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कोरोना के लिए सरकारी स्तर पर भी सावधानी जरूरी

कोरोना के लिए अच्छी खबर यह है कि अब संक्रमण का आंकड़ा नीचे आ रहा है और दूसरी

तरफ ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत काफी ऊपर चला गया है। यह सुखद संकेत होने

के बाद भी इस बात के लिए आगाह करना जरूरी है कि इन आंकड़ों को देखकर लापरवाह

होने की कोई आवश्यकता नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पहले ही स्पष्ट कर

दिया है कि यह खतरा टला नहीं है और जैसे जैसे तापमान में कमी होगी, यह खतरा दोबारा

और तेजी से लौट सकता है। इस पूरे कोरोना के लिए सरकारी स्तर पर सावधानी की बात

इसलिए अधिक प्रासंगिक है क्योंकि बीते कल ही ओरमांझी के एक गांव से इसके उल्लंघन

की गंभीर शिकायत मिली है। कांके प्रखण्ड के पूर्वी क्षेत्र के हुन्दूर पंचायत में सीएचसी

कांके द्वारा मुफ्त कोरोना जांच शिविर में  कोरोना जांच कर्मियों द्वारा घोर अनियमिता

बरती गयी। चिकित्सा टीम के कर्मी बिना पीपीई किट पहने ग्रामीणों का कोरोना जांच कर

रहे थे । स्वास्थ्य कर्मी सरकार द्वारा दिए गए निर्देर्शों का पालन नहीं करते हुए जांच में

लगे थे। जिसके कारण ग्रामीण काफी डरे सहमे से थे। चिकित्सा कर्मियों को हुन्दूर

पंचायत के मुखिया विनोद बेदिया ने किट पहन लेने का आदेश देने पर जांच कर रही

चिकित्सा कर्मी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि गर्मी बहुत अधिक है ऐसे में पीपीई

किट कैसे पहने बहुत पसीना निकलता है।

कोरोना के लिए स्वास्थ्य कर्मियों का सतर्क होना ज्यादा जरूरी

इसी एक बात से समझा जा सकता है कि कोरोना के लिए सरकारी स्तर पर कितनी

सावधानी बरते जाने की जरूरत है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब तक मिले

कुल मरीजों में से 83,571 कोरोना मरीज हुए स्वस्थ, अब 8167 एक्टिव केस बचे हैं।

झारखंड में कोरोना की रफ्तार कम हो रही है। पिछले 10 दिनों में राज्य में रोजाना 1000 से

कम मरीज मिले रह हैं। दो अक्टूबर से लेकर 11 अक्टूबर तक राज्य में 7861 कोरोना के

नए मरीज मिले हैं जबकि इतने ही दिनों में 10,018 कोरोना संक्रमितों के स्वस्थ होने के

बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई है। राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर

92,525 हो गई है जबकि रिकवरी रेट बढ़कर 90 फीसदी के पार हो गया है। राज्य में अब

तक मिले कुल कोरोना संक्रमित मरीजों में से 90.32 फीसदी मरीज स्वस्थ होकर घर लौट

चुके हैं। यानी कुल मरीजों में से 83,571 मरीज अब तक घर लौट चुके हैं। राज्य के

विभिन्न कोविड सेंटर्स में अब 8167 एक्टिव केस रह गए हैं जिनका इलाज जारी है। इधर

रांची में उपायुक्त ने सभी अस्पताल जहां कोविड-19 से संक्रमित मरीजों को इलाज के

लिए एडमिट किए जाने संबंधित समीक्षा की। उपायुक्त ने सभी संबंधित अस्पतालों को

अस्पताल में बेड की उपलब्धता, और बेड की उपलब्धता, आईसीयू, वेंटिलेटर इत्यादि

संबंधी सुविधा की जानकारी फेसिलिटी एप्प पर प्रतिदिन अपलोड करने का निर्देश दिया।

सरकार अपने लोगों की सतर्कता पर अधिक ध्यान दे

इसके अतिरिक्त अस्पताल में दाखिल हो रहे कोविड-19 मरीजों एवं अस्पताल से छुट्टी लेने

वाले मरीजों का आंकड़ा डेली बेसिस पर अपडेट करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान

बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले अस्पतालों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी

करने का निदेश दिया गया। साथ ही, वैसे अस्पताल जिन्होंने फैसिलिटी एप्प पर डेटा

अपडेट करने में ढिलाई बरती है, उन्हें तुरंत अपडेशन में सुधार करने का निर्देश दिया गया।

बैठक के दौरान उपस्थित अनुमण्डल पदाधिकारी बुंडू उत्कर्ष गुप्ता ने कहा, फैसिलिटी

एप्प पर डेटा अपडेट करने संबंधित कई बैठक पूर्व में भी आमंत्रित की गई है। इसके

बावजूद कई अस्पताल फैसिलिटी एप्प पर डेटा अपडेट नहीं कर रहे हैं, जिसे हल्के में नहीं

लिया जाएगा। सरकार द्वारा पिछले मार्च महीने से किये जाने वाले प्रयासों के बाद भी

अगर सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल के स्तर पर नियमों की अनदेखी की जा रही है

तो यह चिंता का विषय है। कोरोना संक्रमण के मुद्दे पर यह चिंता का विषय है कि अगर

सरकारी स्वास्थ्यकर्मी ही नियमों की अनदेखी कर रहे हैं तो इस बात की गारंटी कौन लेगा

कि उनकी वजह से कोरोना संक्रमण का विस्तार नहीं हो रहा है।

वायरस संक्रमण के तौर तरीकों को अब सभी जानते हैं

यह बार बार बताया गया है कि कोरोना कैसे फैलता है। अब तो दूर दराज के ग्रामीण भी

इसे भली भांति समझने लगे हैं। ऐसे में अगर सरकारी काम के तहत प्रशिक्षित स्वास्थ्य

कर्मियों के द्वारा बिना पीपीई किट पहने लोगों की जांच की जा रही है तो उससे क्या संदेश

जा रहा है, उस बात को गंभीरता को तो सरकारी स्तर पर समझते हुए उसका समाधान

करना होगा। ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जांच के रास्ते ही कोरोना का

संक्रमण अन्य इलाकों तक पहुंचेगा।


 

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