई जोगी रहता है अपने में कोई भुला हुआ सिकंदर रहता है अपने में
हो..सजके दिखाएगी हो..हंस के बुलाएगी हो..रज्ज के नचाएगी
टुक टुक टुक करती चलती थारी म्हारी ज़िन्दगी
रे बोले धड़क दिन रे टुक टुक टुक टुक करती चलती

मीठी थी ज़िन्दगी रे बोले धड़क दिन
अपनी मर्ज़ी से बनती बिगड़ती धुंआ नहीं ओए होए
अपनी ही मर्ज़ी से बनती बिगड़ती बनती बिगड़ती

इस गीत में हिंदी और अंग्रेजी शब्द भी घुले मिले हैं

धुंआ नहीं ओए होए इट्स ए टेक डाउन

यु गोंना हिट थे ग्राउंड हार्ड
बूत लाइफ गेटस यु हार्ड एंड धोबी पछाड़
व्हाट लविंग एंड फाइट आरनॉट एपार्ट
यू कैन लव थे फाइट बूत यू कैंट फाइट योर हार्ट

अपनी मर्ज़ी से बनती बिगड़ती
धुंआ नहीं ओए होए ग्राउंड स्टार्ट शाकिन
माकिन’ साउंड्स तहत यु शोल्डन’त बे माकिन’
ताकिन’ स्टेप्स आउट ऑफ़ योर कम्फर्ट जोन
एंड यू’रे फाइन तो फाइट मोस्ट योर बॉटल्स अलोन

ओ तारे जैसी चाल चल है रेशम है या मलमल है
या फिर गहरी दलदल है ज़िन्दगी या रा रा रा…
दिन दिन घट जाति जाती है फसल ये कट जाति जाती है

नज़र से हट’ति जाती है ज़िन्दगी या रा रा रा…
दिल समझे नहीं पतंदर रहता है अपने में
बस बाँटा फिरे धुरंदर रहता है अपने में
दिल समझे नहीं पतंदर रहता है अपने में

बस बाँटा फिरे धुरंदर रहता है अपने में
हो… हो..सजके दिखाएगी हो..हंस के बुलाएगी
हो..रज्ज के नचाएगी
टुक टुक टुक करती चलती थारी म्हारी ज़िन्दगी
रे बोले धड़क दिन रे टुक टुक टुक टुक करती चलती

मीठी थारी ज़िन्दगी रे बोले धड़क दिन
रे टुक टुक टुक टुक करती चलती मीठी थारी ज़िन्दगी
रे बोले धड़क दिन

कोई भी भाजपा वाला नहीं सोच पाया इसके असर को

किसान आंदोलन के धीरे धीरे विशाल रुप धारण करने को भी आप सुलतान फिल्म से

मिलाकर देख सकते हैं। उस फिल्म में भी पतंग पकड़ने और लोगों के घरो में डिश टीवी

लगाने का काम करने वाला युवक अचानक रास्ता बदलकर कुश्ती की दुनिया में पहुंच

जाएगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। जब किसान आंदोलन का आकार बड़ा होता

चला गया तब केंद्र सरकार की बात समझ में आयी कि अब बात करने की जरूरत है।

लेकिन इस बातचीत की जिम्मेदारी ऐसे गैर जिम्मेदार लोगों के हाथों सौंपी गयी कि

उन्होंने अपने अहम में सरकार की बाट लगा दी। राकेश टिकैत के आंसू क्या निकले माने

सैलाब आ गया। नजदीक के सारे किसान रातों रात अपने अपने माध्यम से धरनास्थल

पर पहुंचने लगे। वहां फिर से भीड़ एकत्रित होने के बाद सरकार को यह बात समझ में

आयी कि चाल में गलती हो गयी है। लेकिन यह चाल किसके दिमाग की उपज थी, यह

लाख टके का सवाल बन चुका है।

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