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खगोलीय पिंड के गिरने से तबाह हुआ था जॉर्डन का प्राचीन शहर




ईसाइयों के पवित्र पुस्तक में इस स्थान का उल्लेख है
करीब 36 सौ वर्ष पहले घटी थी यह घटना
आकार में काफी बड़ा था इससे शीशा बना
अत्यंत उच्च तापमान के प्रमाण भी मौजूद
राष्ट्रीय खबर

रांचीः खगोलीय पिंड आकार में काफी बड़ा था। इसी वजह से जब वह अचानक आ गिरा तो उस दौर का एक प्रमुख शहर पूरी तरह तबाह हो गया था। यह घटना करीब 36 सौ वर्ष पुरानी है। जॉर्डन वैली के दक्षिणी हिस्सेम यह ताल इल हम्माल नाम का यह शहर हुआ करता था।




जिस काल में यह घटना घटी थी, से ब्रोंज युग का मध्य भाग माना जा सकता है। यह इलाका मृत साहर के उत्तर पूर्व में हैं। उस काल में यह एक बहुत बड़ा शहर माना जाता था। अब हो रहे शोध में उस शहर के तबाह होने पर शोध के नतीजे अब सामने आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ईसाइयों के पवित्र पुस्तक ओल्ड टेस्टामेंट बूक ऑफ जोशुआ में भी इस शहर का उल्लेख है।

उस दौर में आबादी कम होने की वजह से दुनिया में विकसित शहरों की संख्या भी बहुत सीमित थी। जिस शहर के खगोलीय पिंड के गिरने से तबाह होने की बात कही जा रही है वह वर्तमान जेरुशलम से आकार में दस गुणा ज्यादा बड़ा था।

शोधकर्ता इसके बारे में पिछले पंद्रह वर्षों से लगातार अनुसंधान कर रहे थे। इस बार में सांता बारबारा के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफसर जेम्स केनेट ने कहा कि सांस्कृतिक लिहाज से यह प्राचीन शहर अत्यंत उन्नत था। वर्तमान मानव के क्रमिक विकास और उसकी विविधताओं की तरक्की भी इसी इलाके से हुई थी।

खगोलीय पिंड के गिरने से सारी इमारते तबाह हो गयी

खगोलीय पिंड के अचानक गिरने से इस शहर पर कई स्तरों पर प्रभाव पड़ा था। जिसे क्रमवार अनुसंधान के तहत खोजा जा रहा है। वहां हुई खुदाई में इसके साक्ष्य मिले हैं। दरअसल खुदाई के दौरान करीब डेढ़ मीटर की गहराई में मिले अजीब से साक्ष्य की वजह से ही इसका पता चल पाया है। वहां जो नष्ट होने के प्रमाण मौजूद थे, वहां भोजन बनाने और खाने के काम आने वाले उपकरण भी थे। उनके आस पास शीशा था और कई प

र्तों के भी शीशा में तब्दील होने के प्रमाण वहां मौजूद थे। वहां मौजूद अनेक चीजें और धातु से बने उपकरण भी पूरी तरह पिघल गये थे। उसी से इस बात का पता चला कि वहां पर का तापमान अचानक ही अत्यधिक बढ़ गया था।

उस काल में इतनी अधिक ताप पैदा करने की कोई तकनीक भी नहीं थी। वहां मौजूद ध्वंस के साक्ष्यों से वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि वहां करीब दो हजार डिग्री का तापमान पैदा हुआ था।

इस अत्यधिक ताप की वजह से वहां जीवन पूरी तरह नष्ट हो गया था। लेकिन वहां शीशा मौजूद होने की वजह से वर्तमान वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर यह समझा गया कि यह खगोलीय पिंड के गिरने से होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया है।

दरअसल कोई भी खगोलीय पिंड जब तेजी से वायुमंडल में प्रवेश करता है तो वह घर्षण की वजह से जलने लगता है। काफी तेज गति से नीचे आने की वजह से वह आसमान पर रासायनिक प्रतिक्रिया की वजह से शीशा भी बनाने लगता है।




वहां शीशे के कण पाये जाने के उल्कापिंड गिरने का अंदाजा हुआ

शीशे के टुकड़ों के बनने का इतिहास डायनासोरों के विलुप्त होने के काल से जुड़ा है। उस अति प्राचीन काल में इसी शीशा की वजह से धरती पर मौजूद अनेक जलीय जीवन भी समाप्त हो गया था क्योंकि पानी के अंदर भी इस शीशे की भरमार हो गयी थी।

वैसे आज से करीब 12 हजार आठ सौ वर्ष पूर्व भी इस किस्म के एक खगोलीय पिंड के विस्फोट के प्रमाण पहले से ही मौजूद हैं। इस तेल ए हम्माम शहर में भी ऐसे ही उदाहरण भरे पड़े थे, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि यहां भी खगोलीय पिंड के गिरने की वजह से ही तबाही आयी थी।

शोध से जुड़े और ट्रिनिटी साउथवेस्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक फिलिप जे सिल्विया ने भी इस दौरान क्या हुआ था, उसकी जांच में शोध दल की मदद की है। उनके मुताबिक खगोलीय पिंड के गिरने से वर्ष 1908 में भी आसमान पर करीब 12 मेगाटन का हवाई विस्फोट हुआ था।

इससे समझा जाता है कि पूर्वी साइबेरिया के तेइगा इलाके में यह पिंड धंस गया था। इसी लिए इस प्राचीन शहर के ऊपर भी जब खगोलीय पिंड आ गिरा तो शहर में रहने के सारे इलाके ही अंदर धंसकर तबाह हो गये। वहां गहराई में जो अस्थियों के टुकड़े पाये गये हैं, वे इंसानों के हैं जो इस विस्फोट के शिकार बने थे।

मृत सागर का खारा पानी भी दूर तक जा गिरा था

वहां मौजूद धातुओं के पूरी तरह पिघल जाने के अलावा भी इसी उच्च तापमान की वजह से क्वार्ट्ज बन गया था जो आम तौर पर बालू के उच्च ताप पर प्रतिक्रिया से पैदा होता है।

कई सतहों पर नमक की मौजूदगी से यह समझा जा सकता है कि पास के मृत सागर पर भी इस झटके का असर पड़ा था। इस समुद्र का पानी उछलकर काफी ऊपर तक जाने के बाद आस पास के इलाकों में फैल गया था।

इसी खारे पानी में मौजूद नमक अब भी मौजूद हैं। जो अलग अलग स्थानों पर अलग अलग मात्रा में हैं।

यानी खगोलीय पिंड के गिरने से जो समुद्री जल उछला था वह अलग अलग हिस्सों में अलग अलग भाग में पड़ा था इसी वजह स उन सतहों पर नमक की मात्रा भी अलग अलग है।

ईसाइयों के पुस्तक ओल्ड टेस्टामेंट के बुक ऑफ जेनेसिया में जिन दो शहरों का उल्लेख है, उस पर पहले ही बहस चली आ रही है। इसमें कहा गया है कि ईश्वर ने दंड स्वरुप दो शहरों को तबाह कर दिया था। अब वैज्ञानिक शोध से एक शहर का पता चलने की पुष्टि हो गयी है।



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