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अपनी बातों से माहौल बिगाड़ रहे हैं केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर




  • वार्ता की क्षमता रखने वाले संगठनों से होगी बातचीत

  • सरकार ने सम्मान के साथ ही वार्ता की है किसानों से

  • मोदी सरकार किसानों के हित के लिए प्रतिबद्ध है

  • अनेक तरीकों से आमदनी बढ़ाने के प्रयास हुए

नयी दिल्ली: अपनी बातों से केंद्रीय कृषि मंत्री फिर से आंदोलनकारियों को नाराज करने

का काम आज भी कर बैठे। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि जो

आन्दोलनकारी किसान संगठन वार्ता की क्षमता रखते हैं, सरकार उनसे बातचीत करने का

प्रयास कर रही है । श्री तोमर ने कृषि विज्ञान मेले के बाद संवाददाताओं से बातचीत में

कहा कि सरकार किसानों की मांगों को लेकर उनका निराकरण करना चाहती है। किसान

संगठनों के साथ बारह दौर की वार्ता हुयी है और सरकार ने संवेदनशीलता तथा सम्मान के

साथ किसान नेताओं से बातचीत की है। सरकार की ओर से कृषि सुधार कानूनों में कई

संशोधन के प्रस्ताव भी दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल के लिए कृषि सुधार कानूनों

को स्थगित और समस्या के समाधान के लिए सरकार ने एक समिति बनाने का प्रस्ताव

भी दिया है लेकिन किसान संगठनों ने इस पर कोई राय नहीं दी है। उन्होंने कहा कि

लोकतंत्र में महापंचायत चलती रहती हैं। किसान बातचीत का प्रस्ताव देते हैं तो सरकार

उन पर विचार करेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कृषि सुधार कानूनों

को कुछ समय के लिए स्थगित किया है। सरकार न्यायालय का सम्मान करती है।

न्यायालय ने एक समिति गठित की है और वह किसानों से राय ले रही है ।

अपनी बातों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कमेटी का भी उल्लेख किया

अपनी बातों में श्री तोमर ने कहा कि आजादी के समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में

आधे से अधिक कृषि का हिस्सा था जो धीरे-धीरे कम होता गया और दूसरे क्षेत्रों की

हिस्सेदारी बढ़ती गयी। परिवहन, रेल, उद्योग तथा उत्पादन के अन्य क्षेत्रों में जरुरत के

हिसाब से कानूनी बदलाव किये गये जिससे निजी क्षेत्र और वित्तीय संस्थाओं ने पूंजी

लगाये गए। उन्होंने एक ट्रक मालिक और किसान की तुलना करते हुए कहा कि ट्रक

मालिक की बेहतर आय होती है। वह पूंजी लगाता है, बैंक उसकी मदद करता है और

सरकार को ट्रक से कर भी मिलता है। खेती में निजी निवेश को बढावा देने के लिए कानून

में बदलाव किये गये हैं । अपनी बातों में ही कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को फसल ऋण

दिलाने के लिए बजट में 16.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । कोरोना संकट

के दौरान 2.17 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड पर ऋण स्वीकृत किये गये। उन्होंने कहा कि

सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का प्रयास कर रही है और इसके

लिए जैविक खेती , पशु पालन , मत्स्य पालन , मधुमक्खी पालन और प्रसंस्करण उद्योग

को बढावा दिया जा रहा है ।

कृषि अनुसंधान के महानिदेशक ने भी संबोधित किया

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि अधिक से

अधिक तकनीक का उपयोग कर किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। किसानों तक

तकनीक पहुंचाने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं और इसमें कृषि विज्ञान केन्द्रों की बड़ी

भूमिका है। डॉ. महापात्रा ने कहा कि अनाज की पैदावार के मूामले में देश आत्मनिर्भर हो

गया है लेकिन दलहनों और तिलहनों का उत्पादन जरुरत के हिसाब से कम है जिसके

कारण कम मात्रा में इसका आयात किया जाता है। कृषि अनुसंधान से जुड़े संस्थानों ने

उन्नत बीज तैयार किये हैं जिसके प्रयोग से उत्पादन बढाया जा सकता है। उन्नत बीज से

20 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ता है । उन्होंने कहा कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके

से खेती करनी चाहिये जिससे कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार हो। ऐसे उत्पादों को

आसानी से निर्यात किया जा सकेगा जिससे उन्हें उसकी भरपूर कीमत मिलेगी। उन्होंने

किसानों से फसलों की बायो फर्टिफाइड किस्में लगाने का अनुरोध करते हुए कहा कि ऐसे

अनाजों में विटामिन और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं ।



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