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कैरियर के प्रति गंभीर युवकों से राजनीतिक दलों को हो रही परेशानी

  • चुनाव प्रचार के लिए कार्यकर्ताओं की कमी सभी दलों में
  • युवाओं का फोकस पढ़ाई पूरी कर रोजगार के प्रति
  • पहले जो काम करते थे, उन्हें हुई है दलों से निराशा
  • दलों के चुनाव मैनेजर लोग जुटाने में जी जान लगा रहे
संवाददाता

रांचीः कैरियर के प्रति अब रांची का युवा ज्यादा सतर्क हो गया है।

शायद इसी वजह से राजनीतिक दलों के खेमों में अब नये चेहरे कम

नजर आते हैं। वैसे इस स्थिति को अनेक लोग अच्छा बदलाव मानते

हैं। लेकिन साथ में यह बताने से नहीं चूकते कि राजनीतिक

दलों का झंडा नहीं ढोने के बाद भी इन युवाओं की राजनीतिक ज्ञान

सोशल मीडिया के दौर में ज्यादा हो चला है।

अभी झारखंड में विधानसभा चुनाव का दौर चल रहा है। लिहाजा हर

राजनीतिक दल को अतिरिक्त कार्यकर्ताओं की जरूरत पड़ रही है। इस

कमी को नये दौर के युवा पूरा करना नहीं चाहते। इसी वजह से पार्टियो

के पुराने कार्यकर्ताओं को जैसे तैसे और भाड़े के लोगों से काम चलाना

पड़ रहा है। पार्टियों के दफ्तरों में युवा शाखा के सक्रिय होने के बाद भी

नये चेहरों की आमद बहुत कम दिखाई पड़ती है।

इस स्थिति के बारे में जब कुछ युवाओं से अनौपचारिक बात-चीत की

गयी तो सभी राजनीतिक घटनाक्रमों के बारे में अच्छी तरह वाकिफ

दिखे। कुछ ने कई राजनीतिक सवालों का उत्तर तुरंत ही अपने

स्मार्ट फोन की मदद से जानकारी लेने के बाद दिया। इस क्रम में

एक बात यह भी आयी कि कई बार ऐसी सूचनाओं के बीच भ्रामक

तथ्य भी प्रसारित किये जाते हैं। इसका उत्तर कैरियर को लेकर

जागरुक युवकों के दल ने सम्मिलित तौर पर दिया कि अगर

कोई सूचना भ्रामक है तो उसका खंडन भी शीघ्र ही आने लगता है। ऐसे

में गलत तथ्यों की पहचान करना और भी आसान हो गया है।

वैसे इस क्रम में सभी ने इस बात को स्वीकारा कि सोशल मीडिया के

माध्यम से उनतक जानकारी पहुंचने का सिलसिला ही सूचना की

प्राथमिक कड़ी है।

कैरियर के आगे राजनीति को नहीं रखते आज के युवा

दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के अलावा भी कई अन्य कार्यक्रमों के

लिए भीड़ जुटाने का काम करने वाले युवाओं का पुराना दल भी अब

रोजगार से जुड़ गया है। पहले रांची के कई इलाकों में ऐसे युवाओं का

दल मौजूद था जो इसके काम आता था। वर्तमान में उस टोली के कई

लोगों से संपर्क होने पर लोगों ने कहा कि अब वह जमाना गया। सिर्फ

चंद दिनों के अस्थायी रोजगार के लिए वे अपने परिश्रम से खड़ा किय

गया कारोबार तो नहीं छोड़ सकते। वैसे भी चुनाव में दिन रात मेहनत

करन के बाद भी चुनाव जीतने वाले लोग बाद में कुछ ऐसा व्यवहार

करते हैं, कि चुनाव प्रचार से दिल खट्टा हो गया है।

इन दोनों ही तरह की दलीलों के बीच राजनीतिक दलों के चुनाव

मैनेजर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करन के लिए इधर उधर से मदद

के लिए लोग जुटाने फिर रहे हैं। इस वजह से किसी भी राजनीतिक दल

का चुनाव प्रचार अब तक रांची में जोर नहीं पकड़ पाया है।

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