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कार्बन का नया स्वरुप पदार्थ विज्ञान के सिद्धांत के प्रतिकूल काम करता है

  • ग्राफाइन को आप जितना मोड़ोगे उतना ही नर्म होगा

  • अन्य पदार्थ मोड़े जाने पर कड़े होते जाते हैं

  • मजबूती में लचीलेपन की वजह से उपयोगी

  • कई वैज्ञानिक कार्यो में पहले से ही कारगर

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कार्बन का नया स्वरुप वैज्ञानिकों के बहुत काम आने लगा

है। अभी हाल ही में इस पर कई शोध हो चुके हैं। इन शोधों में ग्राफाइन

नाम का यह कार्बन स्वरुप अपनी संरचना और हल्केपन की वजह से

कई नये अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है।

अब इसके स्वरुप के बारे में वैज्ञानिकों को इस बात की जानकारी मिली

है कि इस ग्राफाइन को जितना मोड़ा जाता है, वह अपनी आणविक

संरचना की वजह से उतना ही नर्म होता चला जाता है। सामान्य तौर

पर अन्य धातुओं की संरचना पदार्थ विज्ञान के सिद्धांत पर इस स्थिति

में कड़ी होती है। सिर्फ ग्राफाइन इसका अपवाद साबित हो रहा है।

ग्राफाइन तैयार होन के बाद इसके हल्के वजन की वजह से कई नये

कार्यों में इसके प्रयोग की तैयारियां चल रही हैं। खास तौर पर सौर

ऊर्जा के क्षेत्र में यह आने वाले दिनों में कई बदलाव लाने वाला है। साथ

ही वायुमंडल से कार्बन समाप्त करने के लिए कार्बिन डॉईऑक्साइड

कम करने में भी यह काम आ रहा है। इन विधियों के व्यापारिक और

सामूहिक इस्तेमाल पर काम चल रहा है।

एक वैज्ञानिक पत्रिका नेचर मैटेरियल्स में इसके इसी गुण के बारे में

जानकारी दी गयी है। जिसके बाद इस विषय पर और अधिक

अनुसंधान होने लगे हैं। यह जान लेना जरूरी है कि कार्बन के इस

स्वरुप में अब तक हासिल पदार्थों में से दुनिया का सबसे मजबूत

पदार्थ माना गया है। एक क्रम से एक पर्त पर बिछा कार्बन का यह

स्वरुप इतनी मजबूती प्रदान करने के बाद भी वजह में काफी हल्का है।

हल्का होने की वजह से यह लचीला है, इसकी जानकारी तो पहले से ही

लोगों को थी। पहली बार इसे मोड़ने पर उसके और भी लचीला होने की

बात सामने आयी है।

कार्बन का नया स्वरुप कई संभावनाओं का जनक

जाहिर है कि इस लचीलेपन की वजह से उसके इस्तेमाल की

संभावनाएं भी काफी बढ़ गयी हैं। समझा जाता है कि अपने आणविक

गुणों की वजह से वह इलेक्ट्रानिक यंत्रों में और कारगर भूमिका

निभाने  जा रहा है। साथ ही अब लचीलेपन के गुण की वजह से उसकी

खूबियों में ईजाफा हो गया है। नैनो पार्टिकल पर आधारित वैज्ञानिक

अनुसंधान में इस ग्राफाइन का उपयोग आने वाले दिनों में बढ़ना अब

तय हो गया है। आम तौर पर किसी भी पदार्थ को मोड़ने पर उसमें

कड़ापन आने लगता है। ऐसा सिर्फ उनकी आणविक संरचना की वजह

से होता है। ग्राफाइन ने इसी सिद्धांत को गलत साबित कर दिया है।

मोड़ने के बाद अधिक लचीला होने के गुण की वजह से वह पदार्थ आने

वाले दिनों में कई वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित संयंत्रों की पूरी

संरचना और काम करने की विधि को बदलने जा रहा है। इसके शोध से

जुड़े वैज्ञानिक पिछले दो दशक से इस पर काम कर रहे थे। अब उस दो

दशक की शोध का बेहतर नतीजा सामने आया है। जिससे वैज्ञानिक

जगत में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।

लेकिन इस पर वैज्ञानिक और शोध करना चाहते हैं क्योंकि

और अधिक मोड़ने के बाद इसकी आणविक स्थिति क्या होती है, इसे

शोधकर्ता परखना चाहते हैं।

वैज्ञानिकों के दल के काम पर प्रकाशित शोध प्रबंध में बताया गया है कि

कई पर्त पर ग्राफाइन को एक साथ रखने पर वह किसी लकड़ी की तरह

मजबूत और कड़ा नजर आता है। लेकिन अंदर से उसका लचीलापन

समाप्त नहीं होता। जांच के दौरान जब ताकत लगाकर इन ग्राफाइन की

परतों को मोड़ा गया है तो उनका आचरण किसी कागज के बंडल की तरह

लचीला साबित हुआ है।

इसके आणविक कण दूसरे पदार्थों से भिन्न आचरण करते हैं

यह अपने आप में बड़ी बात है कि मजबूत होने के बाद भी यह अपनी

लचीलापन बनाये रखता है। अंदर की आणविक संरचना पर गौर करने के बाद

वैज्ञानिकों ने पाया है कि इसके आणविक कण एक दूसरे से फिसलते हुए आगे

पीछे जाने की क्षमता रखते हैं। इसी वजह से उसे जितना मोड़ा जाता है, यह

फिसलन और बढ़ती जाती है। इसी वजह से वह मोड़ने पर और ज्यादा

लचीला आचरण करने लगता है।

प्रकाशित शोध प्रबंध में विस्तार से इसके लचीलेपन और अन्य पदार्थों के

कड़ापन की विस्तार से व्याख्या की गयी है। लचीला होने की वजह से ही इसे

अनेक कार्यों के लिए अब उपयोगी समझा जा रहा है। क्योंकि लचीलेपन के

साथ साथ मजबूती की वजह से वह अनेक वैज्ञानिक कार्यों में इस्तेमाल करने

के लायक है और उसका वजन कम होन की वजह से उसप आधारित यंत्रों का

आकार छोटा और वजन कम होने की उम्मीद है।

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