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सीबीआई और ईडी प्रमुख का कार्यकाल पांच साल करने का फैसला




राष्ट्रपति ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दी है
दो साल के बाद हर एक साल की वृद्धि
ईडी निदेशक को 17 को रिटायर होना था
केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सीबीआई और ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुखों का कार्यकाल अब पांच वर्षों का होगा। पूर्व में यह कार्यकाल सिर्फ दो वर्षों का होता था। केंद्र सरकार ने इस पूर्व के नियम में बदलाव कर समयसीमा को पांच साल करने के लिए खास अधिसूचना का सहारा लिया है।




दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने इसे फिर से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के लिए नया हथकंडा करार दिया ह । नियमों में बदलाव के लिए नरेंद्र मोदी की सरकार ने दो अलग अलग आर्डिनेंस जारी किये हैं।

इन्हीं के जरिए सीबीआई और ईडी के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाकर पांच साल किया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन्हें अपनी मंजूरी भी दे दी है।

इस नये नियम के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के निदेशक का कार्यकाल दो वर्षों का होगा लेकिन अगले तीन वर्षों तक उन्हें हर एक साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा।

वर्तमान में अति विशेष परिस्थितियों के अलावा इन पदों पर सेवाविस्तार देने का कोई प्रावधान नहीं था। सेवा विस्तार भी किसी खास परिस्थिति में छह माह के लिए दिया जाता था।

इन दोनों अधिसूचनाओं के मुताबिक जब संसद चालू नहीं हो और राष्ट्रपति इससे संतुष्ट हों तो वे कार्यकाल में बढ़ोत्तरी का यह फैसला केंद्र सरकार की अनुशंसा पर ले सकेंगे।




वैसे यह भी स्पष्ट किया गया है कि पांच साल पूरा होने के बाद किसी भी परिस्थिति में इस सेवाविस्तार को और आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।

सीबीआई और ईडी के यह फैसला आलोचनाओं का शिकार

वैसे सरकार का यह फैसला शायद सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद ही लिया गया है, ऐसा समझा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एलएन राव की खंडपीठ ने ईडी के निदेशक एसके मिश्र को सेवाविस्तार दिये जाने के फैसले पर टिप्पणी की थी।

अदालत ने कहा था कि किसी को भी ऐसा सेवाविस्तार विशेष परिस्थिति में ही दिया जाना चाहिए। अब अदालत की इस टिप्पणी के बाद आनन फानन में यह ऑर्डिनेंस लागू कर दिया गया है।

ऐसा इसलिए किया गया है क्योकि ईडी के निदेशक का कार्यकाल आगामी 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है। विरोधियों का पहले से ही आरोप है कि हाल के दिनों में सबसे अधिक ईडी का ही केंद्र सरकार ने दुरुपयोग किया है।

इस विभाग ने उन मामलों की भी जांच की है, जो उनकी जांच की परिधि में ही नहीं आते थे। इसके अलावा भी केंद्रीय एजेंसियों की मदद से अपने विरोधी नेताओं को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगता आ रहा है।



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