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भारत में कोरोना जांच के नमूनों की देखभाल में सावधानी जरूरी

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  • लापरवाही से भी फैल रहा है कोविड 19 संक्रमण

  •  बचाव के वर्तमान प्रावधान शायद पर्याप्त नहीं

  •  जांच के बाद नमूने और मेडिकल वेस्ट का खतरा

  •  ऑपरेशन के दौरान संक्रमित हो गयी पूरी टीम ही

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः भारत में कोरोना जांच की गति जैसे जैसे तेज हो रही है, वैसे वैसे संक्रमण का




दायरा भी बढ़ता हुआ नजर आता है। लेकिन इसके बीच ही चिकित्सा विशेषज्ञ यह मान

रहे हैं कि अब भारत में कोरोना जांच के लिए जो नमूने लिए जा रहे हैं, उनका सही तरीके से

निष्पादन भी किया जाना चाहिए वरना बॉयो मेडिकल वेस्ट के साथ उन्हें एकत्रित किये

जाने का दूसरा खतरा कहीं कहीं नजर आया है। कोरोना की जांच और ईलाज से जुड़े

स्वास्थ्यकर्मियों में लगातार संक्रमण फैलने की वजह से इस पर विशेषज्ञों का ध्यान गया

है। इसके अलावा भी कई अन्य घटनाएं ऐसी प्रकाश में आयी हैं, जो और अधिक सावधानी

बरतने की हिदायत दे रही है। यह चिंता इसलिए भी  कोरोना जांच के दौरान

अधिक बढ़ी है क्योंकि बचाव के सारे उपाय होने के बाद भी लोग कोरोना संक्रमण की चपेट

में आये हैं। इस बात की अधिक चर्चा इनदिनों सारे उपाय करने के बाद भी डाक्टरों के

कोरोना की चपेट में आने की वजह से हो रही है। यह घटना जयपुर की है जहां के

एसएमएस अस्पताल के एक ऑपरेशन में शामिल रहे सारे लोग कोरोना पॉजिटिव पाये

गये हैं। उनके बारे में पता चला है कि कोरोना संक्रमित एक मरीज का अत्यावश्यक

ऑपरेशन करने के बाद वे संक्रमित पाये गये हैं। लेकिन इन सभी लोगों ने ऑपरेशन

थियेटर के प्रावधानों के साथ साथ मरीज के कोरोना संक्रमित होने की सूचना की वजह से

अतिरिक्त सावधानी बरती थी। इसके बाद भी उनके संक्रमित होने से चिकित्सा जगत में

बचाव के तरकीबों पर नई बहस शुरु हो गयी है।

भारत में कोरोना जांच की तौर तरीकों में गड़बड़ी

ऑपरेशन की प्रक्रिया को जानने वाले इस बात को अच्छी तरह समझ सकते ह कि मास्क

और चश्मा पहन लेने के बाद ऊपर से जब पीपीई किट पहना जाता है तो देखने की शक्ति

काफी कम हो जाती है। इस दौरान ऑपरेशन थियेटर में चालू एयरकंडिशनर और कृत्रिम

सांस के उपकरण भी संक्रमण फैलाने के कारण बन सकते हैं। इसी वजह से अब भारत में

कोरोना जांच के नमूनों का सही तरीके से निष्पादन पर बहस छिड़ी हुई है। यह बहस




इसीलिए भी है क्योंकि उसी मरीज की जांच जिस व्यक्ति ने सिर्फ एन 95 मास्क पहनकर

की थी, वह कोरोना के प्रभाव में नहीं आया है। यानी पीपीई किट के बाद भी ऑपरेशन

थियेटर के अंदर मौजूद सभी लोगों तक किसी न किसी तरीके से यह कोरोना वायरस

अपनी पहुंच बनाने में सफल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन मामलों में अतिरिक्त

सावधानी बरती जाए तो इससे छलांग लगाते कोरोना संक्रमण की गति को थामा जा

सकता है। इस पर बहस छिड़ने के बाद इस तरफ भी विशेषज्ञों का ध्यान गया है कि

मास्क, दस्ताना और पीपीई किट पहनना ही पर्याप्त नहीं है। इस बात पर भी ध्यान दिया

जाना चाहिए कि जांच के लिए एकत्रित किये गये नमूनों को किस माध्यम से और किस

तरीके से प्रयोगशालाओं को तक पहुंचाया जा रहा है। अनेक जांच केंद्रों में जांच के लिए

नमूने एकत्रित किये जा रहे हैं और उन्हें चंद प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जा रहा

है। इसके बीच संक्रमण ना फैले, इसका भी समुचित प्रबंध किये जाने की जरूरत है।

एहतियात बरतने में लापरवाही बरत रहे हैं स्वास्थ्य कर्मी

दूसरी तरफ यह भी उल्लेख किया गया है कि जैसे जैसे भारत में कोरोना जांच के लिए

अधिकाधिक केंद्र खोले जा रहे हैं, वैसे वैसे उसके मेडिकल वेस्ट की मात्रा भी बढ़ती जा रही

है। अगर सही तरीके से उनका निष्पादन नहीं किया गया तो यह मेडिकल कचड़ा ही

कोरोना फैलाने के एक नया जरिया बन रहा है। इसे अगर सही तरीके से नियंत्रित किया

गया तो अनजाने में जो संक्रमण फैल रहा है, उस पर तुरंत ही रोक लग पायेगी। यह

स्थिति इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि अब तक 87 हजार स्वास्थ्यकर्मी कोरोना

की चपेट में काम के दौरान आये हैं। इनमे से 573 लोगों की मौत हुई है। इसलिए कोरोना

जांच के साथ साथ बाद में संक्रमण ना फैले, उसपर अब अधिक ध्यान दिये जाने की

जरूरत है क्योंकि अब देश में हर रोज एक लाख के करीब कोरोना संक्रमित पाये जा रहे।

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