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कार्डिफ विश्वविद्यालय में अचानक ही हो गया यह कमाल

  • गलती से तैयार हुई विधि सभी कैंसरों पर असरदार

  • खोज रहे थे बैक्टेरिया का ईलाज और मिल गया यह

  • हर किस्म के कैंसर पर एक जैसी मारक शक्ति इसकी

  • पता चलने के बाद अभी अन्य परीक्षणों का दौर जारी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कार्डिफ विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसीन में

अनुसंधान का काम चल रहा था। वे जिस पद्धति पर काम कर रहे थे,

उसी में अचानक ही यह उपलब्धि हासिल हुई।

इनलोगों ने अपने काम के क्रम में वैसे प्रतिरोधक कोश की तलाश कर

ली, जो हर किस्म के कैंसर को मार सकती है। इस खोज के बारे में

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अचानक ही हुआ है क्योंकि

वह किसी अन्य काम में लगे हुए थे। लेकिन इस कोष के सामने आने

के बाद यह तय माना जा रहा है कि अब दुनिया में कैंसर के ईलाज की

यह पद्धति शायद सबसे तेजी से आगे बढ़ेगी। इस प्रतिरोधक कोश की

और गहन जांच की जा रही है। ताकि व्यवहारिक इस्तेमाल से पहले

क्लीनिकल ट्रायल भी हो जाए। नेचर इम्युनोलॉजी नामक पत्रिका में

इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है। जिस सेल को

खोजा गया है वह नये प्रकार का टी सेल है। इसमें कैंसर के प्रभाव को

पूरी तरह समाप्त कर देने की क्षमता पायी गयी है। इस उपलब्धि के

बारे में इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने साफ साफ कहा है कि यह गलती

से मिलने वाली उपलब्धि है। उनलोगों के मुताबिक वे दरअसल कई

किस्म के खूनों की जांच कर रहे थे, जो बैक्टेरिया के साथ लड़ सके।

इस खून की कोशिकाओं में कौन सा सेल यह काम कर सकता है,

उसका वास्तविक परीक्षण किया जा रहा था। इसी क्रम में अचानक ही

कैंसर से लड़ने वाले इस सेल की पहचान हो गयी। वैसे यह खोज

बिल्कुल ही नई अवस्था में है लेकिन इससे कैंसर के ईलाज की दिशा में

नई राह अवश्य खुल चुकी है। अब इसी सेल के असर को जानवरों और

इंसानों पर आजमाया जाना है।

कार्डिफ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दी जानकारी

शोध के बारे में बताया गया है कि आम तौर पर शरीर की अपनी

प्रतिरोधक क्षमता ही बाहरी विषाणुओं के आक्रमण को रोकती है। जब

शरीर के अंदर किसी विषाणु का प्रवेश होता है तो सफेद रक्त कण में

मौजूद यह सेल विषाणु को मारने में जुट जाते हैं। इसी क्रम में अचानक

ही यह सेल वैज्ञानिकों की नजर में आया, जो अपनी संरचना और

आचरण की वजह से कैंसर कोशिकाओं को मारने में सक्षम पाया गया।

इससे पहले से ही इम्युनोथेरापी के तहत खास किस्म के कैंसर के

ईलाज का काम चल रहा है। लेकिन वह पद्धति कुछ खास किस्म के

कैंसरों तक ही सीमित है। यह सर्वविदित है कि वर्षों से कैंसर के ईलाज

के लिए सीएआर-टी पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत

मरीज के अपने प्रतिरोधक कोशिकाओं और जेनेटिक संशोधन की

बदौलत उन्हें कैंसर समाप्त करने के काम में लगाया जाता है। इस

विधि के तहत जब जेनेटिक तौर पर संशोधित टी कोशिकाओं को

दोबारा शरीर में प्रवेश कराया जाता है तो वे अंदर जाने ही कैंसर पीड़ित

कोशिकाओं की खोज कर उन्हें समाप्त करने लगते हैं। लेकिन इस

विधि की खामी यह है कि यह कुछ खास किस्म के कैंसरों में ही कारगर

है। इससे बोन मैरो और ब्लड कैंसर में तो फायदा होता है लेकिन जहां

कैंसर के गांठ बन गये हैं, वहां यह विधि काम नहीं कर पाती है। जबकि

गांठ बन जाने वाले कैंसर से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक है।

इसी वजह से दुनिया भर में एक ऐसी विधि के लिए निरंतर शोध चल

रहा है जो एक ही तरीके से हर प्रकार के कैंसर को जड़ से समाप्त कर

सके।

उस टी सेल को खोजा गया है जो सभी कैंसरों पर असरदार

इस बार जिस टी सेल को खोजा गया है, उसकी प्रारंभिक जांच भी कर

ली गयी है। एमआरआइ के दौरान यह पाया गया है कि यह टी सेल

सभी प्रकार की कोशिकाओं के साथ संपर्क में होता है। इसलिए यह

शरीर के अंदर मौजूद सभी प्रकार के कैंसर कोशिकाओं पर एक जैसा

हमला करने में सक्षम है। अच्छी बात यह है कि इसे जेनेटिक तौर पर

सुधारने के बाद यह शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर कोई ध्यान नहीं

देगी और सिर्फ कैंसर पीड़ित कोशिकाओं पर ही हमला करेगी।

प्रारंभिक अनुसंधान का निष्कर्ष है कि यह नया खोजा गया टी सेल अब

चमड़ा, फेफड़ा, खून, हड्डी, छाती, किडनी, ओवरी, प्रोस्टेट और

सर्वाइकल कैंसर में एक जैसा असरदार साबित होगा। इस सेल को

खोजने वाले यह भी देख चुके हैं कि हर किस्म की इम्युनोथेरापी में

इसका एक जैसा इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही शरीर के अंदर

मौजूद होने की वजह से अलग अलग मरीज के लिए अलग अलग

ईलाज जैसी अधिक खर्चीला भी नहीं है।

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