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भारत-बांग्लादेश सीमा पर पशुओं की तस्करी जारी है : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री

  • 15 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा फायदा : सीबीआई

  • नित्यानंद राय ने राज्य सभा में इसकी जानकारी दी

  • बार्डर आउट पोस्ट मजबूत करने का काम जारी है

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : भारत-बांग्लादेश के बीच मवेशी तस्करी बेरोकटोक चल रही है। केंद्रीय गृह

राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सीमा पर बीएसएफ द्वारा

बांग्लादेश में तस्करी के लिए रखे गए 4.79 लाख से अधिक मवेशी पकड़े गए। मंत्री ने कहा

कि 2016 में 1,68,801 मवेशियों को सीमा पर, 2017 में 1,19,299, 2018 में 63,716, 2019

में 77,410 और 2020 में 46,809 मवेशियों को जब्त किया गया था। राज्य सभा में एक

लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए, राय ने कहा कि बीएसएफ द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा

पर मवेशियों की तस्करी को रोकने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय

सीमा के साथ-साथ अवलोकन पोस्ट स्थापित करना और बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) की

मौजूदा सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं। हालाँकि, इस मामले को लेकर सीबीआई के एक

वरिष्ठ अधिकारी ने गुवाहाटी में कहा कि भारत से बांग्लादेश की 2,216 किलोमीटर लंबी-

चौड़ी सीमा पशु और खासकर गौ-तस्करों को काफी मदद दे रही है। पशुओं की ये तस्करी

बांग्लादेश का राजस्व भी बढ़ा रही है। गाय की तस्करी को लेकर सीबीआई ने चौंकाने वाला

खुलासा किया है। उनके मुताबिक लगातार देश के गायों की खेप की खेप बांग्लादेश सीमा

के जरिए बाहर पहुंचाई जा रही है। यहां तक कि इस तस्करी में सीमा सुरक्षा विभाग और

कस्टम वालों की भी मिलीभगत बताई जा रही है नस्ल और ऊंचाई के आधार पर गायों की

कीमत तय होती है। जैसे हरियाणा और यूपी की नस्लें ज्यादा कीमत पर बिकती हैं,

जबकि बंगाल की गायों की कीमत अपेक्षाकृत कम है। ईद के दौरान इनकी मांग और

कीमत ज्यादा हो जाती है। बांग्लादेश में मुस्लिम-बहुत आबादी के कारण वहां बीफ-ईटर

ज्यादा है इसलिए गायों की तस्करी बंगाल की सीमा से होती है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई नेता भी रडार पर हैं

साथ ही कई वरिष्ठ नेता भी एजेंसी के रडार पर हैं।इस बारे में लगभग सालभर से बात हो

रही है। पश्चिम बंगाल में 2,216 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए हर

साल बड़ी संख्या में मवेशियों की बांग्लादेश में तस्करी होने का अनुमान है। सीमावर्ती क्षेत्र

मालदा-मुर्शिदाबाद के कच्चे रास्ते से रोजाना गायें बांग्लादेश पहुंचती हैं। सीबीआई का

मानना है कि जिस संख्या में गायों की तस्करी होती है, उसे केवल पांच फीसदी ही

बीएसएफ के जवान रोक पाते हैं। बाकियों को या तो जानकारी कम है या फिर मिलीभगत

है। अब सीबीआई इसके पीछे काम करने वाले सिंडिकेट के बीच सांठगांठ का खुलासा करने

की कोशिश में है।नस्ल और ऊंचाई के आधार पर गायों की कीमत तय होती है। जैसे

हरियाणा और यूपी की नस्लें ज्यादा कीमत पर बिकती हैं, जबकि बंगाल की गायों की

कीमत अपेक्षाकृत कम है। ईद के दौरान इनकी मांग और कीमत ज्यादा हो जाती है।

बांग्लादेश में मुस्लिम-बहुत आबादी के कारण वहां बीफ-ईटर ज्यादा है इसलिए गायों की

तस्करी बंगाल की सीमा से होती है।इसके अलावा हमारे यहां कानूनी प्रक्रिया का लंबा

चलना जैसी बातें भी है, जिसका सीधा असर गायों और दूसरे मवेशियों पर हो रहा है। एक

बात ये भी है कि बांग्लादेश में पशु तस्करी को अपराध नहीं माना जाता, बल्कि ये वहां की

सरकार के लिए राजस्व का जरिया है।

कई लोगों के लिए यह बेहतर कमाई का जरिया है

जैसे भारत का तस्कर बांग्लादेश की सीमा में जाते ही पशुओं के बदले कर चुकाता है और

बाकायदा व्यापारी कहलाता है। बांग्लादेश में पशुओं को खरीदकर ज्यादा कीमत पर दूसरे

बीफ खाने वाले देशों को भी बेचा जाता है। ये भी वहां आय का एक जरिया है। साथ ही

पशुओं से जुड़े चमड़ा उद्योग भी वहां खूब चलते हैं। तो कुल मिलाकर हमारे यहां के मवेशी

पड़ोसी देश की जीडीपी में योगदान दे रहे हैं।सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि

सीबीआई ने इस तस्करी का अनुमानित फायदा लगभग 15 हजार करोड़ रुपए से भी

ज्यादा है। इसके अलावा असम से भी तस्करी होती है। गायों को इंटरनेशनल बॉर्डर पार

करवाकर बांग्लादेश के गाय तस्करों को बेच दिया जाता है।

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